पॉपकॉर्न जैसी खुशबू वाला अनोखा वन्यजीव है - “बिटुरॉन्ग”

Jitendra Kumar Sinha
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दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के घने वर्षावनों में पाया जाने वाला बिटुरॉन्ग (Binturong) प्रकृति की सबसे अनोखी जीव प्रजातियों में से एक है। अपने लंबे, झबरे काले शरीर और चेहरे की बनावट के कारण इसे अक्सर 'बेयरकैट' (Bearcat) कहा जाता है। हालांकि, यह न तो भालू है और न ही बिल्ली, बल्कि सिवेट (Viverridae) परिवार का सदस्य है।


बिटुरॉन्ग की सबसे दिलचस्प विशेषता इसके शरीर से निकलने वाली खुशबू है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके मूत्र और गंध ग्रंथियों से निकलने वाले एक विशेष रासायनिक यौगिक के कारण इसकी महक गर्म और मीठे पॉपकॉर्न जैसी महसूस होती है। यह सुगंध केवल आकर्षण का विषय नहीं है, बल्कि दूसरे बिटुरॉन्ग तक अपनी उपस्थिति और क्षेत्र का संदेश पहुंचाने का भी माध्यम है।


बिटुरॉन्ग का अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बीतता है। इसकी पकड़ने वाली लंबी पूंछ (Prehensile Tail) इसे डालियों को मजबूती से पकड़ने और संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। यह दुनिया के उन गिने-चुने मांसाहारी स्तनधारियों में शामिल है जिनकी पूंछ इस प्रकार की होती है। इसके मजबूत पंजे और लचीले पैर इसे पेड़ों पर आसानी से चढ़ने और उतरने में सक्षम बनाते हैं।


यह मुख्य रूप से निशाचर (Nocturnal) जीव है, यानी दिन में आराम करता है और रात के समय भोजन की तलाश में निकलता है। इसकी सूंघने और सुनने की क्षमता काफी तेज होती है, जिससे यह अंधेरे में भी आसानी से अपना रास्ता खोज लेता है।


बिटुरॉन्ग सर्वाहारी है। इसका पसंदीदा भोजन अंजीर सहित विभिन्न प्रकार के फल हैं। इसके अलावा यह पत्तियां, छोटे जीव, पक्षियों के अंडे और कभी-कभी कीड़े भी खाता है। जंगल के पारिस्थितिक संतुलन में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। फल खाने के बाद यह बीजों को दूर-दूर तक फैलाता है, जिससे नए पौधों के उगने में सहायता मिलती है। इसी कारण इसे प्राकृतिक 'बीज प्रसारक' (Seed Disperser) भी कहा जाता है।


वनों की कटाई, अवैध शिकार और प्राकृतिक आवास के लगातार सिकुड़ने के कारण बिटुरॉन्ग की संख्या कई क्षेत्रों में घट रही है। इस अनोखे जीव और इसके प्राकृतिक आवास का संरक्षण जैव विविधता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।


रोचक तथ्य है- बिटुरॉन्ग को 'बेयरकैट' कहा जाता है, लेकिन इसका भालू या बिल्ली से कोई संबंध नहीं है। इसके शरीर से पॉपकॉर्न जैसी मीठी खुशबू आती है। इसकी पकड़ने वाली पूंछ पेड़ों पर रहने में मदद करती है। यह मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहता है। बीज फैलाकर यह जंगलों के पुनर्जनन में महत्वपूर्ण योगदान देता है।


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