भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। बेंगलुरु स्थित वॉइस एआई स्टार्टअप ज्ञानी.एआई ने 11 भारतीय भाषाओं में काम करने वाला स्वदेशी एआई स्टैक ‘ज्ञानी अर्थ’ लॉन्च किया है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इसका शुभारंभ किया। यह तकनीक खास तौर पर भारतीय भाषाओं में नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और सुलभ बनाने के उद्देश्य से विकसित की गई है।
एआई के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारत में विदेशी तकनीकी मॉडलों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। ‘ज्ञानी अर्थ’ को इसी दिशा में एक स्वदेशी विकल्प के रूप में पेश किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह विदेशी एआई मॉडलों की तुलना में कम लागत पर तेज जवाब देने में सक्षम होगा। इसका एक महत्वपूर्ण पहलू डेटा सुरक्षा और डेटा संप्रभुता से जुड़ा है। कंपनी के अनुसार, देश में उत्पन्न होने वाले नागरिकों के डेटा को देश के भीतर ही सुरक्षित रखने में यह तकनीक मदद कर सकती है। सरकारी सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले संवेदनशील डेटा के लिहाज से यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
‘ज्ञानी अर्थ’ का सबसे उपयोगी संभावित इस्तेमाल सरकारी सेवाओं में दिखाई देता है। आम नागरिक अपनी शिकायत अपनी मातृभाषा या सुविधाजनक भारतीय भाषा में दर्ज करा सकेंगे। एआई उस शिकायत को समझकर संबंधित विभाग तक पहुंचाने में सहायता कर सकेगा। भारत जैसे बहुभाषी देश में यह सुविधा बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। अभी भी बड़ी संख्या में लोग अंग्रेजी या हिंदी में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने में सहज महसूस नहीं करते। स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में संवाद की सुविधा मिलने से ऐसे लोगों की सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।
‘ज्ञानी अर्थ’ केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनी के अनुसार, संबंधित विभाग द्वारा शिकायत का समाधान किए जाने के बाद सिस्टम नागरिक को इसकी जानकारी भी उपलब्ध करा सकेगा। इससे शिकायतकर्ता को बार-बार कार्यालय जाने या शिकायत की स्थिति जानने के लिए अलग-अलग माध्यमों का सहारा लेने की आवश्यकता कम हो सकती है। यदि यह व्यवस्था बड़े पैमाने पर लागू होती है तो सरकारी शिकायत निवारण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
भारत में भाषाई विविधता दुनिया के अन्य देशों से अलग है। यहां अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अनेक भाषाओं और बोलियों का इस्तेमाल होता है। ऐसे में एआई तकनीक को भारतीय भाषाओं के अनुरूप विकसित करना अपने आप में बड़ी चुनौती है। ‘ज्ञानी अर्थ’ को 11 भारतीय भाषाओं में काम करने के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य तकनीक और नागरिक के बीच भाषा की बाधा को कम करना है। भविष्य में ऐसी प्रणालियों में और अधिक भारतीय भाषाओं को शामिल किए जाने की संभावना भी महत्वपूर्ण होगी।
‘ज्ञानी अर्थ’ के पीछे वॉइस एआई तकनीक का भी महत्वपूर्ण योगदान है। आवाज के माध्यम से कंप्यूटर या डिजिटल प्रणाली से संवाद करना उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, जो पढ़ने-लिखने या जटिल डिजिटल इंटरफेस के इस्तेमाल में सहज नहीं हैं। एक नागरिक अपनी समस्या बोलकर बता सके और एआई उसे समझकर उचित प्रक्रिया में आगे बढ़ा दे, तो डिजिटल सरकारी सेवाएं अधिक मानवीय और आसान बन सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों और कम डिजिटल साक्षरता वाले लोगों के लिए ऐसी तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
‘ज्ञानी अर्थ’ का लॉन्च केवल एक नए एआई उत्पाद की शुरुआत नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं, डेटा सुरक्षा और स्वदेशी तकनीकी क्षमता को केंद्र में रखने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और ऐसे में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित एआई प्रणालियों की भूमिका बढ़ना स्वाभाविक है। यदि स्वदेशी एआई मॉडल कम लागत, तेज प्रतिक्रिया, बेहतर भाषाई समझ और मजबूत डेटा सुरक्षा के साथ सरकारी सेवाओं में प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो इससे करोड़ों नागरिकों को लाभ मिल सकता है। ‘ज्ञानी अर्थ’ का संदेश स्पष्ट है कि एआई केवल तकनीक की भाषा नहीं है, बल्कि भारत की अपनी भाषाओं में आम नागरिक की आवाज भी बन सकता है।

