जन्माष्टमी पर बन रहे शुभ संयोग - 46 मिनट तक रहेगा पूजा का विशेष मुहूर्त

Jitendra Kumar Sinha
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भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी इस वर्ष श्रद्धा, भक्ति और विशेष ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाया जाएगा। भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि पर पड़ने वाली जन्माष्टमी को लेकर पटना के मठ-मंदिरों, ठाकुरबाड़ियों और कृष्ण मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार जन्माष्टमी का पर्व विशेष माना जा रहा है, क्योंकि अष्टमी तिथि के साथ शुक्रवार और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, इसलिए इस संयोग का विशेष महत्व माना जाता है।


जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पटना में इस वर्ष निशीथ पूजा का विशेष मुहूर्त रात 11:26 बजे से 12:11 बजे तक रहेगा। यानी श्रद्धालुओं को भगवान के जन्मोत्सव की पूजा के लिए कुल 46 मिनट का विशेष समय मिलेगा। इसी दौरान मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का विधिवत पूजन, अभिषेक और श्रृंगार किया जाएगा। मध्यरात्रि में शंख-घंटे की ध्वनि के बीच भगवान के जन्म की घोषणा होगी और श्रद्धालु जन्मोत्सव मनाएंगे।


ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार जन्माष्टमी पर भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी तिथि के साथ शुक्रवार और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। धार्मिक दृष्टि से यह संयोग काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अष्टमी तिथि, शुक्रवार और रोहिणी नक्षत्र के मेल से जयंती योग का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा व्रज योग, सर्वार्थ सिद्ध योग और सुकर्मा योग भी बनने की बात कही जा रही है। इन शुभ संयोगों के कारण इस बार जन्माष्टमी को विशेष फलदायी माना जा रहा है।


जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म तक उपवास रखते हैं। व्रत रखने वाले श्रद्धालु मध्यरात्रि में भगवान के जन्मोत्सव और पूजा के बाद भी व्रत जारी रखेंगे। उनका पारण 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद होगा। पटना में सूर्योदय का समय लगभग सुबह 5:31 बजे बताया गया है। व्रती श्रद्धालु सूर्योदय के बाद पूजा-अर्चना कर भगवान को भोग अर्पित करेंगे और इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत पूरा करेंगे। कई श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार के साथ व्रत का पालन करते हैं।


जन्माष्टमी की सबसे खास तस्वीर मध्यरात्रि में देखने को मिलती है। जैसे ही घड़ी में 12 बजते हैं, मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घोषणा की जाती है। इसके साथ ही शंख, घंटियां और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। पटना के विभिन्न मठ-मंदिरों और ठाकुरबाड़ियों में भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा, अभिषेक और महाआरती की तैयारी की जा रही है। जन्म के समय बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक कर उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाए जाएंगे। इसके बाद विशेष भोग लगाया जाएगा।


जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में सजावट का काम भी तेज हो गया है। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आकर्षक झांकियां सजाई जाएंगी। कहीं पालना सजाया जाएगा तो कहीं कृष्ण जन्म की कथा को झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों में विशेष दर्शन और पूजा की व्यवस्था की जाएगी। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। रात में होने वाली महाआरती जन्माष्टमी समारोह का मुख्य आकर्षण होगी।


जन्माष्टमी के अगले दिन 5 सितंबर, शनिवार को दही-हांडी का आयोजन होगा। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी माखन चोरी की लीलाओं से जुड़ा यह आयोजन उत्साह और उमंग का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान युवा और बच्चों की टोलियां दही-हांडी फोड़ने का प्रयास करेंगी। धार्मिक आयोजन के साथ-साथ यह पर्व सामाजिक मेलजोल और सामूहिक उत्सव की भावना को भी मजबूत करता है। इस बार जन्माष्टमी पर बनने वाले शुभ संयोग, मध्यरात्रि का विशेष पूजा मुहूर्त और मंदिरों में होने वाले भव्य आयोजन इसे श्रद्धालुओं के लिए खास बना रहे हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय होने वाली महाआरती और जयकारों से पटना का वातावरण आधी रात को पूरी तरह कृष्णमय नजर आएगा।


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