पटना में फुटपाथ कारोबार को मिलेगा ठिकाना - 15 जगहों पर बनेंगे वेंडिंग जोन

Jitendra Kumar Sinha
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राजधानी पटना में सड़क किनारे और फुटपाथ पर कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडरों को व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में 15 स्थानों पर वेंडिंग जोन विकसित किए जाएंगे। इन वेंडिंग जोन का उद्देश्य फुटपाथ और सड़कों पर अनियंत्रित ढंग से लगने वाली दुकानों को एक निर्धारित जगह उपलब्ध कराना, यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाना और आम लोगों के लिए आवागमन को आसान बनाना है। शहर में बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार, ठेला चालक, फल-सब्जी विक्रेता, खाद्य पदार्थ बेचने वाले और अन्य स्ट्रीट वेंडर सड़क किनारे कारोबार करते हैं। इनके लिए स्थायी या निर्धारित स्थान नहीं होने के कारण अक्सर सड़क और फुटपाथ का बड़ा हिस्सा अतिक्रमित हो जाता है। इससे पैदल चलने वालों को परेशानी होती है और कई प्रमुख इलाकों में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है। ऐसे में वेंडिंग जोन की व्यवस्था को शहर के लिए एक संतुलित समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।


प्रस्तावित वेंडिंग जोन के लिए शहर के प्रमुख और व्यस्त इलाकों का चयन किया गया है। इनमें मछली बाजार, अंटा घाट, बोरिंग रोड चौराहा से राजापुर पुल तक, राजापुर, शेखपुरा मोड़, बेऊर मोड़, फिश मार्केट टेंपो स्टैंड, मुसल्लहपुर हाट, प्रेमचंद्र गोलंबर, बहादुरपुर, एनआइटी मोड़, डंका इमली, गायघाट, मीना बाजार और सती चौराहा के पास के क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर वेंडरों को निर्धारित जगह मिलने से कारोबार करने वालों को भी बार-बार हटाए जाने या सड़क किनारे अस्थायी दुकान लगाने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, प्रशासन के लिए भी इन क्षेत्रों में निगरानी और व्यवस्था बनाए रखना आसान होगा।


पटना जैसे तेजी से फैलते शहर में फुटपाथ पर कारोबार एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक वास्तविकता है। हजारों परिवार छोटे स्तर के कारोबार पर निर्भर हैं। सड़क किनारे फल, सब्जी, चाय, नाश्ता, कपड़े, घरेलू सामान और अन्य वस्तुओं की बिक्री से उन्हें रोजगार मिलता है। दूसरी ओर, जब यही दुकानें बिना किसी निर्धारित व्यवस्था के सड़क और फुटपाथ पर फैल जाती हैं तो यातायात और पैदल यात्रियों के लिए परेशानी पैदा होती है। वेंडिंग जोन की अवधारणा इसी विरोधाभास को दूर करने की कोशिश है। यदि दुकानदारों को कारोबार के लिए सुविधाजनक और निर्धारित जगह मिलती है तो ‘रोजगार बनाम अतिक्रमण’ की समस्या का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है।


पटना के कई प्रमुख चौराहों और बाजार क्षेत्रों में सड़क किनारे दुकानें लगने के कारण सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम हो जाती है। इसके कारण वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है और पीक आवर में जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है। कई जगह पैदल यात्रियों को भी सड़क पर चलना पड़ता है। वेंडिंग जोन बनने के बाद यदि दुकानों को निर्धारित सीमा में रखा जाता है तो मुख्य सड़क और फुटपाथ का उपयोग अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा। इससे यातायात प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। हालांकि इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब वेंडिंग जोन के बाहर दोबारा अवैध तरीके से दुकानें न लगने दी जाएं।


सिर्फ जगह निर्धारित कर देना पर्याप्त नहीं होगा। वेंडिंग जोन में दुकानदारों के लिए बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी जरूरी होगी। पेयजल, प्रकाश, साफ-सफाई, कूड़ा निस्तारण, शौचालय और सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से वेंडिंग जोन अधिक उपयोगी और टिकाऊ बन सकेंगे। इसके अलावा दुकानदारों की पहचान, स्थान आवंटन और दुकान लगाने की सीमा स्पष्ट होनी चाहिए। इससे एक ही जगह पर अधिक लोगों के कब्जे या मनमाने तरीके से जगह घेरने की समस्या को रोका जा सकेगा।


वेंडिंग जोन केवल यातायात सुधार की योजना नहीं है, बल्कि यह शहर की तस्वीर बदलने का माध्यम भी बन सकता है। यदि बाजार क्षेत्रों में दुकानों का स्वरूप एकरूप और व्यवस्थित हो, पैदल चलने के लिए पर्याप्त स्थान हो तथा साफ-सफाई नियमित रहे तो शहर अधिक आकर्षक दिखाई देगा। पटना में इन 15 स्थानों पर प्रस्तावित वेंडिंग जोन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। इससे एक तरफ स्ट्रीट वेंडरों को सम्मानजनक और निश्चित स्थान मिल सकता है, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिकों को बेहतर फुटपाथ और सुगम यातायात की सुविधा मिल सकती है।


वेंडिंग जोन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन, दुकानदारों और आम नागरिकों के हितों के बीच कितना बेहतर संतुलन बनाया जाता है। दुकानदारों को हटाना समाधान नहीं है और सड़कों को अतिक्रमण के लिए खुला छोड़ देना भी उचित नहीं। जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें वेंडरों को सम्मान के साथ रोजगार का स्थान मिले और शहर को अतिक्रमण व जाम से मुक्ति। पटना के 15 प्रस्तावित वेंडिंग जोन इस संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत साबित हो सकते हैं। यदि इनका संचालन पारदर्शी, नियमित और सुविधाजनक तरीके से किया गया, तो आने वाले समय में शहर के अन्य इलाकों में भी इसी मॉडल को विस्तार दिया जा सकता है।


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