सोने के गहनों की हॉलमार्किंग फीस बढ़ी

Jitendra Kumar Sinha
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त्योहारों और लगन के मौसम से पहले सोने के आभूषण खरीदने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस में बढ़ोतरी की है। संशोधित प्रावधानों के तहत अब सोने के प्रत्येक आभूषण की हॉलमार्किंग के लिए 75 रुपये शुल्क देना होगा। पहले यह शुल्क 45 रुपये प्रति आभूषण था। यानि प्रति आभूषण शुल्क में 30 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इस वृद्धि को प्रतिशत के हिसाब से देखें तो हॉलमार्किंग शुल्क में करीब 66.7 फीसदी की वृद्धि हुई है। त्योहारों के साथ ही देश में विवाह और अन्य शुभ अवसरों का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में सोने के आभूषणों की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद रहती है। शुल्क में यह बदलाव ज्वेलर्स और ग्राहकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


सोने के आभूषणों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए हॉलमार्किंग व्यवस्था लागू की गई है। हॉलमार्क उपभोक्ता को यह जानने में मदद करता है कि खरीदा गया आभूषण निर्धारित मानकों के अनुरूप है। सोना खरीदते समय ग्राहक के लिए केवल डिजाइन, वजन और कीमत ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि सोने की शुद्धता की जानकारी भी उतनी ही जरूरी होती है। हॉलमार्किंग व्यवस्था का उद्देश्य आभूषणों की गुणवत्ता और शुद्धता के संबंध में उपभोक्ताओं के भरोसे को मजबूत करना है। खासकर ऐसे समय में जब सोने की कीमत काफी अधिक हो, शुद्धता की सही जानकारी ग्राहक के आर्थिक हितों से सीधे जुड़ जाती है।


नई दर के अनुसार अब प्रत्येक सोने के आभूषण पर 75 रुपये हॉलमार्किंग शुल्क लगेगा। पहले इसके लिए 45 रुपये शुल्क निर्धारित था। इस प्रकार प्रत्येक आभूषण पर 30 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी खेप में 10 सोने के आभूषण हैं तो पहले हॉलमार्किंग शुल्क 450 रुपये होता था। संशोधित दर के बाद यही शुल्क 750 रुपये हो जाएगा। यानी 10 आभूषणों पर कुल 300 रुपये अतिरिक्त शुल्क का अंतर आएगा। इसी तरह आभूषणों की संख्या बढ़ने के साथ कुल हॉलमार्किंग शुल्क भी बढ़ेगा। हालांकि, यह अतिरिक्त शुल्क सीधे तौर पर ग्राहक से किस रूप में वसूला जाएगा, यह ज्वेलर की बिलिंग और अन्य लागत संरचना पर निर्भर करेगा। इसलिए ग्राहकों के लिए खरीदारी के समय बिल में शुल्क और अन्य मदों की जानकारी देखना उपयोगी रहेगा।


जहां सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस बढ़ाई गई है, वहीं चांदी के गहनों के मामले में कोई बदलाव नहीं किया गया है। चांदी के प्रत्येक आभूषण की हॉलमार्किंग फीस 35 रुपये प्रति आभूषण ही रहेगी। इससे चांदी के आभूषणों के कारोबार पर हॉलमार्किंग शुल्क बढ़ने का अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ेगा। चांदी के आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए भी इस मद में कोई नया वित्तीय बोझ नहीं जुड़ा है।


संशोधित व्यवस्था में केवल प्रति आभूषण शुल्क ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि खेप के लिए न्यूनतम शुल्क भी निर्धारित किया गया है। सोने की खेप के लिए न्यूनतम हॉलमार्किंग शुल्क 200 रुपये रखा गया है। वहीं, चांदी की खेप के लिए न्यूनतम शुल्क 150 रुपये निर्धारित है। इस व्यवस्था का संबंध ज्वेलर्स द्वारा हॉलमार्किंग केंद्रों पर भेजी जाने वाली आभूषणों की खेप से है। छोटे और बड़े कारोबारियों के लिए न्यूनतम शुल्क की यह व्यवस्था हॉलमार्किंग प्रक्रिया की लागत को निर्धारित करने में भूमिका निभाएगी।


भारत में त्योहारों और विवाह के मौसम में सोने के आभूषणों की मांग पारंपरिक रूप से बढ़ती है। धनतेरस, दीपावली और विवाह समारोहों के दौरान बड़ी संख्या में लोग सोने के आभूषण खरीदते हैं। ऐसे समय में हॉलमार्किंग शुल्क में हुआ बदलाव ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। ग्राहकों के लिए संदेश स्पष्ट है कि सोना खरीदते समय केवल बाजार भाव पर ही ध्यान न दें, बल्कि आभूषण की शुद्धता, हॉलमार्क और बिल में दर्ज सभी शुल्कों की जानकारी भी जरूर जांचें। वहीं, ज्वेलर्स के लिए संशोधित शुल्क को अपनी लागत और मूल्य निर्धारण व्यवस्था में शामिल करना आवश्यक होगा।


सोना भारतीय परिवारों के लिए केवल आभूषण नहीं, बल्कि बचत, परंपरा और सामाजिक-सांस्कृतिक अवसरों से जुड़ा महत्वपूर्ण संपत्ति माध्यम भी है। ऐसे में हॉलमार्किंग व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है। शुल्क में वृद्धि ग्राहक और कारोबारी दोनों के लिए चर्चा का विषय हो सकती है, लेकिन हॉलमार्किंग का मूल उद्देश्य आभूषण की शुद्धता को प्रमाणित करना और उपभोक्ता के विश्वास को मजबूत करना है। त्योहार और लगन के मौसम में जब बाजार में सोने की खरीदारी बढ़ेगी, तब ग्राहकों के लिए जागरूक होकर खरीदारी करना अधिक महत्वपूर्ण होगा। शुल्क बढ़ा है, लेकिन सोने की खरीद में सावधानी और शुद्धता की जांच का महत्व उससे कहीं अधिक है।


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