समाज की कड़वी सच्चाई दिखाता है - फिल्म ‘बंदर’

Jitendra Kumar Sinha
0

 


सिनेमा की दुनिया में चमक-दमक के पीछे छिपी मानवीय कमजोरियों, सामाजिक दबाव और मीडिया के प्रभाव को पर्दे पर उतारने वाली थ्रिलर ड्रामा फिल्म ‘बंदर’ एक ऐसे व्यक्ति की कहानी पेश करती है, जिसकी जिंदगी एक गंभीर आरोप के बाद पूरी तरह बदल जाती है। फिल्म का निर्देशन चर्चित फिल्मकार अनुराग कश्यप ने किया है। फिल्म में बॉबी देओल मुख्य भूमिका में हैं, जबकि उनके साथ सान्या मल्होत्रा, इंद्रजीत सुकुमारन, सपना पब्बी, सबा आजाद, राज बी. शेट्टी और जितेंद्र जोशी जैसे कलाकार नजर आएंगे।


‘बंदर’ की कहानी 50 वर्षीय पूर्व टीवी और पॉप स्टार समर मेहरा के इर्द-गिर्द घूमती है। कभी लोकप्रियता के शिखर पर रहा समर अब अपने ढलते करियर और बदलती परिस्थितियों से जूझ रहा है। उम्र बढ़ने के साथ मनोरंजन जगत में उसकी चमक कम हो चुकी है और वह अपने अतीत की लोकप्रियता के सहारे वर्तमान में जगह बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उसकी जिंदगी में उस समय भूचाल आ जाता है, जब एक महिला उस पर एक गंभीर अपराध का आरोप लगा देती है। आरोप सामने आते ही समर की निजी जिंदगी, सामाजिक प्रतिष्ठा और पेशेवर पहचान सब कुछ सवालों के घेरे में आ जाता है।


किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगने के बाद समाज का रवैया कितनी तेजी से बदल सकता है, फिल्म इसी सवाल को प्रमुखता से उठाती है। समर के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि लोगों की बदलती धारणा भी है। जो व्यक्ति कभी प्रशंसकों की भीड़ से घिरा रहता था, वही अचानक शक और आलोचना के घेरे में आ जाता है। सोशल और पारंपरिक मीडिया की छानबीन उसके जीवन को और कठिन बना देती है। अदालत में फैसला आने से पहले ही समाज अपनी राय बना लेता है। ऐसे में समर के सामने खुद को निर्दोष साबित करने के साथ-साथ अपनी सामाजिक पहचान बचाने की चुनौती भी खड़ी हो जाती है।


‘बंदर’ का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष मीडिया ट्रायल और न्यायिक प्रक्रिया के बीच का अंतर है। किसी मामले में आरोप लगना और अपराध साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति के मामले में यह अंतर अक्सर धुंधला पड़ जाता है। फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि खबरों, चर्चाओं और सामाजिक प्रतिक्रियाओं के बीच किसी व्यक्ति की छवि किस तरह प्रभावित हो सकती है। जनता की राय कई बार कानूनी प्रक्रिया से पहले ही अपना फैसला सुना देती है। समर की कहानी इसी दबाव और उसके परिणामों को सामने लाती है।


समर मेहरा का किरदार बॉबी देओल के लिए अभिनय की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाना, जो कभी स्टार रहा हो और अब उम्र, असफलता तथा गंभीर आरोपों के दबाव में अपनी पहचान बचाने की कोशिश कर रहा हो, कई भावनात्मक स्तरों की मांग करता है। समर के भीतर का डर, असुरक्षा, गुस्सा, अकेलापन और खुद को सही साबित करने की बेचैनी कहानी को मानवीय आयाम दे सकती है। बॉबी देओल के अभिनय से इस किरदार में एक गहराई देखने की उम्मीद की जा रही है।


फिल्म में बॉबी देओल के साथ सान्या मल्होत्रा, इंद्रजीत सुकुमारन, सपना पब्बी, सबा आजाद, राज बी. शेट्टी और जितेंद्र जोशी सहित कई प्रतिभाशाली कलाकार शामिल हैं। अलग-अलग पृष्ठभूमि के इन कलाकारों की मौजूदगी फिल्म की कहानी को और प्रभावशाली बनाने की संभावना रखती है।


निर्देशक अनुराग कश्यप अपनी फिल्मों में अक्सर जटिल किरदारों और समाज के असहज पहलुओं को सामने लाने के लिए जाने जाते हैं। ‘बंदर’ भी अपराध, आरोप, प्रतिष्ठा, मीडिया और सामाजिक पूर्वाग्रह जैसे संवेदनशील विषयों को थ्रिलर ड्रामा के माध्यम से पेश करती है। फिल्म का आकर्षण केवल यह जानने में नहीं है कि समर पर लगे आरोपों की सच्चाई क्या है, बल्कि इस बात में भी है कि आरोप लगने के बाद एक व्यक्ति किस तरह सामाजिक और मानसिक दबाव से गुजरता है।


‘बंदर’ दर्शकों के सामने एक अहम सवाल रखती है कि क्या किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगते ही समाज को उसे दोषी मान लेना चाहिए? फिल्म कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सामाजिक सोच पर भी सवाल उठाती है। समर मेहरा की कहानी इसलिए दिलचस्प बनती है क्योंकि इसमें अपराध की जांच के साथ प्रतिष्ठा, पूर्वाग्रह और सार्वजनिक धारणा की भी पड़ताल है। यही पहलू ‘बंदर’ को एक सामान्य थ्रिलर से आगे ले जाकर सामाजिक सरोकार वाली फिल्म बना सकता है।


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top