अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक फैसले ने भारत-अमेरिका संबंधों के बीच एक नया संवेदनशील मुद्दा खड़ा कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए उन देशों की सूची निर्धारित की है जिन्हें प्रमुख ड्रग ट्रांजिट देश अथवा अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन से जुड़े देशों के रूप में चिन्हित किया गया है। इस सूची में भारत को भी शामिल किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से यह सूची Foreign Relations Authorization Act की धारा 706(1) के तहत अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष प्रस्तुत की गई है। कुल 23 देशों को इस श्रेणी में रखा गया है। भारत के साथ पाकिस्तान, चीन, पनामा, वेनेजुएला, जमैका, बोलीविया, अफगानिस्तान, ग्वाटेमाला और मैक्सिको जैसे देशों के नाम भी सूची में शामिल है।
यह समझना जरूरी है कि किसी देश का इस सूची में शामिल होना अपने आप में यह प्रमाणित नहीं करता कि वहां की सरकार मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल है। अमेरिकी कानून के तहत ऐसी सूची का उद्देश्य उन देशों की पहचान करना है जिनके क्षेत्र का इस्तेमाल अवैध ड्रग्स के उत्पादन, परिवहन या तस्करी के रास्ते के रूप में किया जाता है अथवा जहां इस समस्या को लेकर अमेरिकी प्रशासन विशेष चिंता व्यक्त करता है। इसलिए भारत का नाम सामने आने के बाद इस फैसले को सीधे तौर पर भारत सरकार के खिलाफ आरोप के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। सूची में शामिल किए गए देशों की परिस्थितियां और वहां मादक पदार्थों की समस्या की प्रकृति अलग-अलग हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कई संबंधित सरकारों ने ड्रग ट्रैफिकिंग और नार्कोटेररिज्म से निपटने के लिए कदम उठाए हैं। हालांकि अमेरिकी प्रशासन के अनुसार अभी इन देशों में इस दिशा में और प्रभावी तथा कठोर कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है। अमेरिका लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखता रहा है। विशेष रूप से सिंथेटिक ड्रग्स, कोकीन, हेरोइन और अन्य मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी को रोकना अमेरिकी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत दुनिया के प्रमुख दवा निर्माण केंद्रों में से एक है और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि वह दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया के बीच महत्वपूर्ण संपर्क क्षेत्र में आता है। भारत के आसपास के क्षेत्र में अफगानिस्तान से जुड़े अवैध नशीले पदार्थों के नेटवर्क तथा समुद्री और स्थल मार्गों से होने वाली तस्करी की चुनौती लंबे समय से मौजूद रही है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त करने और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करने की जानकारी देती रही हैं। ऐसे में अमेरिकी सूची में भारत का नाम आने से दोनों देशों के बीच नारकोटिक्स नियंत्रण और कानून प्रवर्तन सहयोग का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो सकता है।
भारत और अमेरिका के संबंध पिछले वर्षों में रक्षा, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित अनेक विषयों पर व्यापक हुए हैं। ऐसे में ड्रग तस्करी से संबंधित अमेरिकी सूची में भारत का नाम आना निश्चित रूप से एक ऐसा मुद्दा है जिस पर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच संवाद की जरूरत होगी। हालांकि इस सूची को दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों से अलग संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। किसी अमेरिकी प्रशासन की वैधानिक सूची में शामिल होना और किसी देश के साथ अमेरिकी संबंधों की समग्र दिशा एक ही बात नहीं है।
मादक पदार्थों की तस्करी आज किसी एक देश की समस्या नहीं रह गई है। तस्कर नेटवर्क सीमाओं, समुद्री मार्गों और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान, वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई, सीमा निगरानी और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग जरूरी है। अमेरिका की 23 देशों वाली सूची में भारत का शामिल होना इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है। अब यह देखना अहम होगा कि भारत इस अमेरिकी आकलन पर क्या प्रतिक्रिया देता है और दोनों देश ड्रग तस्करी तथा नार्कोटेररिज्म के खिलाफ सहयोग को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

