चीन ने बनाया ‘मॉस्किटो एयर डिफेंस सिस्टम’

Jitendra Kumar Sinha
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मच्छरों से बचने के लिए अब तक मच्छरदानी, कॉइल, स्प्रे और इलेक्ट्रिक रैकेट जैसे पारंपरिक उपायों का इस्तेमाल होता रहा है। लेकिन तकनीक की दुनिया में अब मच्छर नियंत्रण का एक बेहद दिलचस्प और भविष्यवादी तरीका सामने आया है। चीन की कंपनी फोटॉन मैट्रिक्स लैब ने ऐसा पोर्टेबल लेजर सिस्टम विकसित करने का दावा किया है, जो हवा में उड़ रहे मच्छरों और छोटे कीट-पतंगों को पहचानकर उन पर बेहद छोटी लेजर पल्स दाग सकता है। कंपनी इसे ‘मॉस्किटो एयर डिफेंस सिस्टम’ के रूप में पेश कर रही है।


लेजर तकनीक का इस्तेमाल आज दुनिया भर में सैन्य क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को निष्क्रिय करने के लिए लेजर आधारित प्रणालियों पर काम किया जा रहा है। इसी तकनीक का एक अनोखा नागरिक उपयोग मच्छर नियंत्रण के रूप में सामने आया है। इस प्रणाली की खासियत यह है कि इसका उद्देश्य पूरे इलाके में कीटनाशक फैलाना नहीं, बल्कि हवा में मौजूद छोटे उड़ने वाले लक्ष्य को पहचानकर उसे सटीक तरीके से निष्क्रिय करना है। यानी तकनीक का फोकस ‘जहां मच्छर, वहीं कार्रवाई’ पर है।


कंपनी के मुताबिक, यह पोर्टेबल सिस्टम लगभग छह मीटर तक की दूरी से मच्छरों और दूसरे छोटे उड़ने वाले कीड़ों का पता लगा सकता है। इसके लिए मशीन में सेंसर, कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विजन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। सिस्टम सबसे पहले अपने आसपास के क्षेत्र को स्कैन करता है। इसके बाद एआई विजन मॉड्यूल संभावित लक्ष्य की पहचान करने की कोशिश करता है। इसका उद्देश्य केवल किसी भी उड़ती वस्तु पर प्रतिक्रिया करना नहीं, बल्कि यह निर्धारित करना है कि सामने उड़ रहा लक्ष्य मच्छर या कोई अन्य छोटा कीड़ा है।


इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा एआई आधारित पहचान प्रणाली है। मच्छर बेहद छोटा और तेज गति से दिशा बदलने वाला जीव है। इसलिए उसे पहचानना और उसके उड़ने के पैटर्न का अनुमान लगाना आसान नहीं होता। सिस्टम सेंसर से मिलने वाले आंकड़ों और दृश्य जानकारी का विश्लेषण करता है। जब लक्ष्य की पहचान हो जाती है, तब सिस्टम उसके अनुसार बेहद छोटी और केंद्रित लेजर पल्स छोड़ता है। इस तरह कार्रवाई अपेक्षाकृत सीमित क्षेत्र में रखने का प्रयास किया जाता है।


इस उपकरण को केवल औद्योगिक या प्रयोगशाला उपयोग के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा की उन जगहों के लिए भी डिजाइन किए जाने की बात कही गई है जहां मच्छरों की समस्या अधिक रहती है। घर, आंगन, बगीचे, पार्क और अन्य खुले स्थान इसके संभावित उपयोग क्षेत्र हो सकते हैं। अगर ऐसी तकनीक व्यावहारिक और सुरक्षित साबित होती है तो भविष्य में मच्छर नियंत्रण के तरीकों में बड़ा बदलाव आ सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोकना चुनौती बना रहता है।


लेजर आधारित मच्छर नियंत्रण निश्चित रूप से आकर्षक विचार है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं। किसी मशीन के लिए मच्छर की सही पहचान करना, तेजी से उड़ते लक्ष्य को लगातार ट्रैक करना और केवल निर्धारित लक्ष्य पर ही कार्रवाई करना तकनीकी रूप से कठिन काम है। इसके अलावा आम लोगों के बीच ऐसे उपकरणों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण सवाल होगी। लेजर की शक्ति, मानव आंखों की सुरक्षा, बच्चों और पालतू जानवरों पर संभावित प्रभाव तथा दूसरे कीटों पर इसके असर जैसे विषयों पर स्पष्ट सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होगी।


मच्छर भले ही आकार में छोटा हो, लेकिन डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और अन्य बीमारियों के कारण उसका प्रभाव बेहद बड़ा हो सकता है। इसलिए उसके नियंत्रण के लिए दुनिया भर में लगातार नई तकनीकों पर काम हो रहा है। चीन का यह लेजर आधारित सिस्टम इसी दिशा में एक रोचक प्रयोग के रूप में देखा जा सकता है। यदि सेंसर, एआई और लेजर तकनीक का यह संयोजन सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती साबित होता है, तो आने वाले समय में मच्छरों के खिलाफ लड़ाई में स्प्रे और कॉइल के साथ लेजर भी एक नया हथियार बन सकता है। फिलहाल यह तकनीक जितनी रोमांचक है, उतनी ही महत्वपूर्ण इसकी सुरक्षा, वास्तविक प्रभावशीलता और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की व्यवहारिकता को लेकर होने वाली जांच होगी। लेकिन इतना तय है कि मच्छर नियंत्रण की दुनिया अब पारंपरिक तरीकों से निकलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लेजर की हाईटेक दुनिया में कदम रख रही है।


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