अब नौ भाषाओं में सुनाई देगी राज्यसभा की कार्यवाही

Jitendra Kumar Sinha
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भारत विविध भाषाओं और संस्कृतियों का देश है। यहां भाषाई विविधता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकतों में से एक मानी जाती है। संसद में देश के अलग-अलग राज्यों से चुने गए प्रतिनिधि अपनी-अपनी भाषाई पृष्ठभूमि के साथ आते हैं। ऐसे में कार्यवाही को सहज रूप से समझना और उसमें प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्यसभा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित समानांतर अनुवाद प्रणाली की शुरुआत की है। अब राज्यसभा के सदस्य कार्यवाही को नौ भाषाओं में सुन सकेंगे, जिसे आगे चलकर सभी 22 अनुसूचित भाषाओं तक विस्तारित करने की योजना है।


नई व्यवस्था के तहत राज्यसभा की कार्यवाही का एआई की सहायता से रियल-टाइम (तत्काल) अनुवाद किया जाएगा। सांसद अपने-अपने आसन पर उपलब्ध मल्टीमीडिया उपकरण के माध्यम से अपनी पसंद की भाषा का चयन कर सकेंगे और उसी भाषा में सदन की कार्यवाही सुन पाएंगे।


यह तकनीक न केवल अनुवाद को तेज बनाएगी, बल्कि भाषाई बाधाओं को भी काफी हद तक समाप्त करेगी। इससे सांसदों को किसी भी चर्चा, विधेयक या वक्तव्य को बेहतर ढंग से समझने में सुविधा मिलेगी और वे अधिक प्रभावी ढंग से अपनी भागीदारी निभा सकेंगे।


राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मानसून सत्र के प्रारंभिक संबोधन में जानकारी दी कि फिलहाल यह सुविधा नौ भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है। भविष्य में इसे संविधान की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं तक विस्तारित किया जाएगा।


यह पहल भारत की भाषाई समावेशिता को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। इससे विभिन्न राज्यों के सांसदों को अपनी मातृभाषा में कार्यवाही समझने का अवसर मिलेगा और लोकतांत्रिक विमर्श अधिक व्यापक एवं प्रभावी बन सकेगा।


लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब प्रत्येक जनप्रतिनिधि बिना किसी भाषाई कठिनाई के अपनी बात रख सके और दूसरों की बात समझ सके। भारत जैसे बहुभाषी देश में यह चुनौती हमेशा से रही है कि सभी सांसद एक समान भाषा में सहज नहीं होते।


नई व्यवस्था से उन सांसदों को विशेष लाभ मिलेगा जिनकी कार्यभाषा हिंदी या अंग्रेजी नहीं है। मातृभाषा में जानकारी उपलब्ध होने से चर्चा की गुणवत्ता बेहतर होगी, निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी।


हाल के वर्षों में भारतीय संसद में डिजिटल तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ा है। ई-पोर्टल, डिजिटल दस्तावेज, ऑनलाइन प्रश्न, पेपरलेस कार्यवाही और अब एआई आधारित अनुवाद प्रणाली इस परिवर्तन के प्रमुख उदाहरण हैं।


कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल अनुवाद तक सीमित नहीं है। भविष्य में इसका उपयोग दस्तावेजों के विश्लेषण, संसदीय शोध, रिकॉर्ड प्रबंधन तथा सूचना उपलब्ध कराने जैसे अनेक क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। इससे कार्यकुशलता बढ़ेगी और संसदीय प्रक्रियाएं अधिक आधुनिक एवं पारदर्शी बनेंगी।


सभापति ने जानकारी दी कि राज्यसभा के मानसून सत्र के दौरान कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र के पहले दिन कार्य सलाहकार समिति की बैठक में सरकार के विधायी कार्यों और आगामी कार्यसूची पर चर्चा की गई। इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में नई अनुवाद व्यवस्था सांसदों के लिए उपयोगी साबित होगी और विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि वाले सदस्यों को समान अवसर प्रदान करेगी।


यद्यपि एआई आधारित अनुवाद प्रणाली अत्यंत उपयोगी है, फिर भी इसकी सफलता अनुवाद की शुद्धता और तकनीकी विश्वसनीयता पर निर्भर करेगी। संसदीय चर्चाओं में विधिक, संवैधानिक और तकनीकी शब्दावली का अत्यधिक प्रयोग होता है। ऐसे शब्दों का सटीक और संदर्भानुकूल अनुवाद सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय बोलियों, उच्चारण और भाषाई विविधताओं को समझने के लिए एआई प्रणाली को निरंतर प्रशिक्षित और अद्यतन करना भी आवश्यक होगा।


राज्यसभा में एआई आधारित बहुभाषी अनुवाद प्रणाली की शुरुआत भारतीय संसदीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी, आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यह व्यवस्था न केवल सांसदों के बीच भाषाई दूरी कम करेगी, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद को भी अधिक प्रभावशाली बनाएगी।


जब यह सुविधा सभी 22 अनुसूचित भाषाओं तक पहुंच जाएगी, तब संसद वास्तव में भारत की भाषाई विविधता का और अधिक सशक्त प्रतिनिधित्व करेगी। तकनीक और लोकतंत्र का यह समन्वय भविष्य की संसद की नई पहचान बन सकता है, जहां हर जनप्रतिनिधि अपनी भाषा में सुन सकेगा, समझ सकेगा और देशहित में अधिक प्रभावी योगदान दे सकेगा।



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