सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है पीएनजी क्षेत्र में एलपीजी कनेक्शन होगा बंद

Jitendra Kumar Sinha
0

 


हाल के दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक संदेश तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि जिन क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की सुविधा उपलब्ध है, वहां एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए नए नियम लागू कर दिए गए हैं। संदेश के अनुसार, यदि किसी उपभोक्ता ने पीएनजी कनेक्शन ले लिया है तो वह आगे एलपीजी सिलेंडर की रीफिलिंग नहीं करा सकेगा। इतना ही नहीं, यह भी कहा जा रहा है कि पीएनजी कनेक्शन मिलने के 30 दिनों के भीतर एलपीजी कनेक्शन गैस एजेंसी में सरेंडर करना अनिवार्य होगा। इस दावे ने लाखों उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और चिंता पैदा कर दी है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस दावे में कितनी सच्चाई है और वास्तव में उपभोक्ताओं के लिए क्या नियम लागू हैं।


अब तक केंद्र सरकार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय या सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम, की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है जिसमें कहा गया हो कि पीएनजी कनेक्शन लेने के बाद एलपीजी कनेक्शन रखना गैरकानूनी होगा या उसकी रीफिलिंग बंद कर दी जाएगी। यानि वायरल संदेश में किया जा रहा दावा आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है। जब तक सरकार या संबंधित कंपनियां स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं करतीं, तब तक उपभोक्ताओं को केवल सोशल मीडिया संदेशों के आधार पर कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए।


पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस सीधे पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक पहुंचाई जाती है। इसमें सिलेंडर बदलने की जरूरत नहीं होती और गैस की आपूर्ति लगातार बनी रहती है। उपभोक्ता जितनी गैस उपयोग करते हैं, उसी के अनुसार बिल का भुगतान करते हैं। दूसरी ओर, एलपीजी सिलेंडर आधारित व्यवस्था है, जिसमें सिलेंडर समाप्त होने पर नया सिलेंडर बुक कराना पड़ता है। भारत के अधिकांश ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आज भी एलपीजी ही खाना पकाने का प्रमुख माध्यम है।


कई उपभोक्ता पीएनजी उपलब्ध होने के बावजूद एलपीजी कनेक्शन भी बनाए रखते हैं। इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। यदि किसी कारणवश पीएनजी आपूर्ति बाधित हो जाए तो एलपीजी बैकअप के रूप में काम आता है। बिजली या तकनीकी खराबी के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में एलपीजी उपयोगी साबित होता है। कई परिवार यात्रा, ग्रामीण घर या अन्य स्थानों पर एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध रहना सुविधाजनक होता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में उपभोक्ता दोनों सुविधाओं का उपयोग करते हैं।


यदि कोई उपभोक्ता अपनी इच्छा से एलपीजी कनेक्शन बंद कराना चाहता है, तो वह संबंधित गैस एजेंसी में निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर सकता है। इसके लिए आमतौर पर आवेदन देना होता है और गैस कंपनी के नियमों के अनुसार सुरक्षा जमा राशि का निपटारा किया जाता है। हालांकि यह पूरी तरह उपभोक्ता का व्यक्तिगत निर्णय है। फिलहाल ऐसा कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है जो सभी पीएनजी उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने के लिए बाध्य करता हो।


सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी अधूरी या भ्रामक जानकारी अक्सर सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से फैल जाती है। ऐसे संदेशों के कारण लोग बिना पुष्टि के अपने कनेक्शन बंद कराने या अन्य आवश्यक कदम उठाने लगते हैं, जिससे बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए किसी भी नए नियम या सरकारी आदेश पर विश्वास करने से पहले संबंधित मंत्रालय, तेल विपणन कंपनियों या अपनी गैस एजेंसी से जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए।


यदि आपके क्षेत्र में पीएनजी सुविधा उपलब्ध हो गई है और आप उसे लेना चाहते हैं, तो पहले उसकी लागत, मासिक बिल, सुरक्षा, सुविधा और अपनी आवश्यकता का आकलन करें। साथ ही यदि आपको एलपीजी कनेक्शन के भविष्य को लेकर कोई संदेह है, तो सीधे अपनी गैस एजेंसी या अधिकृत गैस कंपनी से जानकारी लें। सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों के आधार पर एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने या किसी अन्य कार्रवाई से बचें। आधिकारिक सूचना आने तक वर्तमान व्यवस्था सामान्य रूप से जारी रहती है।


पीएनजी सुविधा का विस्तार देश के कई शहरों में तेजी से हो रहा है और यह स्वच्छ एवं सुविधाजनक ईंधन विकल्प माना जाता है। लेकिन पीएनजी कनेक्शन लेने के बाद एलपीजी रीफिलिंग पूरी तरह बंद हो जाएगी या 30 दिनों के भीतर एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य है, ऐसे दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उपभोक्ताओं को अफवाहों से बचते हुए केवल सरकारी और अधिकृत स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए। सही और प्रमाणित जानकारी ही अनावश्यक भ्रम तथा आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top