हवाई सफर आमतौर पर समय बचाने का जरिया माना जाता है, लेकिन एयरपोर्ट पर फ्लाइट का इंतजार कई बार यात्रियों को लंबा और उबाऊ लगता है। अब इस इंतजार को ज्ञान, कल्पना और साहित्य से जोड़ने की एक शानदार पहल शुरू की गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की पहल के तहत देश के 68 एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए ‘फ्लाईब्ररी’ सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य यात्रियों को खाली समय में किताबें पढ़ने का अवसर देना और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
फ्लाईब्ररी यानी ‘फ्लाइंग लाइब्रेरी’ की अवधारणा बेहद सरल लेकिन आकर्षक है। एयरपोर्ट पर यात्री अपनी पसंद की किताब चुन सकते हैं और उसे वहीं बैठकर पढ़ सकते हैं। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर यात्री किताब को अपने साथ विमान में भी ले जा सकते हैं। मंजिल तक पहुंचने के बाद किताब को वहां उपलब्ध फ्लाईब्ररी में जमा किया जा सकता है। इस सुविधा से यात्रियों को न केवल यात्रा के दौरान पढ़ने का मौका मिलता है, बल्कि अलग-अलग शहरों और एयरपोर्ट के बीच किताबों का एक अनोखा सफर भी शुरू होता है।
इस पहल की शुरुआत भुवनेश्वर एयरपोर्ट से हुई थी। धीरे-धीरे इसकी उपयोगिता और लोकप्रियता को देखते हुए इसे देश के अन्य एयरपोर्ट तक विस्तार दिया गया। अब 68 एयरपोर्ट पर यात्रियों को इस तरह की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। भुवनेश्वर से शुरू हुई यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सार्वजनिक स्थानों को केवल सुविधाओं और सेवाओं का केंद्र ही नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति के माध्यम के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
फ्लाईब्ररी की सबसे खास बात यह है कि यहां किताबों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की व्यवस्था भी पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देती है। यात्री किसी एयरपोर्ट से किताब लेकर अपनी यात्रा पर निकल सकते हैं और गंतव्य तक पहुंचने के बाद उसे वहां की फ्लाईब्ररी में जमा कर सकते हैं। कुछ स्थानों पर यात्रियों को किताब घर ले जाने और अगली यात्रा के दौरान वापस करने की सुविधा भी दी जाती है। इस तरह एक किताब किसी एक यात्री तक सीमित नहीं रहती है, बल्कि कई पाठकों तक पहुंचती है।
फ्लाईब्ररी को अधिक समृद्ध बनाने में यात्री भी योगदान कर सकते हैं। वे अपनी पसंद की किताबें दान कर सकते हैं। इससे एयरपोर्ट की लाइब्रेरी में पुस्तकों का संग्रह लगातार बढ़ सकता है और अलग-अलग रुचियों वाले यात्रियों को अपनी पसंद की सामग्री पढ़ने का अवसर मिल सकता है। किताब दान करने की यह व्यवस्था पढ़ने वाले लोगों को इस अभियान का सहभागी भी बनाती है। कोई व्यक्ति अपनी पढ़ी हुई और उपयोगी किताब किसी दूसरे पाठक तक पहुंचाकर ज्ञान की यात्रा को आगे बढ़ा सकता है।
आज के दौर में एयरपोर्ट पर इंतजार करते समय अधिकांश लोग मोबाइल फोन, सोशल मीडिया या वीडियो में व्यस्त दिखाई देते हैं। ऐसे समय में फ्लाईब्ररी जैसी पहल किताबों को फिर से रोजमर्रा की यात्रा का हिस्सा बनाने की कोशिश है। किताब पढ़ने से यात्रा का समय उपयोगी और शांतिपूर्ण तरीके से बिताया जा सकता है। उपन्यास, कहानी, यात्रा-वृत्तांत, जीवनी या अन्य साहित्यिक पुस्तकें यात्रियों को कुछ समय के लिए डिजिटल दुनिया से दूर ले जा सकती हैं।
फ्लाईब्ररी केवल किताब उपलब्ध कराने की सुविधा नहीं है, बल्कि यह पढ़ने की आदत और पुस्तकों के आदान-प्रदान की एक नई संस्कृति विकसित करने का प्रयास है। एयरपोर्ट जैसे व्यस्त स्थान पर किताबों के लिए जगह बनाना यह संदेश देता है कि यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का नाम नहीं है। यह सीखने, जानने और अनुभवों को साझा करने का अवसर भी हो सकती है। देश के 68 एयरपोर्ट पर इस सेवा का विस्तार इस विचार को नई गति देता है। यदि आने वाले समय में और अधिक एयरपोर्ट इससे जुड़ते हैं, तो यात्रियों के लिए हर सफर में एक नई किताब और एक नया अनुभव मिलने की संभावना बढ़ेगी।
फ्लाईब्ररी ने एयरपोर्ट के इंतजार को एक नया अर्थ देने की कोशिश की है। जहां कभी यात्री केवल फ्लाइट के समय का इंतजार करते थे, वहां अब वे किसी कहानी, विचार या ज्ञान की दुनिया में प्रवेश कर सकते हैं। किताब एयरपोर्ट से विमान तक और एक शहर से दूसरे शहर तक यात्रा करेगी। यही इस पहल की सबसे खूबसूरत विशेषता है कि यात्री अपनी मंजिल तक पहुंचेंगे, लेकिन किताब की यात्रा शायद उसके बाद भी जारी रहेगी। ज्ञान की यह उड़ान जितनी दूर तक पहुंचेगी, पढ़ने की संस्कृति भी उतनी ही मजबूत होगी।

