1 जुलाई से डीजल खरीद पर होगा सभी प्रतिबंध खत्म

Jitendra Kumar Sinha
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केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को सामान्य मानते हुए पेट्रोल पंपों से डीजल और पेट्रोल की खरीद पर लगाए गए सभी अस्थायी प्रतिबंध समाप्त कर दिए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नए आदेश के अनुसार, 1 जुलाई से वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता बिना किसी मात्रा सीमा के खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे। इसके साथ ही 12 जून को जारी वह आदेश भी रद्द कर दिया गया है, जिसके तहत एक वाहन को प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जा सकता था। सरकार के इस निर्णय से परिवहन, निर्माण, कृषि, उद्योग और ऊर्जा जैसे अनेक क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से औद्योगिक इकाइयां और व्यावसायिक संस्थान इन प्रतिबंधों के कारण अतिरिक्त व्यवस्थाएं करने को मजबूर थे।


हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया था। आशंका जताई जा रही थी कि यदि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित हुई तो देश में डीजल और पेट्रोल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने एहतियातन कई अस्थायी कदम उठाए थे। इनमें प्रमुख रूप से एक वाहन को प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल देने की सीमा तय की गई थी। इसके अलावा औद्योगिक एवं व्यावसायिक संस्थानों को खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर भी रोक लगा दी गई थी, ताकि आम उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध रहे। इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी, कृत्रिम कमी और कालाबाजारी जैसी संभावित समस्याओं को रोकना था।


1 जुलाई से लागू नए आदेश के बाद अब सभी प्रकार के उपभोक्ता सामान्य नियमों के तहत पेट्रोल पंपों से अपनी आवश्यकता के अनुसार ईंधन खरीद सकेंगे। मुख्य बदलाव हैं- प्रतिदिन 200 लीटर डीजल खरीद की सीमा समाप्त। औद्योगिक एवं व्यावसायिक संस्थानों को खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने की अनुमति। ईंधन की खरीद और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य व्यवस्था के अनुसार संचालित होगी। अस्थायी नियंत्रण संबंधी सभी आदेश प्रभावहीन हो जाएंगे। इस फैसले से बड़ी कंपनियों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, निर्माण परियोजनाओं और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को संचालन में आसानी होगी।


देश की अर्थव्यवस्था में डीजल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ट्रकों, बसों, निर्माण मशीनों, जनरेटरों और अनेक औद्योगिक उपकरणों का संचालन डीजल पर निर्भर करता है। पिछले कुछ सप्ताह से लागू प्रतिबंधों के कारण कई संस्थानों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही थी। अब प्रतिबंध हटने के बाद परिवहन कंपनियों को ईंधन की उपलब्धता को लेकर चिंता कम होगी। लॉजिस्टिक्स लागत को नियंत्रित रखने में भी यह निर्णय सहायक हो सकता है। निर्माण कंपनियां, खनन उद्योग, कृषि क्षेत्र तथा बड़े औद्योगिक संयंत्र भी अपनी आवश्यकतानुसार सीधे पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे, जिससे परिचालन अधिक सुचारु होगा।


सरकार का यह निर्णय केवल औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों के लिए ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी सकारात्मक माना जा रहा है। जब ईंधन आपूर्ति सामान्य रहती है और बाजार में कृत्रिम मांग नहीं बनती, तब पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक भीड़ और आपूर्ति संबंधी समस्याएं कम होती हैं। इससे सामान्य वाहन चालकों को भी बिना किसी परेशानी के ईंधन उपलब्ध होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि इस आदेश का पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर तत्काल कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा। कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव, विनिमय दर और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करती रहेगी।


सरकार द्वारा प्रतिबंध हटाने का फैसला इस बात का संकेत माना जा रहा है कि फिलहाल देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता संतोषजनक है और आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से काम कर रही है। पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल किसी बड़े व्यवधान की आशंका कम होने के कारण आपातकालीन नियंत्रण की आवश्यकता नहीं मानी गई। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत ने ऊर्जा आपूर्ति के प्रबंधन में पर्याप्त तैयारी और संतुलन बनाए रखा है।


एक जुलाई से डीजल खरीद पर लगी 200 लीटर की सीमा समाप्त होना और औद्योगिक एवं व्यावसायिक ग्राहकों के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने की अनुमति बहाल होना देश की ऊर्जा व्यवस्था के सामान्य होने का महत्वपूर्ण संकेत है। यह निर्णय उद्योग, परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ बाजार में भरोसा बढ़ाएगा। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां स्थिर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में ईंधन आपूर्ति और वितरण व्यवस्था भी पहले की तरह सुचारु बनी रहने की उम्मीद है।



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