राज्य सरकार का फैसला - बंगाल में 16 अगस्त होगा 'आयुष्मान दिवस' - 'खेला होबे दिवस' की परंपरा का होगा अंत

Jitendra Kumar Sinha
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पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत देते हुए 16 अगस्त को अब 'आयुष्मान दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह दिवस केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आम नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा का संदेश देने के उद्देश्य से मनाया जाएगा। इस निर्णय के साथ ही पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा मनाए जाने वाले 'खेला होबे दिवस' की परंपरा समाप्त हो जाएगी।


पश्चिम बंगाल में 'खेला होबे' नारा वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस के चुनाव अभियान का प्रमुख हिस्सा बना था। चुनावी सफलता के बाद तत्कालीन सरकार ने 16 अगस्त को 'खेला होबे दिवस' के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। इस अवसर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता था तथा युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाता था। हालांकि विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा कि इस दिवस का उद्देश्य खेलों को बढ़ावा देने से अधिक राजनीतिक संदेश देना था। नई सरकार के सत्ता में आने के बाद इस परंपरा को समाप्त कर स्वास्थ्य से जुड़े अभियान को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है।


सरकार के अनुसार 16 अगस्त को पूरे राज्य में स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता अभियान, पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण तथा आयुष्मान कार्ड वितरण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और प्रशासनिक इकाइयों में विशेष अभियान चलाकर लोगों को योजना की जानकारी दी जाएगी। आयुष्मान भारत योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्रति परिवार प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराती है। इस योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं बिना आर्थिक बोझ के उपलब्ध कराना है।


16 अगस्त को 'आयुष्मान दिवस' घोषित करने के फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य सुरक्षा किसी भी राज्य की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और इसी सोच के तहत यह निर्णय लिया गया है। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि सरकार राजनीतिक पहचान से जुड़े कार्यक्रमों को बदलकर अपनी नई राजनीतिक छवि स्थापित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि सरकार का दावा है कि उसका उद्देश्य किसी परंपरा को समाप्त करना नहीं है, बल्कि जनता के जीवन से सीधे जुड़े स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय को प्राथमिकता देना है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 'आयुष्मान दिवस' केवल औपचारिक आयोजन न बनकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान का रूप लेता है, तो इससे लाखों पात्र परिवारों को योजना का लाभ मिल सकता है। आज भी अनेक लोग जानकारी के अभाव में स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। ऐसे में विशेष शिविर और पंजीकरण अभियान लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी पहुंचाने, डिजिटल आयुष्मान कार्ड बनाने और अस्पतालों में उपचार की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।


पश्चिम बंगाल सरकार का यह निर्णय केवल एक सरकारी आयोजन के नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे नई सरकार की बदलती नीतिगत प्राथमिकताओं के रूप में भी देखा जा रहा है। जहां पहले खेल और राजनीतिक प्रतीकों को महत्व दिया जाता था, वहीं अब स्वास्थ्य सुरक्षा और जनकल्याण को प्रमुखता देने का संदेश दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 'आयुष्मान दिवस' केवल एक औपचारिक आयोजन बनकर रह जाता है या वास्तव में राज्य के लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम साबित होता है।



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