बिहार सरकार ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकारी योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बुधवार को पटना में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के उस एजेंडे को मंजूरी दी गई, जिसके तहत ‘बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया (संशोधन) नियमावली-2026’ में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
आज सोशल मीडिया केवल मनोरंजन या संवाद का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी सूचनाओं को आम लोगों तक तेजी से पहुंचाने का प्रभावी मंच बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स, वेबसाइट, वेब पोर्टल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाई जा सकती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2024 की नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया था। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार की व्यवस्था को वर्तमान डिजिटल परिस्थितियों के अनुरूप अधिक व्यावहारिक बनाना है।
संशोधन के तहत नियमावली की कंडिका-8 (vi), 11, 11(A) और 11(B) में आंशिक बदलाव किए जाएंगे। इन संशोधनों के माध्यम से सोशल मीडिया पर प्रकाशित पोस्ट और वीडियो के प्रदर्शन यानि उनकी पहुंच एवं प्रभाव के आधार पर अतिरिक्त राशि के भुगतान की व्यवस्था को अधिक स्पष्ट किया गया है। इससे सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए सरकारी प्रचार अभियान चलाने में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, प्रचार सामग्री की वास्तविक पहुंच और प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए भुगतान की व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकेगा।
संशोधित नियमावली में नयी कंडिका 14(A), 14(B) और 14(C) जोड़े जाने का प्रावधान किया गया है। इन नए प्रावधानों में सूचीबद्ध सोशल मीडिया हैंडल, पेज और चैनलों के फॉलोअर्स की समय-समय पर जांच की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सूचीबद्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म की वास्तविक पहुंच और दर्शक संख्या नियमों के अनुरूप बनी हुई है। डिजिटल मीडिया में फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बदलती रहती है, इसलिए समय-समय पर सत्यापन की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
संशोधन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विशेष परिस्थितियों में गैर-सूचीबद्ध प्रतिष्ठित सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स को भी विज्ञापन देने का प्रावधान किया जा रहा है। इससे सरकार को ऐसे प्रभावशाली डिजिटल क्रिएटर्स और इन्फ्लूएंसर्स तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा, जिनकी किसी खास क्षेत्र, वर्ग या विषय में व्यापक पहुंच हो। आवश्यकता के अनुसार ऐसे माध्यमों का उपयोग सरकारी जनकल्याणकारी अभियानों के लिए किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था में नियमावली की व्याख्या को लेकर किसी प्रकार की अस्पष्टता उत्पन्न होने पर आवश्यक स्पष्टीकरण देने की व्यवस्था भी की गई है। इसके लिए कंडिका 14(C) जैसे प्रावधान उपयोगी साबित हो सकते हैं। किसी भी नियम के क्रियान्वयन के दौरान व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ सकती हैं। ऐसे में स्पष्टीकरण की व्यवस्था होने से विभागीय स्तर पर निर्णय लेने में स्पष्टता आएगी और नियमों के अनुपालन में एकरूपता बनी रह सकेगी।
सरकार का लक्ष्य केवल सोशल मीडिया पर सरकारी विज्ञापन बढ़ाना नहीं है, बल्कि उनके माध्यम से योजनाओं और कार्यक्रमों की वास्तविक जानकारी आम जनता तक पहुंचाना है। संशोधित नियमावली इसी सोच के अनुरूप सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया को अधिक व्यवस्थित माध्यम बनाने की दिशा में कदम है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रचार की सफलता को पहुंच, प्रदर्शन और प्रभाव जैसे मानकों से जोड़ने से सरकारी संचार व्यवस्था अधिक परिणामोन्मुख हो सकती है।
बिहार में बड़ी संख्या में सरकारी योजनाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण और आधारभूत संरचना से जुड़ी हैं। इन योजनाओं का लाभ तभी व्यापक रूप से मिल सकता है, जब पात्र लोगों को उनकी जानकारी समय पर मिले। ऐसे में सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया के माध्यम से सूचनाओं का व्यापक प्रसार महत्वपूर्ण है। बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया (संशोधन) नियमावली-2026 इसी डिजिटल आवश्यकता को संस्थागत रूप देने का प्रयास है। कुल मिलाकर, मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद प्रस्तावित संशोधन बिहार की सरकारी प्रचार व्यवस्था को डिजिटल युग के अनुरूप ढालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। यदि पारदर्शिता, सत्यापन और प्रभावी निगरानी के साथ इन प्रावधानों को लागू किया जाता है, तो सोशल मीडिया सरकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का और अधिक प्रभावशाली माध्यम बन सकता है।

