नोटों पर चर्चिल की जगह अब दिखेंगे उल्लू और मधुमक्खियां

Jitendra Kumar Sinha
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किसी देश की मुद्रा केवल लेन-देन का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह उस देश के इतिहास, संस्कृति, राष्ट्रीय पहचान और गौरव का प्रतीक भी होती है। दुनिया के अनेक देशों के बैंक नोटों पर महान नेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों, वैज्ञानिकों, साहित्यकारों और ऐतिहासिक हस्तियों की तस्वीरें दिखाई देती हैं। लेकिन ब्रिटेन अब अपनी मुद्रा की पहचान को एक नया रूप देने जा रहा है। ब्रिटिश बैंक नोटों पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देश के प्रधानमंत्री रहे विंस्टन चर्चिल और अन्य ऐतिहासिक हस्तियों की जगह अब उल्लू, मधुमक्खियां, पफिन पक्षी और हेजहॉग जैसे वन्यजीव नजर आएंगे। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने इस बदलाव की घोषणा की है। इस फैसले के साथ ब्रिटेन की मुद्रा परंपरा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेगा। अब देश की ऐतिहासिक शख्सियतों के बजाय वहां की प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता को बैंक नोटों के माध्यम से प्रदर्शित करने की तैयारी है।


बैंक ऑफ इंग्लैंड के निर्णय के अनुसार, भविष्य में जारी होने वाले ब्रिटिश बैंक नोटों पर देश के मूल वन्यजीवों को स्थान दिया जाएगा। इसके लिए ऐसे जीवों का चयन किया गया है, जो ब्रिटेन के प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता की पहचान माने जाते हैं। प्रस्तावित तस्वीरों में बार्न आउल यानी खलिहान में रहने वाला उल्लू, भौंरे और मधुमक्खियां, पफिन पक्षी तथा हेजहॉग जैसे जीव शामिल हैं। अब तक बैंक नोटों पर प्रसिद्ध ऐतिहासिक व्यक्तियों की तस्वीरों को प्रमुखता दी जाती रही है। विंस्टन चर्चिल भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण शख्सियत हैं, जिनकी छवि ब्रिटेन के इतिहास में विशेष स्थान रखती है। द्वितीय विश्व युद्ध के कठिन दौर में उनके नेतृत्व को देश के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में याद किया जाता है। हालांकि, नए डिजाइन के लागू होने पर बैंक नोटों से ऐतिहासिक हस्तियों की तस्वीरें हटाई जाएंगी। उनकी जगह प्रकृति से जुड़ी तस्वीरें दिखाई देंगी। यह बदलाव केवल तस्वीरों को बदलने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों को देखने के नजरिये में परिवर्तन का संकेत भी देता है।


बैंक ऑफ इंग्लैंड ने इस वर्ष मार्च में ही यह निर्णय लिया था कि भविष्य में ब्रिटिश बैंक नोटों पर प्रसिद्ध हस्तियों के बजाय देश के मूल वन्यजीवों को जगह दी जाएगी। अब इस नीति को आगे बढ़ाते हुए प्रस्तावित जीवों की तस्वीरों की जानकारी सामने आई है। बैंक नोटों के डिजाइन में बदलाव एक लंबी प्रक्रिया होती है। इसमें सुरक्षा संबंधी विशेषताओं, डिजाइन की स्पष्टता, मुद्रा की पहचान और आम लोगों की राय जैसे पहलुओं पर ध्यान देना पड़ता है। वन्यजीवों की तस्वीरों को शामिल करने का उद्देश्य ब्रिटेन की प्राकृतिक संपदा को सामने लाना भी है। उल्लेखनीय है कि नोटों पर तस्वीरों का चयन केवल कलात्मक पसंद का मामला नहीं होता। वह यह भी बताता है कि कोई देश अपने इतिहास, समाज और पर्यावरण के किन पहलुओं को राष्ट्रीय पहचान के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है।


ब्रिटेन में बैंक नोटों से ऐतिहासिक हस्तियों की तस्वीरें हटाने के फैसले पर राजनीतिक दलों के कुछ नेताओं ने नाराजगी जताई थी। उनके लिए ऐतिहासिक व्यक्तित्व केवल अतीत की याद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और उपलब्धियों के प्रतीक भी हैं। इसी बीच यह अटकलें भी लगाई गईं कि बैंक ऑफ इंग्लैंड ऐतिहासिक हस्तियों से जुड़े विवादों से बचने के लिए यह बदलाव कर रहा है। हालांकि, इस तरह की अटकलों को फैसले का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता। बैंक की घोषित नीति के अनुसार, भविष्य के नोटों पर ब्रिटेन के मूल वन्यजीवों को प्रमुखता दी जाएगी। यह बहस भी महत्वपूर्ण है कि किसी देश की पहचान को उसके इतिहास के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है या उसकी प्राकृतिक विरासत के माध्यम से। इतिहास और प्रकृति दोनों ही किसी राष्ट्र की साझा धरोहर हैं। इसलिए बैंक नोटों पर इनमें से किसी एक को प्राथमिकता देने का निर्णय स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन सकता है।


ब्रिटेन के नए नोटों पर प्रस्तावित वन्यजीवों का चयन पर्यावरणीय दृष्टि से भी दिलचस्प है। मधुमक्खियां और भौंरे परागण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके माध्यम से अनेक पौधों और फसलों के जीवनचक्र को सहारा मिलता है। दूसरी ओर, हेजहॉग ब्रिटेन में पाया जाने वाला एक परिचित स्तनधारी जीव है, जबकि बार्न आउल अपनी विशिष्ट बनावट और रात्रिचर गतिविधियों के लिए जाना जाता है। पफिन अपनी रंगीन चोंच और समुद्री जीवन के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। इन जीवों की तस्वीरें बैंक नोटों पर आने से वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति लोगों की रुचि बढ़ सकती है। मुद्रा रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है। इसलिए उस पर दिखाई देने वाली तस्वीरें लोगों के मन में प्रकृति के प्रति जागरूकता पैदा करने का माध्यम भी बन सकती है।


ब्रिटेन का यह फैसला एक व्यापक सवाल भी उठाता है—क्या राष्ट्रीय गौरव को केवल ऐतिहासिक नेताओं और महान व्यक्तियों के माध्यम से ही व्यक्त किया जाना चाहिए? या फिर जंगलों, पक्षियों, कीटों और दूसरे जीवों को भी राष्ट्रीय पहचान में समान महत्व मिलना चाहिए? इतिहास किसी देश को उसकी जड़ों से जोड़ता है, जबकि प्रकृति उसके वर्तमान और भविष्य के अस्तित्व का आधार है। ऐसे में ब्रिटेन की नई मुद्रा नीति को इतिहास से दूरी बनाने के बजाय राष्ट्रीय पहचान के एक नए आयाम को सामने लाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है। अगले साल जारी होने वाले नए नोटों पर वन्यजीवों की तस्वीरें दिखाई देने की योजना ब्रिटेन की मुद्रा को नया रूप दे सकती है। हालांकि, इस बदलाव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी रह सकती है। अंततः यह देखना दिलचस्प होगा कि उल्लू, मधुमक्खियां, पफिन और हेजहॉग ब्रिटेन की मुद्रा पर अपनी जगह बनाकर देश की पहचान के कितने लोकप्रिय प्रतीक बन पाते हैं।


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