100% शुद्ध पेट्रोल की कीमत अधिक क्यों?

Jitendra Kumar Sinha
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भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई-20) को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। कुछ उपभोक्ताओं ने आशंका जताई है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों के प्रदर्शन और इंजन पर असर पड़ सकता है। इसी विवाद के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी उपभोक्ता को 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल चाहिए, तो उसे इसके लिए अधिक कीमत चुकानी होगी। उनका कहना है कि ई-20 नीति केवल ईंधन का विकल्प नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक मजबूती से जुड़ा राष्ट्रीय अभियान है।


ई-20 पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस), मक्का तथा अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। भारत सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने का लक्ष्य इसलिए तय किया है ताकि आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो और घरेलू स्तर पर स्वच्छ एवं नवीकरणीय ईंधन का उपयोग बढ़ सके।


नितिन गडकरी ने कहा है कि यदि कोई उपभोक्ता बिना एथेनॉल वाला 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल चाहता है, तो उसके लिए अलग व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन उसकी कीमत अधिक होगी। उनका तर्क है कि शुद्ध पेट्रोल की आपूर्ति और वितरण में अतिरिक्त लागत आती है, इसलिए उसकी कीमत भी अधिक होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी पर ई-20 थोप नहीं रही है, बल्कि देश के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक ईंधन व्यवस्था विकसित कर रही है।


भारत अपनी पेट्रोलियम आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इससे हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा व्यय होता है। एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से पेट्रोल की खपत कम होगी और आयात बिल में कमी आएगी।


एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। एथेनॉल अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इसके उपयोग से कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कम होता है, जिससे वायु प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिलती है। घरेलू स्तर पर तैयार जैव ईंधन का उपयोग बढ़ने से भारत ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी कम पड़ेगा।


सरकार और वाहन निर्माता कंपनियाँ धीरे-धीरे ई-20 अनुकूल इंजन विकसित कर रही हैं। हाल के वर्षों में लॉन्च किए गए अधिकांश नए वाहन ई-20 ईंधन के अनुरूप बनाए जा रहे हैं। हालांकि पुराने वाहनों के मालिकों को अपने वाहन निर्माता की सलाह के अनुसार ईंधन का उपयोग करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अधिकतर वाहन एथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुरूप होंगे, जिससे किसी प्रकार की तकनीकी समस्या की संभावना कम होगी।


गडकरी ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में केवल एथेनॉल ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन, बायो-सीएनजी, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोडीजल और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को भी व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य परिवहन क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है, ताकि कार्बन उत्सर्जन कम हो और भारत जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में प्रभावी योगदान दे सके।


हालांकि ई-20 नीति के कई लाभ बताए जा रहे हैं, लेकिन कुछ वाहन मालिक अभी भी इंजन की कार्यक्षमता, माइलेज और रखरखाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन आशंकाओं को दूर करने के लिए सरकार और वाहन कंपनियों को जागरूकता अभियान चलाने तथा तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। यदि भविष्य में शुद्ध पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराया जाता है, तो उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता और बजट के अनुसार ईंधन चुनने का अवसर मिलेगा।


नितिन गडकरी का बयान भारत की बदलती ऊर्जा नीति का संकेत है। ई-20 पेट्रोल का उद्देश्य केवल पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना नहीं, बल्कि विदेशी तेल पर निर्भरता घटाना, किसानों की आय बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। यदि कोई उपभोक्ता 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल चाहता है, तो उसे अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ सकती है। आने वाले समय में भारत का परिवहन तंत्र जैव ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों को नई दिशा मिलेगी।



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