वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय बनाने वाला विधेयक सदन में हुआ पेश

Jitendra Kumar Sinha
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राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सम्मान और गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया है। सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ सदन में प्रस्तुत किया है। इस विधेयक में राष्ट्रगीत के गायन के दौरान जानबूझकर व्यवधान डालने या उसका अपमान करने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्र के गौरव से जुड़े विषयों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने के लिए कानूनी प्रावधानों को और प्रभावी बनाना जरूरी है।


राष्ट्रगीत वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसे देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। सरकार द्वारा पेश किए गए संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रगीत की गरिमा को बनाए रखना और इसके प्रति अनादर की घटनाओं पर रोक लगाना है। विधेयक में यह प्रस्ताव किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम् के गायन के समय जानबूझकर बाधा उत्पन्न करता है या उसका अपमान करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।


इस संशोधन विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर व्यवधान डालना अपराध माना जाएगा। राष्ट्रगीत के अपमान को आपराधिक कृत्य की श्रेणी में रखा जाएगा। दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान प्रस्तावित है। राष्ट्रीय गौरव से जुड़े प्रतीकों के सम्मान को कानूनी संरक्षण देने का प्रयास किया गया है। सरकार का मानना है कि इस तरह के प्रावधान राष्ट्र के प्रति सम्मान और नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देंगे।


गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया। विधेयक पेश किए जाने के दौरान सदन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा भी हुई। यह विधेयक ऐसे समय में लाया गया है जब संसद में कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर राजनीतिक बहस जारी है। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा विषय बताया है, जबकि विपक्ष की ओर से इसके प्रावधानों और जरूरत पर चर्चा की संभावना है।


वंदे मातरम् की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल था और बाद में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख प्रेरणास्रोत बना। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम् ने लोगों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का काम किया। इसे आज भी भारत की राष्ट्रीय भावना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतीकों में शामिल किया जाता है। भारतीय संविधान के तहत जन गण मन को राष्ट्रगान और वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत का सम्मान प्राप्त है।


यह विधेयक यदि संसद के दोनों सदनों से पारित होकर कानून बनता है, तो वंदे मातरम् के सार्वजनिक कार्यक्रमों, सरकारी आयोजनों और अन्य अवसरों पर इसके सम्मान को लेकर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था लागू हो सकती है। समर्थकों का कहना है कि इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अनुशासन और सम्मान बढ़ेगा। वहीं, कानून विशेषज्ञों और विपक्षी दलों की ओर से यह सवाल उठाया जा सकता है कि अपराध की परिभाषा और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय क्या होंगे।


भारत में पहले से ही राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान को रोकने के लिए कानून मौजूद हैं। राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रीय ध्वज और संविधान जैसे प्रतीकों के अपमान पर कार्रवाई का प्रावधान है। नया संशोधन विधेयक इसी दिशा में राष्ट्रगीत को भी कानूनी संरक्षण देने का प्रयास माना जा रहा है।


वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने से जुड़ा विधेयक राष्ट्रीय सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने लाता है। सरकार इसे राष्ट्रगीत की गरिमा बनाए रखने की दिशा में कदम बता रही है। अब इस विधेयक पर संसद में विस्तृत चर्चा होगी, जिसके बाद इसके भविष्य का फैसला होगा। यह विधेयक केवल कानूनी बदलाव का विषय नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी और सम्मान की भावना से भी जुड़ा हुआ है।



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