झाबुआ जिले में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई ने मिठाई कारोबार में इस्तेमाल होने वाले घटिया और असुरक्षित विकल्पों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। काकनवानी और थांदला क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा एवं नापतौल विभाग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान थांदला के चैनपुरी रोड स्थित एक मिठाई निर्माण इकाई में पामोलिन तेल से मावा तैयार किए जाने का मामला सामने आया। जांच के दौरान मौके से 792 किलो मावा और 75 किलो पामोलिन तेल जब्त किया गया। प्रशासन ने निर्माण इकाई को सील कर दिया है और संबंधित फर्म का खाद्य पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की है।
मावा भारतीय मिठाइयों का प्रमुख आधार है। पेड़ा, बर्फी, गुलाब जामुन, कलाकंद, मिल्क केक और कई अन्य मिठाइयों में इसका व्यापक इस्तेमाल होता है। ऐसे में मावे की गुणवत्ता सीधे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। परंपरागत रूप से दूध को लंबे समय तक गर्म करके तैयार किए जाने वाले मावे की जगह यदि सस्ते वनस्पति तेल या अन्य वसा का इस्तेमाल किया जाए तो यह न केवल खाद्य मानकों का उल्लंघन हो सकता है, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ धोखा भी है। थांदला में हुई कार्रवाई इसी चिंता को सामने लाती है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को पामोलिन तेल से मावा तैयार किए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद मौके पर मौजूद तैयार मावा और पामोलिन तेल को जब्त कर लिया गया है।
कार्रवाई के दौरान 792 किलो मावा जब्त किया जाना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। इतनी बड़ी मात्रा में तैयार मावा बाजार में पहुंचने की स्थिति में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक यह उत्पाद पहुंच सकता था। अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई करते हुए इसे जब्त कर आगे की जांच का रास्ता साफ किया। इसके साथ ही 75 किलो पामोलिन तेल भी जब्त किया गया। यह बरामदगी इस बात का महत्वपूर्ण आधार बनी कि निर्माण प्रक्रिया में किस प्रकार की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था।
मिठाई कारोबार का सीधा संबंध लोगों के खान-पान और स्वास्थ्य से है। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और पारिवारिक समारोहों के दौरान मिठाइयों की मांग काफी बढ़ जाती है। इस दौरान मांग पूरी करने के लिए यदि कुछ कारोबारी लागत कम करने के उद्देश्य से गुणवत्ता से समझौता करते हैं तो उसका नुकसान उपभोक्ताओं को उठाना पड़ सकता है। मावा बनाने में दूध की जगह किसी अन्य सामग्री का इस्तेमाल करने से उत्पाद की वास्तविक प्रकृति बदल जाती है। उपभोक्ता सामान्यतः मिठाई खरीदते समय यह मानकर चलता है कि उसमें निर्धारित खाद्य सामग्री का ही उपयोग किया गया है। इसलिए खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित मानकों के अनुरूप ही सामग्री का इस्तेमाल करे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मिठाई निर्माण इकाई को सील कर दिया। साथ ही संबंधित फर्म का खाद्य पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई भी शुरू की गई है। यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्ती बरतने के मूड में है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ऐसी कार्रवाई केवल एक इकाई पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके माध्यम से पूरे खाद्य कारोबार को यह संदेश जाता है कि उत्पादन, भंडारण और बिक्री में निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है।
मिलावट रोकने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं है। उपभोक्ताओं को भी जागरूक रहना होगा। मिठाई खरीदते समय प्रतिष्ठित और विश्वसनीय दुकानों को प्राथमिकता देना, असामान्य स्वाद या गंध वाली मिठाइयों से बचना तथा संदेह होने पर संबंधित विभाग को सूचना देना उपयोगी कदम हो सकता है।
झाबुआ की यह कार्रवाई बताती है कि खाद्य पदार्थों की नियमित जांच कितनी जरूरी है। विशेषकर मावा और उससे बनने वाली मिठाइयों की बिक्री के मौसम में निरीक्षण बढ़ाने से मिलावट पर अंकुश लगाया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग को उत्पादन इकाइयों के साथ-साथ बाजार में बिक रहे मावे और मिठाइयों के नमूने भी नियमित रूप से लेने चाहिए। पामोलिन से तैयार किए जा रहे 792 किलो मावे की जब्ती केवल एक कार्रवाई नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा के प्रति चेतावनी है। मिठाई की मिठास तभी सार्थक है, जब उसमें शुद्धता और उपभोक्ता के स्वास्थ्य की चिंता भी शामिल हो। प्रशासन की सख्ती, कारोबारियों की जिम्मेदारी और उपभोक्ताओं की जागरूकता मिलकर ही मिलावट के कारोबार पर प्रभावी रोक लगा सकती है।

