बिहार सरकार ने पशुपालकों की लंबे समय से चली आ रही एक महत्वपूर्ण समस्या का समाधान करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब बीमार, घायल या चलने-फिरने में असमर्थ पशुओं को उपचार के लिए अस्पताल तक पहुंचाना आसान होगा। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग द्वारा राज्य में पशु उठाव एवं परिवहन सेवा शुरू की जा रही है, जो पशुओं के लिए एंबुलेंस जैसी सुविधा उपलब्ध कराएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य समय पर चिकित्सा उपलब्ध कराकर पशुओं की जान बचाना और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचाना है।
इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ सोमवार को नालंदा डेयरी परिसर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। कार्यक्रम के साथ ही राज्य में पशु चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक नई शुरुआत होगी। सरकार का मानना है कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और उनकी सुरक्षा तथा स्वास्थ्य सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिकता है। यह सेवा विशेष रूप से उन पशुपालकों के लिए लाभदायक होगी जिनके पास बड़े पशु जैसे गाय, भैंस या बैल हैं और जिन्हें बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में अस्पताल तक ले जाना कठिन होता है।
योजना के पहले चरण में बिहार के आठ पशुपालन प्रमंडलों में एक-एक विशेष वाहन तैनात किया जाएगा। ये प्रमंडल हैं पटना, गया, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा, भागलपुर, पूर्णिया। प्रत्येक वाहन अपने-अपने प्रमंडल के सभी जिलों में जरूरत के अनुसार सेवा देगा। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित क्षेत्र के पशुपालक विभाग से संपर्क कर इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
पशु उठाव एवं परिवहन के लिए लगाए जा रहे वाहन सामान्य मालवाहक वाहनों से अलग होंगे। इन्हें इस प्रकार तैयार किया गया है कि बीमार या घायल पशु को बिना अतिरिक्त चोट पहुंचाए सुरक्षित ढंग से वाहन में चढ़ाया जा सके। इन वाहनों में पशुओं को उठाने के लिए विशेष रैंप, सुरक्षा उपकरण और आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी। इससे परिवहन के दौरान पशुओं को कम से कम तकलीफ होगी और वे सुरक्षित रूप से पशु चिकित्सालय तक पहुंच सकेंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीमार पशु को अस्पताल तक पहुंचाने की होती है। कई पशु इतने कमजोर हो जाते हैं कि वे चल भी नहीं पाते। ऐसे में किसान निजी वाहन किराये पर लेने को मजबूर होते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
नई परिवहन सेवा शुरू होने से बीमार पशुओं को समय पर उपचार मिलेगा। पशुओं की मृत्यु दर में कमी आएगी। पशुपालकों का आर्थिक नुकसान घटेगा। परिवहन की परेशानी समाप्त होगी। दुग्ध उत्पादन और पशुपालन व्यवसाय को मजबूती मिलेगी। यह सेवा विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए राहत लेकर आएगी, जिनकी आय का प्रमुख स्रोत पशुपालन है।
बिहार में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। राज्य सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने, नस्ल सुधार, टीकाकरण और आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाओं पर लगातार कार्य कर रही है। पशु उठाव एवं परिवहन सेवा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। समय पर इलाज मिलने से पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा, संक्रामक बीमारियों का प्रभाव कम होगा और पशुधन की उत्पादकता बढ़ेगी। इससे राज्य के दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
बिहार के लाखों परिवार अपनी आजीविका के लिए पशुपालन पर निर्भर हैं। गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशु न केवल दूध उत्पादन का स्रोत हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पशुओं की समय पर चिकित्सा उपलब्ध कराना सीधे तौर पर ग्रामीण विकास से जुड़ा हुआ है। यह नई सेवा किसानों में विश्वास बढ़ाएगी कि गंभीर स्थिति में उनके पशुओं को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध है। इससे पशुपालन को अधिक सुरक्षित और लाभदायक व्यवसाय बनाने में मदद मिलेगी।
बिहार सरकार द्वारा शुरू की जा रही पशु उठाव एवं परिवहन सेवा पशु चिकित्सा व्यवस्था में एक सराहनीय और दूरदर्शी पहल है। यह सेवा बीमार और घायल पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ पशुपालकों की आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों को भी कम करेगी। पहले चरण में आठ प्रमंडलों से शुरू होने वाली यह योजना भविष्य में पूरे राज्य तक विस्तारित की जा सकती है। यदि इसका प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया गया, तो यह बिहार में पशुधन संरक्षण, डेयरी विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली एक महत्वपूर्ण योजना साबित होगी।

