दानापुर अनुमंडल क्षेत्र में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले अस्पतालों, होटलों और बैंक्वेट हॉलों के खिलाफ अग्निशमन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में हुए निरीक्षण में सामने आया है कि बड़ी संख्या में संस्थान बिना फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के संचालित हो रहे हैं। इसे देखते हुए विभाग ने नोटिस जारी करने और फायर ऑडिट कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
सहायक जिला अग्निशमन पदाधिकारी शशिकांत शर्मा के अनुसार दानापुर अनुमंडल क्षेत्र में कुल 194 होटल हैं, जिनमें से केवल 73 के पास ही वैध फायर एनओसी उपलब्ध है। इसी प्रकार 104 अस्पतालों में से मात्र 50 अस्पतालों ने अग्नि सुरक्षा संबंधी स्वीकृति प्राप्त की है। इसका अर्थ है कि 145 से अधिक संस्थान ऐसे हैं जो आवश्यक अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना कार्य कर रहे हैं। यह स्थिति चिंताजनक इसलिए है क्योंकि अस्पताल और होटल ऐसे स्थान हैं जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं। किसी भी आगजनी की घटना में यहां जान-माल की भारी क्षति होने की आशंका रहती है।
अग्निशमन विभाग ने नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। विभाग द्वारा अब तक 26 संस्थानों को नोटिस जारी किया गया है। इन संस्थानों से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब मांगा गया है तथा आवश्यक अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त 12 संस्थानों का फायर ऑडिट कराया गया है। ऑडिट के दौरान कई प्रकार की कमियां सामने आई हैं, जिनमें अग्निशमन यंत्रों की कमी, आपातकालीन निकास मार्गों का अभाव, चेतावनी प्रणाली की अनुपस्थिति और कर्मचारियों के प्रशिक्षण में कमी शामिल है।
फायर ऑडिट में कमियां पाए जाने वाले संस्थानों को विभाग ने एक सप्ताह का समय दिया है। इस अवधि में उन्हें सभी सुरक्षा खामियों को दूर करना होगा। यदि निर्धारित समय के भीतर सुधार नहीं किया गया तो संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अग्निशमन विभाग का कहना है कि अग्नि सुरक्षा केवल औपचारिकता नहीं बल्कि लोगों के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फायर एनओसी किसी भी व्यावसायिक या सार्वजनिक भवन के लिए यह प्रमाणित करती है कि वहां आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम मौजूद हैं। इसमें अग्निशमन यंत्र, पानी की उपलब्धता, फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकास द्वार और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों और होटलों में आग लगने की स्थिति सबसे अधिक खतरनाक होती है क्योंकि वहां मौजूद लोगों में मरीज, बुजुर्ग, बच्चे और बाहरी आगंतुक शामिल होते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अस्पतालों और होटलों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं। इनमें अनेक लोगों की जान गई और करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट हुई। अधिकांश मामलों में यह पाया गया कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था या उपकरण समय पर कार्य नहीं कर पाए। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल भवन निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित सुरक्षा जांच और फायर ऑडिट भी उतने ही आवश्यक हैं।
अग्निशमन विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि संस्थानों को सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना भी है। होटल संचालकों, अस्पताल प्रबंधन और बैंक्वेट हॉल मालिकों को यह समझना होगा कि अग्नि सुरक्षा पर किया गया खर्च किसी बोझ की तरह नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक निवेश है। साथ ही आम नागरिकों को भी ऐसे संस्थानों में जाने से पहले सुरक्षा व्यवस्थाओं पर ध्यान देना चाहिए। किसी भी आपात स्थिति में सतर्कता और उचित व्यवस्था ही बड़े हादसों को रोक सकती है।
दानापुर में बिना फायर एनओसी संचालित हो रहे अस्पतालों, होटलों और बैंक्वेट हॉलों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई एक सकारात्मक कदम है। इससे न केवल सुरक्षा मानकों के पालन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि संभावित दुर्घटनाओं को भी रोका जा सकेगा। प्रशासन, संस्थान संचालकों और आम जनता के संयुक्त प्रयास से ही सुरक्षित और जिम्मेदार वातावरण का निर्माण संभव है।
