केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस बार सप्लीमेंट्री परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन पूरी तरह ऑफलाइन मोड में किया जाएगा। बोर्ड का यह फैसला डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के दौरान सामने आई शिकायतों के बाद लिया गया है। मंगलवार को पटना के आठ परीक्षा केंद्रों पर 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में संपन्न हुई। परीक्षा समाप्त होने के बाद अब उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें अनुभवी शिक्षक पारंपरिक तरीके से कॉपियों की जांच करेंगे।
सीबीएसई ने नियमित 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान पहली बार बड़े स्तर पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग (डिजिटल मूल्यांकन) प्रणाली लागू की थी। इस व्यवस्था में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाता है और परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तरों का मूल्यांकन करते हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना था। हालांकि, कई स्थानों से शिक्षकों और विद्यार्थियों की ओर से तकनीकी समस्याओं तथा मूल्यांकन में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं। बताया गया कि कुछ मामलों में उत्तर स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहे थे, जबकि कहीं तकनीकी दिक्कतों के कारण मूल्यांकन प्रभावित हुआ। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सीबीएसई ने सप्लीमेंट्री परीक्षा के लिए ऑफलाइन मूल्यांकन प्रणाली अपनाने का निर्णय लिया।
नई व्यवस्था के तहत सप्लीमेंट्री परीक्षा की सभी उत्तर पुस्तिकाएं सीधे शिक्षकों को उपलब्ध कराई जाएंगी। परीक्षक प्रत्येक उत्तर को ध्यानपूर्वक पढ़कर अंक देंगे और निर्धारित मूल्यांकन मानकों का पालन करेंगे। ऑफलाइन जांच में उत्तर पुस्तिकाओं पर सीधे अंक दर्ज किए जाएंगे, जिससे तकनीकी बाधाओं की संभावना समाप्त हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफलाइन मूल्यांकन में परीक्षक उत्तरों का अधिक गहराई से विश्लेषण कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को उनके प्रदर्शन के अनुरूप अंक मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
सप्लीमेंट्री परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है जो मुख्य परीक्षा में एक या अधिक विषयों में सफल नहीं हो पाए थे। ऐसे विद्यार्थियों के लिए यह परीक्षा एक नया अवसर प्रदान करती है, जिससे उनका शैक्षणिक वर्ष बच जाता है और वे आगे की पढ़ाई या प्रवेश प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में उत्तर पुस्तिकाओं का निष्पक्ष और त्रुटिरहित मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक माना जाता है। सीबीएसई का यह निर्णय विद्यार्थियों के हितों की रक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मंगलवार को पटना के आठ परीक्षा केंद्रों पर 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा बिना किसी बड़ी परेशानी के आयोजित की गई। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, अनुशासन और परीक्षा संबंधी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। परीक्षार्थियों ने निर्धारित समय पर परीक्षा दी और परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाएं सुरक्षित रूप से मूल्यांकन केंद्रों के लिए भेज दी गईं। परीक्षा केंद्रों पर बोर्ड की ओर से जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन कराया गया, जिससे पूरी परीक्षा प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक भविष्य की आवश्यकता है, लेकिन इसे लागू करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और तकनीकी क्षमता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। यदि किसी नई प्रणाली में तकनीकी कमियां रह जाती हैं तो उसका सीधा असर विद्यार्थियों के परिणामों पर पड़ सकता है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग जैसी आधुनिक व्यवस्था समय की बचत और पारदर्शिता के लिए उपयोगी है, लेकिन इसके सफल संचालन के लिए मजबूत तकनीकी ढांचा, प्रशिक्षित परीक्षक और प्रभावी निगरानी व्यवस्था आवश्यक है। जब तक ये सभी पहलू पूरी तरह सुदृढ़ नहीं हो जाते, तब तक महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पारंपरिक मूल्यांकन प्रणाली अधिक भरोसेमंद विकल्प मानी जा सकती है।
सीबीएसई का यह निर्णय केवल सप्लीमेंट्री परीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह भविष्य में मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा का आधार भी बन सकता है। यदि ऑफलाइन मूल्यांकन बेहतर और अधिक विश्वसनीय साबित होता है तो बोर्ड डिजिटल प्रणाली में आवश्यक सुधार करने के बाद ही उसे व्यापक स्तर पर लागू करने पर विचार कर सकता है। फिलहाल विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए राहत की बात यह है कि सप्लीमेंट्री परीक्षा की कॉपियों की जांच अनुभवी शिक्षकों द्वारा ऑफलाइन मोड में की जाएगी। इससे निष्पक्ष मूल्यांकन की उम्मीद बढ़ी है और विद्यार्थियों को अपने वास्तविक प्रदर्शन के अनुरूप परिणाम मिलने की संभावना भी अधिक मजबूत हुई है।

