मृत जमाबंदी धारकों की जमीन का नामांतरण अब होगा आसान

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार सरकार ने भूमि प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब मृत जमाबंदी धारकों की भूमि के नामांतरण (म्यूटेशन) की पूरी प्रक्रिया बिहार भूमि पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संपन्न की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी भूमि का रिकॉर्ड समय पर अद्यतन हो सके और उत्तराधिकारियों को अनावश्यक कार्यालयी चक्कर या लंबी कानूनी प्रक्रियाओं का सामना न करना पड़े। यह पहल न केवल भूमि अभिलेखों को अद्यतन रखने में मदद करेगी, बल्कि विवादों को कम करने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


नई व्यवस्था के तहत संबंधित क्षेत्र के राजस्व कर्मचारी मृत जमाबंदी धारकों की पहचान करेंगे। इसके लिए वे विभिन्न सरकारी और स्थानीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करेंगे। इनमें प्रमुख रूप से जन्म एवं मृत्यु निबंधन अभिलेख, चौकीदारी रिपोर्ट, पंचायत प्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सूचना, ग्रामीणों एवं पड़ोसियों से प्राप्त तथ्य शामिल होंगे। इन सभी सूचनाओं के आधार पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित जमाबंदी धारक का वास्तव में निधन हो चुका है और उसके बाद आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी।


पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजस्व विभाग आवश्यक जांच करेगा। यदि सभी तथ्य सही पाए जाते हैं, तो संबंधित मृतक के उत्तराधिकारियों से संपर्क स्थापित किया जाएगा। उत्तराधिकारियों से भूमि संबंधी आवश्यक दस्तावेज, पारिवारिक विवरण तथा अन्य प्रमाण मांगे जाएंगे ताकि नामांतरण की प्रक्रिया बिना किसी विवाद के पूरी की जा सके। इससे भूमि स्वामित्व का रिकॉर्ड अद्यतन रहेगा और भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता की संभावना भी कम होगी।


नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यदि निर्धारित समय के भीतर उत्तराधिकारी आपसी बंटवारे से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाते हैं, तब भी नामांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह नहीं रुकेगी। ऐसी स्थिति में केवल उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण की कार्रवाई प्रारंभ कर दी जाएगी। इसका अर्थ यह है कि भूमि का स्वामित्व कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जबकि आपसी हिस्सेदारी का निर्धारण बाद में संबंधित नियमों के अनुसार किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से वर्षों तक लंबित रहने वाले अनेक मामलों का समाधान संभव होगा।


सरकार ने स्पष्ट किया है कि मृत जमाबंदी धारकों के नामांतरण की संपूर्ण प्रक्रिया बिहार भूमि पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित होगी। इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से आवेदन की ऑनलाइन प्रविष्टि, दस्तावेजों का अपलोड, जांच की प्रगति, संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट, नामांतरण आदेश तथा रिकॉर्ड का अद्यतन, सभी कार्य एक ही प्लेटफॉर्म पर किए जाएंगे। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी तथा प्रत्येक चरण की निगरानी भी आसानी से की जा सकेगी।


भूमि संबंधी मामलों में अक्सर अनावश्यक विलंब, कागजी प्रक्रिया और बिचौलियों की भूमिका बड़ी समस्या रही है। डिजिटल प्रक्रिया लागू होने के बाद इन समस्याओं में काफी कमी आने की उम्मीद है। ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल रिकॉर्ड के कारण अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। प्रत्येक कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या अनियमितता की संभावना कम होगी। इसके अलावा आवेदकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।


ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक परिवार ऐसे हैं जिनके पूर्वजों के नाम पर वर्षों से जमीन दर्ज है, लेकिन उनके निधन के बाद भी रिकॉर्ड में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। इसके कारण जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं का लाभ तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों में कठिनाइयाँ आती हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा। उत्तराधिकारियों के नाम समय पर दर्ज होने से भूमि संबंधी अधिकार स्पष्ट होंगे और भविष्य में पारिवारिक विवाद भी कम होंगे।


बिहार सरकार लगातार भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और राजस्व सेवाओं को ऑनलाइन करने की दिशा में काम कर रही है। मृत जमाबंदी धारकों के नामांतरण की ऑनलाइन व्यवस्था इसी अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो भूमि प्रबंधन प्रणाली अधिक आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनेगी। इससे न केवल राजस्व प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि आम नागरिकों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा।


मृत जमाबंदी धारकों की पहचान से लेकर उत्तराधिकारियों के नामांतरण तक पूरी प्रक्रिया को बिहार भूमि पोर्टल पर ऑनलाइन करने का निर्णय राज्य में भूमि प्रशासन सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे रिकॉर्ड समय पर अद्यतन होंगे, लंबित मामलों का शीघ्र समाधान होगा और आम लोगों को पारदर्शी एवं सुविधाजनक सेवा मिलेगी। डिजिटल तकनीक के माध्यम से भूमि प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की यह पहल भविष्य में बिहार की राजस्व व्यवस्था को और अधिक आधुनिक तथा विश्वसनीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



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