बिहार में कामकाजी माताओं के लिए बड़ी पहल - खुलेंगे 300 नए आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार में महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। ‘मिशन शक्ति योजना’ के तहत राज्य में 300 से अधिक (318) “नए आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र” खोले जाने की योजना को तेजी से अमल में लाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य कामकाजी माताओं को अपने छोटे बच्चों की सुरक्षित देखभाल का भरोसेमंद विकल्प देना है, ताकि वे निश्चिंत होकर आजीविका और रोजगार से जुड़ सकें।


‘मिशन शक्ति योजना’ महिला सशक्तिकरण, बाल देखभाल और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की एक समेकित पहल है। इस योजना के अंतर्गत ऐसे क्रेच केंद्र विकसित किए जा रहे हैं जो केवल देखभाल तक सीमित न हों, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा, पर भी ध्यान दें। बिहार जैसे राज्य में, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं, यह योजना विशेष रूप से प्रासंगिक है।


वर्तमान में बिहार के सभी जिलों में 186 आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों से 1097 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। यहां बच्चों को सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक आहार और आयु-अनुकूल गतिविधियां उपलब्ध कराई जाती हैं। इन केंद्रों की सफलता ने ही नए केंद्रों के विस्तार की आवश्यकता को और मजबूत किया है।


प्रस्तावित 318 नए केंद्र खुलने से क्रेच सुविधाओं का दायरा ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में बढ़ेगा। इससे उन परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा जहां माता-पिता, विशेषकर माताएं, काम पर जाती हैं और बच्चों की देखभाल के लिए भरोसेमंद व्यवस्था नहीं होती। नए केंद्रों में प्रशिक्षित कार्यकर्ता, साफ-सुथरा ढांचा, सुरक्षा मानक और पोषण-आधारित भोजन सुनिश्चित किया जाएगा।


इन केंद्रों का सबसे बड़ा लाभ कामकाजी माताओं को मिलेगा। वे अपने बच्चों को सुरक्षित हाथों में छोड़कर रोजगार, स्वरोजगार या कौशल प्रशिक्षण में भाग ले सकेगी। इससे महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ेगी, घरेलू आय में सुधार होगा और आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। यह पहल लैंगिक समानता की दिशा में भी एक ठोस कदम है।


आंगनबाड़ी-सह-क्रेच मॉडल की खासियत यह है कि यहां बच्चों को केवल रखा नहीं जाता है, बल्कि उनके विकास पर समग्र रूप से ध्यान दिया जाता है। नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक आहार, खेल-आधारित सीख और सामाजिक कौशल का विकास यह सभी तत्व बच्चों को एक मजबूत आधार देते हैं। शुरुआती वर्षों में मिला यह सहयोग आगे की शिक्षा और जीवन-कौशल के लिए निर्णायक साबित होता है।


क्रेच सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और सहायक स्टाफ की जरूरत बढ़ेगी। साथ ही, महिलाओं के रोजगार में निरंतरता आने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। दीर्घकाल में यह कदम मानव संसाधन विकास और सामाजिक समावेशन को गति देगा।


बिहार में 300 से अधिक नए आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र खोलने की योजना न केवल एक कल्याणकारी निर्णय है, बल्कि यह राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास की नींव को भी मजबूत करती है। कामकाजी माताओं को राहत, बच्चों को सुरक्षित और शिक्षाप्रद माहौल, तथा समुदाय को रोजगार, इन तीनों स्तरों पर यह पहल सकारात्मक बदलाव लाने वाली है। मिशन शक्ति के तहत यह विस्तार बिहार को एक अधिक समावेशी और सशक्त समाज की ओर ले जाने वाला कदम सिद्ध होगा।



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