समुद्र केवल देशों को जोड़ने वाला जलमार्ग नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार, अर्थव्यवस्था और संपर्क की जीवनरेखा भी है। दुनिया के एक बड़े हिस्से का व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में वे लाखों नाविक हैं, जो महीनों तक समुद्र में रहकर जहाजों का संचालन करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, सम्मान और कल्याण का प्रश्न अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। इसी दिशा में भारत और लाइबेरिया ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जहाजरानी और नाविकों की सुरक्षा को लेकर ‘मित्र समूह’ स्थापित करने की घोषणा की है। यह घोषणा जहाजरानी और नाविकों की सुरक्षा के लिए मित्र समूह की मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान की गई। इस पहल का उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना, नाविकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर साझा प्रयासों को आगे बढ़ाना और सुरक्षित तथा सुचारु समुद्री परिवहन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।
आज समुद्री परिवहन के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। समुद्री दुर्घटनाएं, खराब मौसम, समुद्री डकैती, जहाजों पर तकनीकी जोखिम और आपात परिस्थितियां नाविकों के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा लंबे समय तक परिवार से दूर रहकर समुद्र में काम करने वाले नाविकों के स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और कामकाजी परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे समय में अलग-अलग देशों के बीच सूचनाओं, अनुभवों और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। भारत और लाइबेरिया की नई पहल इसी व्यापक सोच का हिस्सा मानी जा सकती है। ‘मित्र समूह’ के माध्यम से समुद्री सुरक्षा से जुड़े विषयों पर देशों के बीच संवाद और सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।
भारत का समुद्र से संबंध हजारों वर्ष पुराना है। प्राचीन काल से ही भारतीय व्यापारी समुद्री मार्गों के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े रहे हैं। आधुनिक भारत में भी समुद्री परिवहन देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। भारत के विशाल समुद्री तट, प्रमुख बंदरगाहों और बड़ी संख्या में समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों के कारण वैश्विक जहाजरानी व्यवस्था में देश की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारतीय नाविक दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चलने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर अपनी सेवाएं देते हैं। इसलिए नाविकों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयास भारत के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
पश्चिमी अफ्रीका में स्थित लाइबेरिया का समुद्री क्षेत्र से विशेष संबंध है। अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी में लाइबेरिया का नाम उसके बड़े जहाज रजिस्ट्रेशन नेटवर्क के कारण महत्वपूर्ण है। दुनिया के अनेक वाणिज्यिक जहाज लाइबेरिया के झंडे के तहत पंजीकृत हैं। ऐसे में जहाजों की सुरक्षा और नाविकों से जुड़े विषयों पर लाइबेरिया की सक्रिय भागीदारी अंतरराष्ट्रीय समुद्री समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है। भारत और लाइबेरिया जैसे देशों का एक मंच पर आना इस बात को रेखांकित करता है कि समुद्री सुरक्षा किसी एक देश की चिंता नहीं है, बल्कि वैश्विक जिम्मेदारी है।
जब किसी बंदरगाह पर माल से लदा विशाल जहाज पहुंचता है, तो उसके पीछे हजारों किलोमीटर की समुद्री यात्रा और अनेक नाविकों की मेहनत होती है। ये नाविक प्रतिकूल मौसम, लंबे समुद्री सफर और कठिन परिस्थितियों के बीच वैश्विक आपूर्ति शृंखला को गतिशील बनाए रखते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी नाविकों की भूमिका और उनकी कठिनाइयां सामने आई थीं। लंबे समय तक जहाजों पर फंसे रहने और घर वापस नहीं लौट पाने की परिस्थितियों ने यह स्पष्ट किया कि समुद्री परिवहन व्यवस्था में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा और मानवीय जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए ‘मित्र समूह’ जैसी पहल का महत्व केवल जहाजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में वे लोग भी हैं, जो समुद्र के रास्ते दुनिया की अर्थव्यवस्था को चलाने में योगदान देते हैं।
भारत-लाइबेरिया की इस पहल से समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में संवाद बढ़ने की संभावना है। अलग-अलग देशों के अनुभवों को साझा करने से दुर्घटनाओं की रोकथाम, आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया, नाविकों की सुरक्षा तथा समुद्री परिवहन को अधिक सुरक्षित बनाने के उपायों पर सहयोग का रास्ता खुल सकता है। समुद्र की कोई राजनीतिक सीमा नहीं होती। एक देश से दूसरे देश तक पहुंचने वाला जहाज अनेक समुद्री क्षेत्रों से गुजरता है। इसलिए जहाजरानी की सुरक्षा के लिए भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।
भारत और लाइबेरिया के बीच ‘मित्र समूह’ की स्थापना समुद्री क्षेत्र में सहयोग की एक नई संभावना खोलती है। यह पहल इस विचार को मजबूत करती है कि सुरक्षित समुद्र, सुरक्षित जहाज और सुरक्षित नाविक वैश्विक व्यापार की बुनियादी आवश्यकता है। आने वाले समय में यदि इस समूह के माध्यम से देश अनुभव, तकनीक, प्रशिक्षण और सुरक्षा उपायों को साझा करते हैं, तो इससे समुद्री क्षेत्र में व्यापक सहयोग को बल मिल सकता है। आखिरकार समुद्र किसी एक देश का नहीं है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी किसी एक राष्ट्र तक सीमित नहीं हो सकती। भारत और लाइबेरिया की यह पहल समुद्र के रास्ते केवल जहाजों की यात्रा को सुरक्षित बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि उन नाविकों के प्रति जिम्मेदारी का भी संकेत है, जिनकी मेहनत से दुनिया का व्यापार निरंतर आगे बढ़ता है।

