कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से मंगलवार को बड़ा झटका लगा। अदालत ने उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि के मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद निचली अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही जारी रहेगी। यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई उनकी चर्चित ‘चौकीदार...’ टिप्पणी से जुड़ा है।
यह विवाद उस समय का है, जब आम चुनाव 2019 के दौरान राफेल विमान सौदे को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज थी। इसी दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ‘चौकीदार...’ टिप्पणी की थी। उनके इस बयान को लेकर भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीमाल ने आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर निचली अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने इस समन और पूरी कार्यवाही को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए मामले को रद्द करने की मांग की थी।
हाईकोर्ट में राहुल गांधी की ओर से मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया कि संबंधित टिप्पणी में उन्होंने शिकायतकर्ता महेश श्रीमाल या किसी विशिष्ट व्यक्ति का नाम नहीं लिया था। ऐसे में किसी स्पष्ट व्यक्ति को मानहानि का पीड़ित नहीं माना जा सकता। राहुल की ओर से यह भी दलील दी गई कि यदि किसी बयान में किसी निश्चित व्यक्ति की पहचान ही नहीं होती, तो उसके आधार पर आपराधिक मानहानि का मुकदमा चलाना उचित नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने निचली अदालत की कार्यवाही को समाप्त करने की मांग की थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने राहुल गांधी की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि भाजपा एक पहचान योग्य निकाय है। अदालत के सामने यह सवाल भी महत्वपूर्ण था कि राहुल गांधी की टिप्पणी केवल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक सीमित थी या उसका दायरा पार्टी के अन्य सदस्यों और कार्यकर्ताओं तक भी जाता था। पीठ ने माना कि बयान की वास्तविक प्रकृति और उसका प्रभाव मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही स्पष्ट हो सकेगा। इसलिए इस स्तर पर आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को पूरी तरह समाप्त करना उचित नहीं होगा।
अदालत ने संकेत दिया कि किसी बयान से वास्तव में शिकायतकर्ता की मानहानि हुई या नहीं, यह तथ्यात्मक प्रश्न है। इसका निर्णय प्रारंभिक स्तर पर नहीं बल्कि विचारण यानी ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। यही वजह है कि हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत में चल रहे मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। इसका अर्थ यह है कि अब मामले की आगे की सुनवाई निचली अदालत में जारी रह सकती है।
राहुल गांधी के खिलाफ यह मामला राजनीतिक भाषणों और आपराधिक मानहानि कानून के बीच संबंध को लेकर भी महत्वपूर्ण है। चुनावी राजनीति में नेता अक्सर विपक्षी दलों और उनके नेताओं पर तीखे हमले करते हैं। लेकिन जब किसी बयान को किसी व्यक्ति या पहचान योग्य समूह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला माना जाता है, तो उसके कानूनी परिणाम भी सामने आ सकते हैं। इस मामले में भी अदालत को यह देखना होगा कि संबंधित टिप्पणी का वास्तविक आशय क्या था, उसका लक्ष्य कौन था और क्या शिकायतकर्ता स्वयं उस टिप्पणी से मानहानि का कानूनी आधार स्थापित कर सकता है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद राहुल गांधी को निचली अदालत में इस मामले का सामना करना होगा। वहां शिकायतकर्ता को अपने आरोपों के समर्थन में आवश्यक तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। वहीं राहुल गांधी के पास भी अपने बचाव में कानूनी दलीलें रखने का अवसर रहेगा। फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल इस आधार पर कि बयान में किसी व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, मानहानि के मामले को प्रारंभिक स्तर पर स्वतः समाप्त नहीं किया जा सकता। बयान का दायरा, उसकी पहचान और उससे हुई कथित क्षति जैसे सवालों का अंतिम निर्धारण अब विचारण के दौरान होगा। इस फैसले से राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया फिलहाल जारी रहेगी और 2019 के चुनावी बयान से शुरू हुआ यह विवाद अब निचली अदालत में आगे बढ़ेगा।

