17 जुलाई से दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

Jitendra Kumar Sinha
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भारतीय रेलवे देश की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। प्रतिदिन करोड़ों यात्री और भारी मात्रा में माल ढुलाई करने वाला यह नेटवर्क लगातार आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में 17 जुलाई का दिन भारतीय रेलवे के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रहा है। इस दिन देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ होगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर में विकसित किए गए 75 अमृत भारत स्टेशनों का भी उद्घाटन करेंगे। यह पहल न केवल रेलवे के आधुनिकीकरण को नई गति देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगी।


सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 जुलाई को पंजाब के जालंधर रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में 75 अमृत भारत स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद हरियाणा के जींद स्टेशन पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।


यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में देश के अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस अवसर को भारतीय रेलवे के हरित परिवर्तन अभियान की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।


हाइड्रोजन ट्रेन ऐसी रेलगाड़ी होती है जो डीजल या पारंपरिक ईंधन के बजाय हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक से संचालित होती है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रासायनिक संयोजन से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन चलती है।


इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होता। केवल जलवाष्प और पानी उप-उत्पाद के रूप में निकलते हैं। यही कारण है कि हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के अनुकूल और भविष्य की स्वच्छ परिवहन तकनीक माना जाता है। दुनिया के कई विकसित देशों में हाइड्रोजन ट्रेनों का सफल संचालन हो रहा है। अब भारत भी इस आधुनिक तकनीक को अपनाने वाले देशों की सूची में शामिल होने जा रहा है।


भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में परिवहन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। रेलवे पहले से ही अपने नेटवर्क के विद्युतीकरण पर तेजी से कार्य कर रहा है, लेकिन जिन क्षेत्रों में विद्युतीकरण संभव नहीं है या जहां वैकल्पिक ऊर्जा की आवश्यकता है, वहां हाइड्रोजन तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।


हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन से डीजल पर निर्भरता कम होगी और वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी। इससे रेलवे की ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी तथा स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन प्रणाली विकसित करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में कई डीजल रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनों को प्राथमिकता दी जा सकती है।


हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ के साथ ही प्रधानमंत्री देशभर में विकसित किए गए 75 अमृत भारत स्टेशनों का उद्घाटन भी करेंगे। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। इन स्टेशनों पर यात्रियों के लिए बेहतर प्रतीक्षालय, आधुनिक शौचालय, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, डिजिटल सूचना प्रणाली, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, आकर्षक प्रवेश द्वार तथा स्थानीय संस्कृति को दर्शाने वाली वास्तुकला विकसित की गई है।


इस योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को केवल यात्रा केंद्र नहीं बल्कि आधुनिक सार्वजनिक परिसरों के रूप में विकसित करना है। इससे यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेलवे ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू की हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस, समर्पित माल गलियारे, स्टेशन पुनर्विकास योजनाएं, कवच सुरक्षा प्रणाली और 100 प्रतिशत विद्युतीकरण की दिशा में तेज प्रगति इसके प्रमुख उदाहरण हैं।


हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन इस श्रृंखला की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। यह परियोजना दर्शाती है कि भारतीय रेलवे केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि अत्याधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दे रहा है।


17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है। यह केवल एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ विकास की दिशा में भारत की बढ़ती क्षमता का प्रतीक है। साथ ही 75 अमृत भारत स्टेशनों का उद्घाटन रेलवे यात्रियों को आधुनिक और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन तकनीक भारतीय रेलवे को अधिक पर्यावरण-अनुकूल, ऊर्जा-कुशल और भविष्य के लिए तैयार परिवहन प्रणाली बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।



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