पूर्व मंत्री टी.बी. जयचंद्र ने कहा कि "खुद को कांग्रेसी कहने में शर्म आती है"

Jitendra Kumar Sinha
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कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। लंबे समय से मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे कई वरिष्ठ विधायक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इसी नाराजगी ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठक का रूप लिया, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली और मंत्रियों के चयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।


सात बार विधायक रह चुके और पूर्व मंत्री टी.बी. जयचंद्र ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक करते हुए कहा कि जिस तरह मंत्रिमंडल के गठन और विस्तार के फैसले लिए गए हैं, उन्हें देखकर खुद को कांग्रेसी कहने में शर्म महसूस होती है। उनका यह बयान कांग्रेस के भीतर गहरे असंतोष और नेतृत्व के प्रति बढ़ती नाराजगी को दर्शाता है।


टी.बी. जयचंद्र ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग भी इस फैसले से निराश हैं और कई लोगों ने उनसे विधायक पद से इस्तीफा देने तक की सलाह दी है। हालांकि उन्होंने तत्काल किसी निर्णय की घोषणा नहीं की, लेकिन यह संकेत जरूर दिया कि आगे की रणनीति पर जल्द विचार किया जाएगा।


बेंगलूरु स्थित टी.बी. जयचंद्र के आवास पर आयोजित बैठक में छह बार के विधायक सी.एस. नाडागौड़ा और सात बार के विधायक एन.वाई. गोपालकृष्ण सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक के दौरान नेताओं ने मंत्रिमंडल विस्तार की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री चयन में किसी स्पष्ट मापदंड का पालन नहीं किया गया। बैठक में शामिल नेताओं का कहना था कि वर्षों तक पार्टी के लिए काम करने वाले अनुभवी नेताओं की अनदेखी कर ऐसे लोगों को मंत्री बनाया गया, जिनकी योग्यता और अनुभव पर कई विधायक सवाल उठा रहे हैं। इससे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं में निराशा का माहौल है।


टी.बी. जयचंद्र ने कहा कि मंत्री बनने वालों की सूची देखकर कई विधायक हैरान रह गए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन आधारों पर मंत्रियों का चयन किया गया। उनके अनुसार यदि वरिष्ठता, संगठन के प्रति योगदान और जनाधार को महत्व नहीं दिया जाएगा तो पार्टी के भीतर असंतोष स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि विधायक आपस में लगातार चर्चा कर रहे हैं और आने वाले दिनों में सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तय की जाएगी। इससे स्पष्ट है कि नाराज नेताओं का समूह फिलहाल अपनी राजनीतिक दिशा पर विचार कर रहा है।


किसी भी राजनीतिक दल में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान असंतोष सामान्य माना जाता है, लेकिन जब कई बार विधायक रह चुके वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से नेतृत्व पर सवाल उठाने लगें तो यह पार्टी के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। विशेष रूप से तब, जब असंतोष केवल व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित न रहकर समूह के रूप में सामने आए। यदि पार्टी नेतृत्व समय रहते नाराज नेताओं से संवाद स्थापित नहीं करता, तो इसका असर संगठनात्मक एकता और सरकार की कार्यशैली दोनों पर पड़ सकता है। विपक्ष भी ऐसे मुद्दों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा।


बैठक के दौरान कुछ नेताओं द्वारा अपने पदों से इस्तीफा देने की चेतावनी दिए जाने से राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। हालांकि अभी किसी विधायक ने औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन इस तरह की चेतावनी पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाने की रणनीति मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतोष को जल्द नहीं संभाला गया, तो इसका असर सरकार की छवि और पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर पड़ सकता है।


फिलहाल कर्नाटक कांग्रेस की निगाहें उन बैठकों और निर्णयों पर टिकी हैं, जिनका संकेत टी.बी. जयचंद्र और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने दिया है। आने वाले दिनों में यदि पार्टी नेतृत्व नाराज नेताओं से बातचीत कर समाधान निकालता है तो स्थिति सामान्य हो सकती है। लेकिन यदि मतभेद और बढ़ते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप भी ले सकता है। स्पष्ट है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद शुरू हुआ यह विवाद केवल मंत्री पद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पार्टी के भीतर नेतृत्व, पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर भी गंभीर बहस का विषय बन चुका है।






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