पूर्व अग्निवीरों को सीएपीएफ और असम राइफल्स में 50% मिलेगा आरक्षण

Jitendra Kumar Sinha
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केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत सेना में सेवा दे चुके पूर्व अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में कांस्टेबल तथा राइफलमैन के पदों पर भर्ती के दौरान पूर्व अग्निवीरों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इस संबंध में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि इसके लिए 'पूर्व अग्निवीर' नाम से एक नई श्रेणी का गठन किया गया है। यह निर्णय उन युवाओं के लिए राहत और अवसर दोनों लेकर आया है, जिन्होंने अग्निपथ योजना के तहत चार वर्ष तक भारतीय सेना में सेवा दी है और उसके बाद नागरिक जीवन में नए रोजगार की तलाश करेंगे।


नई व्यवस्था के अनुसार सीएपीएफ और असम राइफल्स में कांस्टेबल तथा राइफलमैन के रिक्त पदों में से आधे पद पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित रहेंगे। इसके लिए भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं तथा "पूर्व अग्निवीर" को एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता दी गई है। सरकार का उद्देश्य प्रशिक्षित, अनुशासित और सैन्य अनुभव रखने वाले युवाओं की सेवाओं का उपयोग आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में करना है। इससे सुरक्षा बलों को भी ऐसे कर्मियों का लाभ मिलेगा, जो पहले से ही कठिन परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव रखते हैं।


वर्ष 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को चार वर्ष के लिए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती किया जाता है। सेवा अवधि पूरी होने पर लगभग 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल किया जाता है, जबकि शेष 75 प्रतिशत अग्निवीर सेवा निधि पैकेज, कौशल प्रमाणपत्र और अन्य सुविधाओं के साथ नागरिक जीवन में लौटते हैं। सरकार पहले से ही यह स्पष्ट करती रही है कि पूर्व अग्निवीरों को विभिन्न सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। सीएपीएफ और असम राइफल्स में 50 प्रतिशत आरक्षण का निर्णय इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


इस फैसले से हजारों पूर्व अग्निवीरों को स्थायी रोजगार प्राप्त करने का बेहतर अवसर मिलेगा। सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को अब सुरक्षा बलों में दोबारा सेवा करने का मौका मिलेगा, जिससे उनके अनुभव और दक्षता का प्रभावी उपयोग हो सकेगा। इसके प्रमुख लाभ हैं सीएपीएफ और असम राइफल्स में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सैन्य प्रशिक्षण का सीधा लाभ सुरक्षा बलों को मिलेगा। पूर्व अग्निवीरों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता कम होगी। देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिक सक्षम और प्रशिक्षित मानव संसाधन से मजबूत होगी। युवाओं में अग्निपथ योजना के प्रति विश्वास बढ़ेगा।


सीएपीएफ और असम राइफल्स देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, नक्सल विरोधी अभियानों, आतंकवाद निरोधक कार्रवाई तथा संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पूर्व अग्निवीर पहले से ही आधुनिक हथियारों, सैन्य अनुशासन, टीम वर्क, शारीरिक दक्षता और आपातकालीन परिस्थितियों में कार्य करने का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके होते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति से सुरक्षा बलों को अतिरिक्त प्रशिक्षण पर कम समय और संसाधन खर्च करने पड़ेंगे तथा बलों की कार्यक्षमता में भी वृद्धि होगी।


अग्निपथ योजना लागू होने के समय कई युवाओं और विभिन्न संगठनों ने सेवा अवधि समाप्त होने के बाद रोजगार को लेकर चिंता व्यक्त की थी। सरकार लगातार यह भरोसा दिलाती रही कि पूर्व अग्निवीरों के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर तैयार किए जाएंगे। सीएपीएफ और असम राइफल्स में 50 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा उसी आश्वासन को मजबूत करती है। इससे उन युवाओं का विश्वास बढ़ेगा जो भविष्य में अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होना चाहते हैं। साथ ही, यह संदेश भी जाएगा कि राष्ट्र की सेवा करने वाले युवाओं के अनुभव और योगदान को सरकार आगे भी सम्मानपूर्वक उपयोग में लाना चाहती है।


पूर्व अग्निवीरों के लिए सीएपीएफ और असम राइफल्स में कांस्टेबल एवं राइफलमैन पदों पर 50 प्रतिशत आरक्षण का निर्णय रोजगार सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। "पूर्व अग्निवीर" की अलग श्रेणी बनाकर सरकार ने सैन्य सेवा पूरी कर चुके युवाओं के लिए एक स्पष्ट और व्यवस्थित करियर पथ तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यदि इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो इससे न केवल हजारों प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक मजबूत, अनुशासित और दक्ष बनेगी।



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