विज्ञान की चेतावनी और मानव भविष्य - “चांद की सतह पर उभरती नई दरारें”

Jitendra Kumar Sinha
0


https://lroc.im-ldi.com/news/uploads/LROCiotw/M146858595L_WAC.png


लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि चांद एक ठंडा, मृत और भूगर्भीय रूप से निष्क्रिय पिंड है। पृथ्वी की तुलना में उसका छोटा आकार, वातावरण का अभाव और अरबों वर्षों से लगभग अपरिवर्तित दिखती सतह, इन सबने मिलकर यह धारणा बना दी है कि चांद अब किसी बड़े परिवर्तन से गुजरने की स्थिति में नहीं है। लेकिन हालिया वैज्ञानिक खोजों ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है।

‘नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम’ के वैज्ञानिकों द्वारा चांद की सतह पर 1,114 नई दरारों की पहचान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चांद आज भी धीरे-धीरे बदल रहा है। इसके साथ ही चांद पर अब तक पहचानी गई कुल दरारों की संख्या 2,634 हो गई है। यह खोज न केवल चंद्र विज्ञान के लिए अहम है, बल्कि उन सभी अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए भी चेतावनी है जो भविष्य में चांद पर मानव मिशन और स्थायी बेस बनाने की योजना बना रही हैं।

चांद की सतह पर पाई जाने वाली ये दरारें सामान्य खाइयों या गड्ढों जैसी नहीं हैं। वैज्ञानिक इन्हें “थ्रस्ट फॉल्ट स्कार्प्स” (Thrust Fault Scarps) कहते हैं। जब किसी ग्रह या उपग्रह की आंतरिक परतें ठंडी होकर सिकुड़ती हैं, तब उसकी ऊपरी सतह पर दबाव पड़ता है, इस दबाव के कारण सतह टूटकर ऊपर-नीचे खिसक जाती है, परिणामस्वरूप सतह पर सीधी या घुमावदार ऊंची लकीरें बन जाती हैं। चांद पर देखी गई अधिकांश दरारें इसी प्रक्रिया का परिणाम हैं। ये दरारें कुछ मीटर ऊंची और कई किलोमीटर लंबी हो सकती हैं।

इस खोज का श्रेय ‘आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीक और उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग’ को जाता है। नासा का Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO), हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरा (LROC) और डिजिटल एलिवेशन मॉडल ने खोज की है। वैज्ञानिकों ने हजारों तस्वीरों का विश्लेषण किया और पाया कि चांद के कई इलाकों में पहले से अज्ञात दरारें मौजूद हैं। यह खोज इस बात का प्रमाण है कि चांद की सतह पर होने वाले बदलाव इतने सूक्ष्म हैं कि उन्हें पहचानने के लिए दशकों तक निरंतर अवलोकन की जरूरत होती है।

चांद के अंदर मुख्य रूप से तीन परतें मानी जाती हैं। पहला बाहरी पपड़ी (Crust), दूसरा मेंटल (Mantle) और तीसरा छोटा सा कोर (Core)। पृथ्वी की तुलना में चांद का कोर बहुत छोटा है और उसकी आंतरिक ऊष्मा बहुत पहले ही काफी हद तक समाप्त हो चुकी है। अरबों वर्षों से चांद धीरे-धीरे ठंडा हो रहा है, ठंडा होने पर उसका आयतन घट रहा है। अनुमान है कि चांद अब तक लगभग 50 मीटर तक सिकुड़ चुका है, यही सिकुड़न सतह पर दरारों का कारण बन रही है। 

दरारों की मौजूदगी केवल संरचनात्मक बदलाव नहीं दर्शाती है, बल्कि वे चंद्र भूकंप (Moonquakes) का भी संकेत देती हैं। गहरे चंद्र भूकंप, उथले चंद्र भूकंप, उल्कापिंड टकराने से उत्पन्न कंपन और थर्मल कंपन (तापमान परिवर्तन से) होते हैं।  उथले चंद्र भूकंप सबसे खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि ये सतह के बहुत करीब होते है, इनकी तीव्रता कई बार पृथ्वी के मध्यम भूकंप जैसी हो सकती है और कंपन कई मिनट तक बना रह सकता है।

नासा के लिए यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एजेंसी 2028 तक इंसानों को दोबारा चांद पर भेजने की योजना बना रही है। लेकिन चिंता के प्रमुख कारण हैं दरारों के आसपास भूकंप की संभावना, चंद्र बेस की नींव अस्थिर हो सकती है, उपकरणों और मॉड्यूल को नुकसान और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा।

Artemis Program का लक्ष्य केवल चांद पर उतरना नहीं है, बल्कि वहां दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करना है। आर्टेमिस मिशन का उद्देश्य है स्थायी चंद्र बेस, वैज्ञानिक प्रयोग और मंगल मिशन की तैयारी। नई दरारों की खोज ने मिशन प्लानिंग को और जटिल बना दिया है।

अधिकांश नई दरारें चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास मिला है। पुराने ज्वालामुखीय मैदानों में और प्राचीन क्रेटरों के आसपास भी मिला है। यही क्षेत्र भविष्य के मानव मिशनों के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त माना जा रहा था।

वैज्ञानिकों का मानना है कि चांद भूगर्भीय रूप से पूरी तरह मृत नहीं है। उसकी गतिविधियां धीमी हैं, लेकिन जारी हैं और ये दरारें चांद के “जीवित इतिहास” का प्रमाण हैं। 

यदि चांद पर भविष्य में कॉलोनी बसाई जाती है, तो दरारों से दूर स्थान चुनने होंगे। लचीले और झटके सहने वाले ढांचे बनाने होंगे और निरंतर भूकंपीय निगरानी जरूरी होगी। 

यह खोज ग्रहों के विकास को समझने में मदद करती है। पृथ्वी जैसे अन्य पिंडों की तुलना में सहायक है और सौरमंडल के इतिहास की नई परतें खोलती है। 

जहां एक ओर यह खोज खतरे का संकेत देती है, वहीं दूसरी ओर यह चंद्रमा के भीतर की संरचना को समझने का अवसर है। नए वैज्ञानिक प्रयोगों के द्वार खोलती है तो भविष्य के मिशनों को अधिक सुरक्षित बनाने में सहायक है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि दरारें बनना बंद नहीं होंगी। लेकिन उनकी गति बेहद धीमी होगी और चांद का सिकुड़ना अभी भी जारी रहेगा।

चांद को अब केवल एक शांत, स्थिर उपग्रह के रूप में देखना वैज्ञानिक भूल होगी। 1,114 नई दरारों की खोज यह स्पष्ट करती है कि चांद आज भी अपने भीतर बदलाव की कहानी लिख रहा है। यह खोज मानव महत्वाकांक्षाओं के लिए चेतावनी भी है और मार्गदर्शक भी। भविष्य में जब इंसान चांद पर अपने कदम जमाएगा, तो उसे यह याद रखना होगा कि वह जिस धरती पर खड़ा है, वह भी धीरे-धीरे सांस ले रही है। सिकुड़ रही है, टूट रही है और बदल रही है।



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top