होटल में चेक-इन का बदलेगा तरीका - अब आधार की फोटोकॉपी देने की जरूरत नहीं

Jitendra Kumar Sinha
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होटल या रिजॉर्ट में ठहरने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। अब मेहमानों को चेक-इन के समय पहचान के लिए आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करने की जरूरत नहीं पड़ सकती है। इसकी जगह डिजिटल माध्यम से पहचान सत्यापन की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्यूआर कोड, ओटीपी और ऐप-टू-ऐप सत्यापन जैसी तकनीकों के माध्यम से होटल में ठहरने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि की जा सकेगी।


होटल और रिजॉर्ट में चेक-इन के दौरान आम तौर पर मेहमानों से पहचान पत्र मांगा जाता है। कई जगहों पर आधार कार्ड की फोटोकॉपी लेकर उसे रिकॉर्ड में रखा जाता है। इससे कागज के इस्तेमाल के साथ-साथ व्यक्तिगत जानकारी के संग्रह और उसके सुरक्षित रखे जाने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। अब पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) देश के अलग-अलग हिस्सों में होटल और रिजॉर्ट संचालकों के साथ इस व्यवस्था को लागू करने को लेकर चर्चा कर रहा है। इसका उद्देश्य पहचान सत्यापन को आसान, तेज और अधिक डिजिटल बनाना है।


नई व्यवस्था में मेहमान के आधार विवरण की पुष्टि डिजिटल माध्यम से की जा सकती है। क्यूआर कोड स्कैन करने, ओटीपी के जरिए सत्यापन करने या संबंधित ऐप के माध्यम से पहचान की पुष्टि जैसी सुविधाएं इसमें शामिल हो सकती हैं। इससे होटल कर्मचारियों को दस्तावेज की फोटोकॉपी संभालने की आवश्यकता कम होगी। मेहमान के लिए भी चेक-इन प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान और तेज हो सकती है। खासकर ऐसे यात्रियों को सुविधा मिलेगी जो होटल में देर रात पहुंचते हैं या जिनके पास पहचान पत्र की अतिरिक्त फोटोकॉपी उपलब्ध नहीं होती।


डिजिटल पहचान सत्यापन की दिशा में कुछ होटल और रिजॉर्ट पहले ही कदम बढ़ा चुके हैं। कई संस्थानों ने अपनी चेक-इन प्रणाली में डिजिटल सत्यापन के विकल्पों को शामिल करना शुरू कर दिया है। इससे संकेत मिलता है कि आतिथ्य क्षेत्र में दस्तावेज आधारित प्रक्रिया धीरे-धीरे डिजिटल प्रणाली की ओर बढ़ रही है। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ होटल उद्योग में बुकिंग, भुगतान, चेक-इन और चेक-आउट जैसी प्रक्रियाएं पहले ही काफी हद तक डिजिटल हो चुकी हैं। ऐसे में पहचान सत्यापन का डिजिटल होना इसी बदलाव की अगली कड़ी माना जा रहा है।


डिजिटल व्यवस्था से सुविधा बढ़ने के साथ डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पहचान से जुड़ी जानकारी संवेदनशील होती है। इसलिए होटल और अन्य संस्थानों के लिए जरूरी होगा कि वे मेहमानों के डेटा को सुरक्षित रखें और उसका इस्तेमाल केवल आवश्यक उद्देश्य के लिए करें। डिजिटल सत्यापन की व्यवस्था का एक प्रमुख लाभ यह हो सकता है कि हर जगह आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करने की आवश्यकता कम हो। इससे अनावश्यक रूप से कागजी दस्तावेजों के संग्रह की प्रवृत्ति पर भी रोक लग सकती है।


नई व्यवस्था लागू होने पर होटल में पहुंचने वाले यात्रियों को चेक-इन के दौरान कम कागजी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ सकता है। होटल प्रबंधन के लिए भी दस्तावेजों को संभालने, फाइलों में रखने और बाद में रिकॉर्ड खोजने की जरूरत कम हो सकती है। डिजिटल सत्यापन से प्रक्रिया तेज होने के साथ रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक व्यवस्थित हो सकता है। हालांकि, अलग-अलग होटल और रिजॉर्ट में इसे लागू करने का तरीका अलग हो सकता है।


होटल में आधार की फोटोकॉपी देने की परंपरा से डिजिटल सत्यापन की ओर बढ़ता कदम तकनीक आधारित सेवाओं के विस्तार को दर्शाता है। आने वाले समय में क्यूआर कोड, ओटीपी और ऐप आधारित पहचान सत्यापन होटल चेक-इन का सामान्य हिस्सा बन सकते हैं। फिलहाल यूआईडीएआई की ओर से होटल और रिजॉर्ट के साथ इस व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए चर्चा की जा रही है और कई संस्थानों ने इसे अपनाना भी शुरू कर दिया है। यदि यह व्यवस्था व्यापक स्तर पर लागू होती है, तो होटल में ठहरने वाले यात्रियों के लिए पहचान प्रमाण देने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और डिजिटल हो सकती है।


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