आईजीआईएमएस - देश के 16 चुनिंदा संस्थानों में हुआ शामिल

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार के लिए गर्व की बात है कि इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) (आईजीआईएमएस) को एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल हुई है। संस्थान का चयन देश के 16 प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में तकनीकी संसाधन केंद्र (टेक्निकल रिसोर्स सेंटर-टीआरसी) स्थापित करने के लिए किया गया है। यह उपलब्धि संस्थान की आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, उच्च गुणवत्ता वाले उपचार और शोध क्षमता का प्रमाण मानी जा रही है।


तकनीकी संसाधन केंद्र की स्थापना का सबसे बड़ा लाभ मरीजों को मिलेगा। यह केंद्र वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित राष्ट्रीय उपचार एवं जनस्वास्थ्य दिशा-निर्देश तैयार करने में सहयोग करेगा। इससे उपचार पद्धतियां अधिक प्रभावी, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनेंगी तथा मरीजों को नवीनतम चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।


आईजीआईएमएस प्रशासन के अनुसार संस्थान के अधिकांश विभागों में पहले से ही रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा कॉर्निया और किडनी प्रत्यारोपण जैसी जटिल चिकित्सा सेवाएं भी सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। नए तकनीकी संसाधन केंद्र की स्थापना से रोबोटिक सर्जरी, अंग प्रत्यारोपण और चिकित्सा अनुसंधान को और अधिक गति मिलेगी।


संस्थान का चयन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के अंतर्गत कार्यरत सेंटर फॉर एविडेंस-बेस्ड गाइडलाइंस द्वारा किया गया है। चयन से पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ टीम ने आईजीआईएमएस में उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों, तकनीकी सुविधाओं और उपचार व्यवस्था का विस्तृत निरीक्षण किया। उच्चस्तरीय मूल्यांकन के बाद संस्थान की गुणवत्ता और क्षमता को मान्यता देते हुए इसे देश के चुनिंदा 16 संस्थानों में शामिल किया गया।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की देखरेख में क्लीनिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सकों को प्रधान अन्वेषक (Principal Investigator) और सह-प्रधान अन्वेषक (Co-Principal Investigator) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे नई चिकित्सा तकनीकों, दवाओं और उपचार पद्धतियों पर शोध को मजबूती मिलेगी तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में आईजीआईएमएस की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।


देश के केवल 16 संस्थानों में चयनित होना आईजीआईएमएस की बढ़ती प्रतिष्ठा और उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं का प्रमाण है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान बल्कि पूरे बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। आने वाले समय में यहां अत्याधुनिक उपचार, शोध और प्रशिक्षण की नई संभावनाएं विकसित होंगी, जिससे राज्य के मरीजों को महानगरों का रुख किए बिना उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।


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