बिहार की राजधानी पटना में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत इस महीने के अंत तक लगभग 100 इलेक्ट्रिक बसें बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) को मिलने जा रही हैं। इन बसों के संचालन से न केवल शहर की यातायात व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि प्रदूषण में कमी लाने और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
देशभर में बढ़ते वायु प्रदूषण और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में पटना में ई-बसों का संचालन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। इलेक्ट्रिक बसें डीजल बसों की तुलना में शून्य उत्सर्जन (Zero Emission) करती हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा क्योंकि इलेक्ट्रिक बसें अपेक्षाकृत कम आवाज करती हैं। इससे शहर का पर्यावरण अधिक स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में सहायता मिलेगी।
हाल ही में बस निर्माण एवं संचालन से जुड़ी कंपनी ग्रीनसेल मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने परिवहन विभाग तथा बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के प्रशासक अतुल वर्मा से मुलाकात की। इस दौरान कंपनी ने जानकारी दी कि इस महीने के अंत तक लगभग 100 पीएम ई-बसें निगम को उपलब्ध करा दी जाएंगी। इन बसों के आने के बाद उनका परीक्षण, पंजीकरण और आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी कर चरणबद्ध तरीके से शहर के प्रमुख मार्गों पर संचालन शुरू किया जाएगा।
नई इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश किया जाएगा। इनमें कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होगी, जैसे- वातानुकूलित (एसी) सुविधा। आरामदायक एवं एर्गोनॉमिक सीटें। जीपीएस आधारित ट्रैकिंग प्रणाली। सीसीटीवी कैमरे। डिजिटल सूचना डिस्प्ले। ऑटोमैटिक टिकटिंग सिस्टम। दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए आसान प्रवेश व्यवस्था।मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाएं। इन सुविधाओं से यात्रियों का सफर अधिक सुरक्षित, आरामदायक और सुविधाजनक होगा।
ई-बसों के सफल संचालन के लिए केवल नई बसें ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मजबूत आधारभूत संरचना भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के 31 बस डिपो के पुनर्विकास की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। परिवहन विभाग और निगम के अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत डिपो के आधुनिकीकरण की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार करने की प्रगति और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
डिपो के पुनर्विकास के लिए अपनाया जा रहा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग का एक प्रभावी उदाहरण है। इस मॉडल के माध्यम से आधुनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। बसों के रखरखाव की बेहतर व्यवस्था विकसित होगी। पार्किंग और संचालन सुविधाओं का विस्तार होगा। डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किए जाएंगे। यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय और अन्य सुविधाओं का विकास होगा। इससे परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और टिकाऊ बनेगी।
पटना की बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा। यदि नागरिक सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे, तो सड़क पर वाहनों की संख्या घटेगी, ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और ईंधन की खपत भी कम होगी। इससे समय की बचत के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
ई-बस परियोजना केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। बस संचालन, रखरखाव, चार्जिंग स्टेशन प्रबंधन, तकनीकी सेवाओं तथा डिजिटल निगरानी से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक के विस्तार से राज्य में हरित ऊर्जा और आधुनिक परिवहन तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्मार्ट सिटी की अवधारणा के अनुरूप सार्वजनिक परिवहन का स्वरूप तेजी से बदलेगा। इलेक्ट्रिक बसें इस परिवर्तन का प्रमुख आधार बनेंगी। यदि बसों का समयबद्ध संचालन, पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं और आधुनिक डिपो विकसित हो जाते हैं, तो पटना देश के उन शहरों में शामिल हो सकता है जहां पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का प्रभावी मॉडल विकसित हुआ है।
पटना में इस महीने के अंत तक 100 पीएम ई-बसों का आगमन बिहार की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके साथ 31 बस डिपो के पुनर्विकास की योजना राज्य में आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ परिवहन प्रणाली की मजबूत नींव रखेगी। यह पहल न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगी, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण, ऊर्जा संरक्षण और स्मार्ट शहरी विकास के लक्ष्यों को भी नई गति देगी। आने वाले समय में यह परियोजना पटना को स्वच्छ, हरित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था वाले शहर के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
