शहरों में युवाओं द्वारा बाइक पर स्टंट करना, तेज रफ्तार में वाहन चलाना और ड्राइविंग के दौरान फोन पर बात करना आम खतरा बन चुका है। हर वर्ष हजारों जानें केवल लापरवाही और रोमांच के चक्कर में चली जाती हैं। ऐसे में केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। जानकार सूत्रों के मुताबिक दुपहिया वाहनों में अब ऐसे तकनीकी सेंसर लगाए जाएंगे जो स्टंट और गलत तरीके से ड्राइविंग पर अपने-आप नियंत्रण कर सकेंगे।
केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने हाल ही में देश के प्रमुख बाइक निर्माताओं के साथ बैठक की है, जिसमें दो पहिया वाहनों में टच या प्रेशर सेंसर लगाने का प्रस्ताव रखा गया। इस सेंसर का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बाइक पर सवार चालक हैंडलबार से हाथ न हटाए। अगर चालक लगातार 4-5 सेकंड तक हैंडल से हाथ हटाएगा, तो सेंसर सक्रिय हो जाएगा और बाइक की स्पीड अपने-आप कम होने लगेगी। जरूरत पड़ने पर वह पूरी तरह रुक भी जाएगी।
यह तकनीक उन युवाओं के लिए बड़ा झटका होगा, जो चलती बाइक पर स्टंट करने या फोन पर बात करने की कोशिश करते हैं। सरकार का मानना है कि इस कदम से अनियंत्रित ड्राइविंग पर भारी रोक लगेगी और सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।
बैठक में एक और अहम प्रस्ताव रखा गया, सभी दुपहिया वाहनों पर लेग गार्ड लगाना अनिवार्य किया जाए। दुर्घटना विशेषज्ञों के अनुसार, बाइक दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा नुकसान पैरों को होता है। लेग गार्ड चोट की गंभीरता को काफी हद तक कम कर सकता है और कई मामलों में जीवन भी बचा सकता है।
देश में सड़क दुर्घटनाओं से मरने वालों में 45% तक हिस्सा दुपहिया चालकों का होता है। यह आंकड़ा डराने वाला है और सरकारी एजेंसियों को लगातार चिंता में डाल रहा है। तेज रफ्तार, हैवी ट्रैफिक में स्टंट और मोबाइल फोन पर बात करना इन मौतों का सबसे बड़ा कारण हैं। नए सेंसर इन आदतों को तकनीकी रूप से रोकने में कारगर साबित हो सकता है।
बाइक निर्माताओं को अब अपने मॉडल में इन सेंसरों को शामिल करना होगा। शुरुआत में यह तकनीक लागू करना चुनौतीपूर्ण और महंगा हो सकता है, पर विशेषज्ञों का कहना है कि इससे लोगों की सुरक्षा कई गुना बढ़ेगी। जहां एक ओर युवा रोमांच के लिए स्टंट और खतरनाक ड्राइविंग करते हैं, वहीं सरकार का यह कदम सड़क पर अनुशासन और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
सड़क सुरक्षा को लेकर यह तकनीकी पहल न सिर्फ आधुनिक है बल्कि समय की मांग भी है। हैंडलबार सेंसर और लेग गार्ड जैसे उपाय भविष्य में दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अगर यह नियम लागू हुआ, तो बाइक स्टंट, ओवरस्पीडिंग और मोबाइल पर बात करने जैसी खतरनाक आदतें काफी हद तक नियंत्रित हो जाएगी और इससे हजारों जानें बच सकती हैं।
