मानपुरा भाखरी में सदर थाने के पीछे स्थित नाड़ी (तालाब) के बीच एक छोटी-सी टेकरी पर विराजमान बाबा रामदेव का प्राचीन मंदिर आने वाले समय में एक नए स्वरूप में लोगों के सामने दिखाई देगा। जब तालाब में पानी भर जाएगा, तब यह टेकरी तीनों ओर से जलराशि से घिर जाएगी और दूर से देखने पर किसी प्राकृतिक द्वीप जैसी प्रतीत होगी। इस कारण यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य के कारण भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
यह परियोजना स्थानीय पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था को एक साथ जोड़ने का प्रयास मानी जा रही है। यदि इसका समुचित विकास किया जाता है तो यह क्षेत्र स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी विशेष महत्व प्राप्त कर सकता है।
टेकरी पर स्थित बाबा रामदेव का मंदिर काफी पुराना है और वर्तमान समय में जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। समय के साथ इसकी दीवारें कमजोर हो गई हैं और मंदिर के कई हिस्सों को मरम्मत की आवश्यकता है। वर्षों से यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं, लेकिन मंदिर के संरक्षण की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं हो पाया। वर्तमान विकास योजना में मंदिर के पुनर्निर्माण को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि स्थानीय लोगों की इच्छा है कि भविष्य में इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार कराया जाए ताकि इसकी धार्मिक गरिमा और ऐतिहासिक महत्व सुरक्षित रह सके।
योजना के अंतर्गत सबसे महत्वपूर्ण कार्य टेकरी तक पहुंचने के लिए सुरक्षित ट्रैक (मार्ग) का निर्माण है। वर्तमान में बरसात के मौसम में मंदिर तक पहुंचना कठिन हो जाता है, क्योंकि चारों ओर पानी भर जाने से रास्ता अवरुद्ध हो जाता है। नए ट्रैक के निर्माण से श्रद्धालु पूरे वर्ष आसानी से मंदिर तक पहुंच सकेंगे। यह मार्ग केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए ही नहीं बल्कि प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। यदि इस मार्ग के दोनों ओर हरियाली, प्रकाश व्यवस्था और बैठने की व्यवस्था विकसित की जाए तो यह स्थान एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में भी पहचान बना सकता है।
तालाब में पर्याप्त पानी भरने के बाद टेकरी का दृश्य अत्यंत मनमोहक होगा। चारों ओर फैला शांत जल और उसके बीच स्थित मंदिर किसी चित्र जैसा दृश्य प्रस्तुत करेगा। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का वातावरण विशेष रूप से आकर्षक होगा। ऐसे स्थल लोगों को मानसिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कराते हैं। यदि यहां पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाए और स्वच्छता बनाए रखी जाए तो यह क्षेत्र शहर के बीच स्थित एक शांत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।
भारत में ऐसे अनेक धार्मिक स्थल हैं जो प्राकृतिक सौंदर्य के कारण भी प्रसिद्ध हैं। मानपुरा भाखरी की यह टेकरी भी भविष्य में उसी श्रेणी में अपना स्थान बना सकती है। धार्मिक पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनता है। यदि यहां बुनियादी सुविधाएं जैसे पार्किंग, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सूचना पट्ट, बैठने की व्यवस्था तथा सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंच सकते हैं। इससे आसपास के छोटे व्यापारियों और स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
बाबा रामदेव के प्रति स्थानीय लोगों की गहरी आस्था है। अनेक परिवार वर्षों से यहां दर्शन करने आते रहे हैं। उनके लिए यह केवल एक मंदिर नहीं बल्कि विश्वास और परंपरा का प्रतीक है। लोगों का मानना है कि यदि मंदिर का भी जीर्णोद्धार कर दिया जाए तो यह स्थल धार्मिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण बन जाएगा। स्थानीय नागरिक प्रशासन से अपेक्षा कर रहे हैं कि भविष्य में मंदिर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की दिशा में भी कदम उठाए जाएं।
किसी भी धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थल का विकास तभी सफल माना जाता है जब वहां की मूल पहचान सुरक्षित रहे। निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण संतुलन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संरचना का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। यदि तालाब की नियमित सफाई, जल संरक्षण, पौधारोपण और कचरा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं भी साथ में विकसित की जाएं तो यह परियोजना एक आदर्श मॉडल बन सकती है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी समाज तक पहुंचेगा।
मानपुरा भाखरी की नाड़ी के बीच स्थित बाबा रामदेव की टेकरी आने वाले समय में "आस्था का द्वीप" बनकर नई पहचान हासिल कर सकती है। तीन ओर से पानी से घिरा यह स्थल धार्मिक श्रद्धा और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। यद्यपि वर्तमान योजना में मंदिर के पुनर्निर्माण का प्रावधान नहीं है, फिर भी मंदिर तक ट्रैक का निर्माण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि भविष्य में मंदिर का जीर्णोद्धार, पर्यटन सुविधाओं का विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के उपाय भी साथ-साथ किए जाएं, तो यह स्थान न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र बनेगा बल्कि क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में भी अपनी विशेष पहचान स्थापित करेगा।
