ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग ने ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। विभाग के मंत्री ईश्वर खंड्रे ने राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्गों के किनारे ग्राम पंचायत की सीमा में संचालित स्थायी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर शुल्क एवं टैक्स लगाने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जो इस संबंध में नियमों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सरकार का मानना है कि पंचायत क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने के बावजूद स्थानीय निकायों को अपेक्षित राजस्व नहीं मिल रहा है।
शुक्रवार को विधानसौधा में आयोजित ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ईश्वर खंड्रे ने अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं और पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि विभाग के सचिव को सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है। इन निर्देशों के तहत पंचायतें अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्थायी दुकानों, ढाबों, होटलों, पेट्रोल पंपों तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से नियमानुसार शुल्क या टैक्स वसूल सकेगी। उन्होंने कहा कि समिति इस बात का अध्ययन करेगी कि किस प्रकार शुल्क निर्धारण किया जाए ताकि पंचायतों की आय भी बढ़े और व्यापारियों पर अनावश्यक बोझ भी न पड़े।
सरकार की योजना के अनुसार, ग्राम पंचायत की सीमा में राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के किनारे संचालित विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को शुल्क के दायरे में लाया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से ग्रेनाइट और मार्बल बेचने वाली स्थायी दुकानें, होटल और रेस्टोरेंट, ढाबे, पेट्रोल पंप, अस्थायी शेड के रूप में संचालित दुकानें, अन्य व्यावसायिक स्टोर शामिल है। इन प्रतिष्ठानों से पंचायतों को नियमानुसार फीस या टैक्स प्राप्त होगा। इससे पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
मंत्री ईश्वर खंड्रे ने कहा कि कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे ग्राम पंचायतों की सीमा में सरकारी अथवा पंचायत क्षेत्र की भूमि पर अनेक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। यहां होटल, ढाबे, दुकानें और ग्रेनाइट स्टोर वर्षों से कारोबार कर रहे हैं, लेकिन पंचायतों को इनके बदले बहुत कम या लगभग कोई आय प्राप्त नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है कि जिन क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियां हो रही हैं, वहां से पंचायतों को भी राजस्व प्राप्त हो। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
सरकार केवल दुकानों और होटलों तक ही सीमित नहीं रहेगी। पंचायत क्षेत्रों में लगाए जाने वाले बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड, होर्डिंग्स तथा घरों की दीवारों पर किए जाने वाले व्यावसायिक विज्ञापनों को भी समिति के अध्ययन में शामिल किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि पंचायत क्षेत्रों में कई स्थानों पर बड़े विज्ञापन बोर्ड लगाए जाते हैं और मकानों की बाहरी दीवारों का उपयोग भी विज्ञापन प्रदर्शन के लिए किया जाता है। इनसे व्यावसायिक लाभ तो कमाया जाता है, लेकिन अधिकांश मामलों में संबंधित भूमि का उपयोग आधिकारिक रूप से व्यावसायिक श्रेणी में परिवर्तित नहीं किया गया है। सरकार अब ऐसे मामलों की भी समीक्षा करेगी और आवश्यकता पड़ने पर विज्ञापन प्रदर्शन के लिए भी शुल्क निर्धारित करने के नियम बनाए जाएंगे।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए गठित की जाने वाली समिति विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी। समिति यह तय करेगी कि किन प्रतिष्ठानों पर कितना शुल्क लगाया जाए, शुल्क संग्रह की प्रक्रिया क्या हो तथा पंचायतों को मिलने वाले राजस्व का उपयोग किस प्रकार किया जाए। समिति यह भी जांच करेगी कि वर्तमान में कौन-कौन सी व्यावसायिक गतिविधियां पंचायत क्षेत्रों में संचालित हो रही हैं और किन गतिविधियों को शुल्क के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार आवश्यक नियम और दिशा-निर्देश जारी करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी रूप से लागू होती है तो ग्राम पंचायतों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। अतिरिक्त राजस्व मिलने से पंचायतें सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, नाली निर्माण, कचरा प्रबंधन और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर अधिक खर्च कर सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए अक्सर धन की कमी एक बड़ी चुनौती रहती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर राजस्व संग्रह की व्यवस्था पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
सरकार का कहना है कि शुल्क निर्धारण पूरी तरह नियमों के तहत और संतुलित तरीके से किया जाएगा। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, जबकि बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थानीय विकास में अपना उचित योगदान दें। हालांकि व्यापारिक संगठनों की ओर से इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है। माना जा रहा है कि शुल्क की दरें और नियम स्पष्ट होने के बाद व्यापारी संगठन अपनी राय सरकार के सामने रखेंगे।
सरकार जल्द ही समिति का गठन कर उसकी रिपोर्ट प्राप्त करेगी। रिपोर्ट के आधार पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, विज्ञापन बोर्डों और व्यावसायिक उपयोग में लाई जा रही जमीन पर शुल्क एवं टैक्स संबंधी नियम तैयार किए जाएंगे। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो ग्राम पंचायतों के लिए आय का नया स्रोत विकसित होगा और ग्रामीण विकास योजनाओं को गति मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। सरकार का उद्देश्य स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र विकास सुनिश्चित करना है।
