बिहार में पहली बार खुलेगा - 'स्कूल ऑफ अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेंस'

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। राज्य में पहली बार स्कूल ऑफ अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेंस की स्थापना की जाएगी। यह महत्वपूर्ण पहल आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (एकेयू) में शुरू की जा रही है। इसके साथ ही पहली बार अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेंस विषय में एमए/एमएससी स्तर का स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी प्रारंभ होगा। यह कदम न केवल बिहार के विद्यार्थियों के लिए नए अवसर लेकर आएगा, बल्कि राज्य के तेजी से बढ़ते शहरीकरण को वैज्ञानिक, व्यावहारिक और टिकाऊ दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


भारत तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। बढ़ती आबादी, आधुनिक बुनियादी सुविधाओं की मांग, यातायात, जल निकासी, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, आवास और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित और विशेषज्ञ मानव संसाधन की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में बिहार में स्कूल ऑफ अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेंस की स्थापना एक दूरदर्शी पहल मानी जा रही है। यह संस्थान छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं देगा, बल्कि उन्हें शहरों की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान तैयार करने की व्यावहारिक क्षमता भी विकसित करेगा।


अब तक बिहार के विद्यार्थियों को अर्बन पॉलिसी एवं गवर्नेंस जैसे विशेष विषयों की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। नए स्कूल की स्थापना के साथ ही एमए/एमएससी स्तर का विशेष पाठ्यक्रम शुरू होने से राज्य के छात्रों को अपने ही प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इस पाठ्यक्रम में शहरी नियोजन, नगर प्रशासन, सार्वजनिक नीति, सतत विकास, पर्यावरण प्रबंधन, स्मार्ट सिटी, नगर वित्त, ई-गवर्नेंस, परिवहन प्रबंधन, आपदा प्रबंधन तथा नागरिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार एवं शोध के नए अवसर प्राप्त होंगे।


एकेयू के कुलपति प्रो. शरद ने बताया कि यह पहल भारत सरकार की राष्ट्रीय नीति के अनुरूप की जा रही है। नई शिक्षा नीति बहु-विषयक शिक्षा, शोध, नवाचार और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों पर विशेष बल देती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यह संस्थान स्थापित किया जा रहा है। यह स्कूल राज्य में शहरी विकास से जुड़े शोध, नीति निर्माण और प्रशासनिक सुधारों का प्रमुख केंद्र बन सकता है। यहां तैयार होने वाले विशेषज्ञ भविष्य में नगर निकायों, विकास प्राधिकरणों, सरकारी एजेंसियों और निजी संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।


बिहार में पिछले कुछ वर्षों में शहरी विकास की अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शुरू हुई हैं। स्मार्ट सिटी मिशन, सड़क एवं पुल निर्माण, जलापूर्ति योजनाएं, सीवरेज नेटवर्क, नगर परिवहन और डिजिटल प्रशासन जैसी परियोजनाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इन योजनाओं के सफल संचालन के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। स्कूल ऑफ अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेंस इस आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यहां से शिक्षित छात्र भविष्य में बिहार के शहरों को अधिक सुव्यवस्थित, स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में योगदान देंगे।


यह संस्थान केवल शिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरी विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध और नवाचार को भी बढ़ावा देगा। स्थानीय समस्याओं पर आधारित अध्ययन, नई नीतियों का विश्लेषण, आधुनिक तकनीकों का उपयोग तथा नागरिकों की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके माध्यम से बिहार के शहरों के लिए ऐसी योजनाएं तैयार की जा सकेगी, जो स्थानीय आवश्यकताओं और संसाधनों के अनुरूप हो। इससे नीति निर्माण अधिक प्रभावी और व्यवहारिक बन सकेगा।


अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेंस आज विश्व स्तर पर तेजी से उभरता हुआ अध्ययन क्षेत्र है। इस विषय में प्रशिक्षित युवाओं के लिए नगर निकायों, स्मार्ट सिटी मिशन, नीति आयोग, अंतरराष्ट्रीय विकास संस्थाओं, शोध संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, परामर्श कंपनियों और निजी क्षेत्र में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। बिहार में इस पाठ्यक्रम की शुरुआत से राज्य के युवाओं को अपने घर के निकट ही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और बेहतर करियर विकल्प उपलब्ध होंगे।


स्कूल ऑफ अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेंस की स्थापना बिहार के उच्च शिक्षा और शहरी विकास दोनों क्षेत्रों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह पहल न केवल विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और शोध के नए अवसर प्रदान करेगी, बल्कि राज्य के शहरों को बेहतर, योजनाबद्ध और टिकाऊ बनाने के लिए कुशल विशेषज्ञ भी तैयार करेगी। यदि इस संस्थान में आधुनिक संसाधन, अनुभवी संकाय, उद्योग एवं सरकारी संस्थाओं के साथ सहयोग तथा गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा दिया जाता है, तो आने वाले वर्षों में यह राष्ट्रीय स्तर पर शहरी नीति और प्रशासन के प्रमुख अध्ययन केंद्रों में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है। यह कदम बिहार को ज्ञान, शोध और सुशासन आधारित शहरी विकास की नई दिशा देने वाला सिद्ध होगा।



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