10 जुलाई को विशेष संयोग में मनाई जाएगी “योगिनी एकादशी”

Jitendra Kumar Sinha
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आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस बार योगिनी एकादशी का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि यह सिद्ध योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग में पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से व्यक्ति के जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।


ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 10 जुलाई की सुबह 9:48 बजे तक भरणी नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद कृत्तिका नक्षत्र प्रारंभ होगा। इसी दिन शूल योग के साथ-साथ सिद्ध योग का भी निर्माण हो रहा है। सिद्ध योग को किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस योग में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ तथा रामचरितमानस का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि सिद्ध योग में किए गए धार्मिक अनुष्ठान सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक पुण्य प्रदान करते हैं।


धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस वर्ष गृहस्थजन 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे। वहीं वैष्णव संप्रदाय तथा साधु-संत 11 जुलाई को एकादशी व्रत का पालन करेंगे। यह अंतर पंचांग की गणना और एकादशी तिथि के उदयकाल के आधार पर निर्धारित होता है। दोनों ही तिथियों पर भगवान विष्णु की आराधना समान रूप से फलदायी मानी जाती है।


पुराणों में योगिनी एकादशी का अत्यंत महात्म्य बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु के पुण्डरीकाक्ष स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति को अनेक प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत मन, वचन और कर्म की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि योगिनी एकादशी का प्रभाव 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है। इस दिन की गई उपासना व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास के साथ-साथ सांसारिक जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन लाती है।


योगिनी एकादशी को विशेष रूप से आरोग्यता प्रदान करने वाली एकादशी कहा गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा एवं व्रत के प्रभाव से चर्म रोग, कुष्ठ रोग तथा अन्य शारीरिक कष्टों से राहत मिलने की कामना पूर्ण होती है। यद्यपि यह धार्मिक आस्था का विषय है, फिर भी श्रद्धालु विश्वास करते हैं कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। यही कारण है कि इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान विष्णु के मंदिरों में दर्शन करते हैं तथा घरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन करते हैं।


योगिनी एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा करनी चाहिए। भगवान को तुलसी दल, पीले पुष्प, फल और पंचामृत अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान विष्णु सहस्त्रनाम, विष्णु चालीसा, रामचरितमानस अथवा भगवद्गीता का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। दिनभर यथाशक्ति उपवास रखकर भगवान का स्मरण करना चाहिए तथा अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करना चाहिए। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल या दक्षिणा का दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।


आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योगिनी एकादशी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर है। व्रत के माध्यम से व्यक्ति अपने मन और इंद्रियों पर संयम रखना सीखता है। भगवान विष्णु का स्मरण मानसिक तनाव को कम करने और सकारात्मक सोच विकसित करने में भी सहायक माना जाता है। सिद्ध योग में किया गया ध्यान, जप और पूजा श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का माध्यम बन सकता है।


इस वर्ष 10 जुलाई को आने वाली योगिनी एकादशी सिद्ध योग के कारण विशेष महत्व रखती है। भगवान विष्णु की उपासना, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, रामचरितमानस का श्रवण तथा दान-पुण्य के कार्य इस दिन अत्यंत शुभ माने गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत व्यक्ति को आरोग्यता, सुख-समृद्धि, पापों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्रदान करता है। श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ मनाई गई योगिनी एकादशी आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का एक महत्वपूर्ण पर्व है।


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