देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिव दिसम्बर में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच पर एकत्र होंगे। छठे राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय, विकास की प्राथमिकताओं तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे की रणनीति पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। सम्मेलन में विकसित भारत- 2047, खनन, बुनियादी ढांचा और भारतीय एआई मॉडल जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित होने जा रहा है, जब देश के सामने आर्थिक विकास के साथ-साथ तकनीकी बदलाव, आधारभूत ढांचे के विस्तार, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रशासनिक सुधार जैसी कई महत्वपूर्ण चुनौतियां और अवसर मौजूद हैं। ऐसे में मुख्य सचिवों का यह सम्मेलन राज्यों के अनुभवों और प्राथमिकताओं को राष्ट्रीय विकास के व्यापक एजेंडे से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल केंद्र सरकार के स्तर पर नीतियां बनाने से पूरा नहीं हो सकता। देश के प्रत्येक राज्य की अपनी भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियां हैं। इसलिए विकसित भारत के विजन को जमीन पर उतारने में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी उद्देश्य से केंद्र ने सभी राज्यों से पांच-पांच प्राथमिकताएं मांगी हैं। इन प्राथमिकताओं के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि अलग-अलग राज्यों की विकास संबंधी सबसे महत्वपूर्ण जरूरतें क्या हैं और उन्हें राष्ट्रीय विजन के साथ किस प्रकार जोड़ा जा सकता है। राज्यों से प्राप्त सुझावों के आधार पर विकास की ऐसी रणनीति तैयार करने पर जोर रहेगा, जिसमें स्थानीय जरूरतों और राष्ट्रीय लक्ष्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो।
मुख्य सचिव राज्य सरकार के प्रशासनिक ढांचे में सबसे महत्वपूर्ण अधिकारियों में शामिल होते हैं। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से लेकर केंद्र सरकार के साथ संवाद और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन तक उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में देशभर के मुख्य सचिवों का एक मंच पर आना केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुभवों को साझा करने का अवसर भी होता है। अलग-अलग राज्यों में सफल रही योजनाओं, तकनीकी प्रयोगों और प्रशासनिक नवाचारों को दूसरे राज्यों में अपनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हो सकती है।
सम्मेलन के प्रमुख विषयों में खनन भी शामिल है। भारत के आर्थिक विकास में खनिज संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि खनन के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के हित और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग की चुनौती भी जुड़ी है। इसलिए भविष्य की खनन नीति में तकनीक, पारदर्शिता, पर्यावरणीय संतुलन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाना महत्वपूर्ण होगा। राज्यों के अनुभव इस दिशा में बेहतर नीति निर्माण में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
सड़क, रेल, बिजली, जल, शहरी सुविधाएं, डिजिटल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स जैसी आधारभूत सुविधाएं आर्थिक विकास की नींव हैं। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इन क्षेत्रों में राज्यों और केंद्र के बीच समन्वित प्रयास जरूरी होंगे। सम्मेलन में बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श के दौरान परियोजनाओं को समय पर पूरा करने, निवेश बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के उपयोग जैसे मुद्दों पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानि एआई तेजी से प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और सेवाओं को प्रभावित कर रही है। सम्मेलन में भारतीय एआई मॉडल पर चर्चा इस बात का संकेत है कि भविष्य की विकास रणनीति में तकनीक को केंद्रीय भूमिका देने की तैयारी है। भारत के लिए चुनौती केवल एआई का उपयोग करने की नहीं, बल्कि अपनी आवश्यकताओं, भाषाई विविधता और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप एआई आधारित समाधान विकसित करने की भी है। सरकारी सेवाओं में एआई के जिम्मेदार और प्रभावी इस्तेमाल से प्रशासन को अधिक तेज और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है।
राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैठक की। बैठक में सम्मेलन से संबंधित तैयारियों और प्रस्तावित विषयों पर चर्चा की गई। राज्यों से मांगी गई प्राथमिकताओं को भी इस व्यापक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। दिसम्बर में होने वाला यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच विकास संबंधी संवाद को नई दिशा देने का अवसर प्रदान करेगा। विकसित भारत-2047 का लक्ष्य जितना राष्ट्रीय है, उतना ही राज्यों की सक्रिय भागीदारी से जुड़ा हुआ है। इसलिए सम्मेलन में होने वाला विचार-विमर्श आने वाले वर्षों की विकास प्राथमिकताओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

