पश्चिम बंगाल में सेवानिवृत्त पत्रकारों की पेंशन हुई दोगुनी

Jitendra Kumar Sinha
0

 


पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। अपने पेशेवर जीवन में पत्रकार समाज और शासन के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर काम करते हैं। समाचारों की खोज, जनसमस्याओं को सामने लाने और सत्ता से सवाल पूछने की जिम्मेदारी निभाने वाले इन कर्मियों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। इसी दिशा में पश्चिम बंगाल सरकार ने सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पत्रकारों को मिलने वाली मासिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन को दोगुना कर दिया है।


पश्चिम बंगाल सरकार ने सेवानिवृत्त पत्रकारों की मासिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 2,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। सरकार के इस फैसले से उन पत्रकारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने लंबे समय तक समाचार पत्रों, समाचार एजेंसियों, पत्रिकाओं और अन्य मीडिया संस्थानों में काम किया है और अब सेवानिवृत्ति के बाद सीमित आय के सहारे जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पेंशन में सौ प्रतिशत की वृद्धि ऐसे समय में हुई है, जब उम्र बढ़ने के साथ सेवानिवृत्त लोगों की दवाइयों, स्वास्थ्य जांच और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में अतिरिक्त आर्थिक सहायता उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।


सरकार के फैसले की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका दायरा केवल उन पत्रकारों तक सीमित नहीं रखा गया है, जिनके पास प्रेस मान्यता कार्ड है। पात्र डेस्क पत्रकारों और बिना प्रेस मान्यता कार्ड वाले मीडियाकर्मियों को भी इसका लाभ मिलेगा। मीडिया संस्थानों में डेस्क पर काम करने वाले पत्रकार समाचार संकलन, संपादन, शीर्षक लेखन और समाचार प्रस्तुति जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। वहीं, कई मीडियाकर्मी विभिन्न कारणों से सरकारी प्रेस मान्यता प्राप्त नहीं कर पाते। ऐसे पात्र कर्मियों को योजना के दायरे में शामिल करना पत्रकार समुदाय के बड़े हिस्से को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।


पेंशन बढ़ाने के साथ ही पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में भी कदम उठाया गया है। पत्रकारों को 'मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना' के तहत स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। इस योजना के माध्यम से पत्रकार और उनके परिजन देशभर में सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। योजना के तहत प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज का लाभ उपलब्ध होने की बात कही गई है। इसमें देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान भी शामिल हैं। पत्रकार और उनके परिवार के सदस्य एम्स, सीएमसी वेल्लोर और टाटा कैंसर अस्पताल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों सहित करीब 38,000 सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार करा सकेंगे।


स्वास्थ्य बीमा की सुविधा पत्रकार परिवारों के लिए विशेष महत्व रखती है। गंभीर बीमारी या अचानक अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। खासकर सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए महंगे इलाज का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा आर्थिक बोझ को काफी हद तक कम कर सकती है। गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए देश के बड़े अस्पतालों तक पहुंच मिलने से पत्रकारों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा विकल्प भी मिलेंगे।


सरकार का यह फैसला केवल पेंशन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पत्रकारों के योगदान को सामाजिक मान्यता देने के रूप में भी देखा जा सकता है। पत्रकार अपने कार्यकाल के दौरान अक्सर कठिन परिस्थितियों में रिपोर्टिंग करते हैं। प्राकृतिक आपदा, चुनाव, सामाजिक संघर्ष, अपराध और जनहित के मुद्दों पर काम करते हुए वे सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को समाज तक पहुंचाते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उनके लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना पत्रकार कल्याण की व्यापक अवधारणा का हिस्सा है।


पेंशन में दोगुनी वृद्धि और स्वास्थ्य बीमा की सुविधा को एक साथ देखा जाए तो यह पत्रकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार तैयार करने वाली पहल है। इससे सेवानिवृत्त पत्रकारों को नियमित आर्थिक सहायता मिलेगी, वहीं स्वास्थ्य संबंधी बड़े खर्च के समय बीमा सुरक्षा काम आएगी। मीडिया जगत में लंबे समय तक सेवा देने वाले पत्रकारों के लिए ऐसी योजनाएं उनके भविष्य को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद करती हैं। पश्चिम बंगाल सरकार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी पत्रकार कल्याण की नीतियों को मजबूत करने का एक उदाहरण बन सकता है। आर्थिक सहायता और बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा का यह संयोजन निश्चित रूप से पत्रकार समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में सामने आया है।


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top