खासमहाल भूमि का होगा राज्यव्यापी सर्वे - बनेगा एकीकृत डिजिटल डाटाबेस

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार सरकार ने राज्य में स्थित सभी खासमहाल (खास महल) भूमि के व्यापक सर्वेक्षण का निर्णय लेकर भूमि प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। लंबे समय से खासमहाल भूमि से जुड़े स्वामित्व, उपयोग, लीज नवीनीकरण और हस्तांतरण जैसे मुद्दे लोगों के लिए जटिल बने हुए हैं। अब राज्य सरकार इन सभी भूमि का विस्तृत सर्वे कर उनका एकीकृत एवं अद्यतन डिजिटल डाटाबेस तैयार करेगी। इसके साथ ही सरकार ने यह संकेत भी दिया है कि खासमहाल भूमि को फ्री होल्ड (पूर्ण स्वामित्व) में बदलने की प्रक्रिया को भी गति दी जाएगी, जिससे हजारों भू-धारकों को राहत मिलने की उम्मीद है।


खासमहाल भूमि वह सरकारी भूमि होती है, जिसे सरकार विभिन्न उद्देश्यों के लिए व्यक्तियों, संस्थाओं या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लीज (पट्टे) पर उपलब्ध कराती है। इस भूमि पर रहने या व्यवसाय करने वाले लोगों को पूर्ण स्वामित्व प्राप्त नहीं होता, बल्कि वे निर्धारित शर्तों के अनुसार इसका उपयोग करते हैं। समय के साथ अनेक स्थानों पर लीज की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन नवीनीकरण, अभिलेखों की कमी तथा कानूनी प्रक्रियाओं के कारण अनेक विवाद उत्पन्न हो गए हैं। कई जगहों पर भूमि का वास्तविक उपयोग और सरकारी अभिलेखों में दर्ज जानकारी भी अलग-अलग पाई जाती है।


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा किए जाने वाले इस राज्यव्यापी सर्वे का मुख्य उद्देश्य खासमहाल भूमि से संबंधित सभी सूचनाओं को एक स्थान पर उपलब्ध कराना है। सर्वे के दौरान प्रत्येक जिले में स्थित खासमहाल भूमि का क्षेत्रफल, वर्तमान उपयोग, लीजधारी का विवरण, भूमि की स्थिति, अभिलेखों की सत्यता तथा अन्य आवश्यक जानकारियां एकत्र की जाएंगी। इन आंकड़ों के आधार पर एक अद्यतन और एकीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य में भूमि प्रबंधन अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके।


खासमहाल भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी। भूमि से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन आसान होगा और अभिलेखों में किसी प्रकार की गड़बड़ी या दोहराव की संभावना कम होगी। इसके अतिरिक्त भूमि संबंधी विवादों के समाधान में भी सुविधा मिलेगी। सरकारी विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान सरल होगा तथा नागरिकों को भी आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में कम समय लगेगा। डिजिटल व्यवस्था से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर भी अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी।


बैठक में यह भी संकेत दिया गया कि सरकार खासमहाल भूमि को फ्री होल्ड करने की प्रक्रिया को तेज करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो लीजधारकों को निर्धारित शर्तों के अनुसार भूमि का पूर्ण स्वामित्व प्राप्त हो सकता है। फ्री होल्ड व्यवस्था लागू होने से संपत्ति का क्रय-विक्रय, बैंक से ऋण प्राप्त करना, भवन निर्माण की स्वीकृति तथा उत्तराधिकार संबंधी प्रक्रियाएं काफी सरल हो जाएंगी। इससे वर्षों से लंबित कई मामलों का समाधान भी संभव हो सकेगा। हालांकि सरकार द्वारा इसके लिए विस्तृत नीति और दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद ही अंतिम प्रक्रिया स्पष्ट होगी।


यह निर्णय गुरुवार को राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने राज्यभर में खासमहाल भूमि की वर्तमान स्थिति, अभिलेखों की उपलब्धता तथा सर्वेक्षण की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। निर्णय लिया गया कि सभी जिलों से संबंधित जानकारी एकत्र कर चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण पूरा किया जाएगा, ताकि राज्यभर में एक समान और प्रमाणिक भूमि अभिलेख उपलब्ध हो सके।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से आम नागरिकों और प्रशासन दोनों को समान रूप से लाभ मिलेगा। जहां एक ओर भूमि धारकों को अपने अधिकारों और अभिलेखों की स्पष्ट जानकारी प्राप्त होगी, वहीं सरकार के लिए सरकारी भूमि का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। अवैध कब्जों की पहचान, राजस्व संग्रहण में सुधार, योजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता तथा न्यायालयों में लंबित भूमि विवादों के निस्तारण में भी यह सर्वे उपयोगी साबित हो सकता है।


बिहार सरकार पिछले कुछ वर्षों से भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार तथा राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। खासमहाल भूमि का राज्यव्यापी सर्वे उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि सर्वेक्षण समयबद्ध तरीके से पूरा होता है और फ्री होल्ड नीति प्रभावी रूप से लागू होती है, तो इससे हजारों परिवारों, व्यवसायियों और संस्थानों को कानूनी स्पष्टता एवं स्थायी स्वामित्व का लाभ मिल सकता है। साथ ही राज्य में भूमि प्रबंधन प्रणाली अधिक आधुनिक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनने की दिशा में यह पहल मील का पत्थर साबित हो सकती है।



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