एवरेस्ट जीरा पाउडर बाजार से वापस लेने का हुआ आदेश

Jitendra Kumar Sinha
0

 


भारतीय रसोई में मसालों का स्थान केवल स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है। मसाले भोजन की गुणवत्ता, सुगंध और स्वास्थ्य से भी सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में यदि किसी मसाले में तय सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष पाए जाते हैं, तो यह उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ाने वाली बात है। खाद्य सुरक्षा को लेकर इसी गंभीरता के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई ने सख्त कदम उठाया है। एफएसएसएआई ने मसाला कंपनी एवरेस्ट फूड के पैक्ड जीरा पाउडर को बाजार से वापस लेने का आदेश दिया है। नमूनों की जांच में इसे खाने के लिए असुरक्षित पाया गया। यह कार्रवाई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर नियामक संस्थाओं की जिम्मेदारी को रेखांकित करती है।


जानकारी के अनुसार, गोवा के एक रिजॉर्ट से एवरेस्ट जीरा पाउडर का नमूना लिया गया था। प्रयोगशाला जांच में इसमें एजोक्सिट्रोबिन और थियामेथोक्सम जैसे कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए। कीटनाशकों का इस्तेमाल कृषि उत्पादन में फसलों को कीटों और रोगों से बचाने के लिए किया जाता है। लेकिन खाद्य पदार्थों में इनके अवशेषों की मात्रा निर्धारित मानकों के भीतर रहना आवश्यक है। यदि इनकी मात्रा तय सीमा से अधिक हो जाए तो खाद्य सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते हैं। यही कारण है कि खाद्य नियामक संस्थाएं समय-समय पर बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी जांच करती हैं। किसी उत्पाद में निर्धारित मानकों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।


किसी खाद्य उत्पाद को बाजार से वापस लेने का निर्णय सामान्य कार्रवाई नहीं है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं तक ऐसे उत्पाद की पहुंच रोकना है, जिसकी गुणवत्ता निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है। एफएसएसएआई के निर्देश के बाद संबंधित जीरा पाउडर को बाजार से हटाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है। दुकानदारों, वितरकों और अन्य संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे उत्पाद की बिक्री रोकें और नियामकीय निर्देशों का पालन करें। उपभोक्ताओं के लिए भी यह संदेश महत्वपूर्ण है कि वे पैकेटबंद खाद्य सामग्री खरीदते समय केवल ब्रांड के नाम पर निर्भर न रहें। पैकेट की सील, निर्माण और समाप्ति तिथि, बैच नंबर तथा अन्य आवश्यक विवरणों की जांच करना भी जरूरी है।


खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई केवल एवरेस्ट जीरा पाउडर तक सीमित नहीं रही। सफाई और स्वच्छता के मानकों में कमी पाए जाने के कारण क्रिएटिव बेकर्स एंड कन्फेक्शनर्स का लाइसेंस भी निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि खाद्य कारोबार में केवल उत्पाद की सामग्री ही नहीं, बल्कि उसे तैयार करने, रखने और पैक करने की पूरी प्रक्रिया भी सुरक्षित और स्वच्छ होनी चाहिए। बेकरी, रेस्टोरेंट, होटल, मसाला उद्योग या कोई अन्य खाद्य प्रतिष्ठान, हर जगह स्वच्छता खाद्य सुरक्षा का बुनियादी हिस्सा है। गंदगी, अस्वच्छ उपकरण, अनुचित भंडारण या साफ-सफाई में लापरवाही उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।


खाद्य सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत यही है कि कानून की नजर में किसी ब्रांड का आकार या बाजार में उसकी लोकप्रियता उसे नियमों से ऊपर नहीं रख सकती। उपभोक्ता किसी प्रसिद्ध ब्रांड से गुणवत्ता की अपेक्षा जरूर करते हैं, लेकिन नियामकीय जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर खाद्य उत्पाद निर्धारित मानकों पर खरा उतरे। इस तरह की कार्रवाई खाद्य उद्योग के लिए भी चेतावनी है कि उत्पादन से लेकर वितरण तक हर स्तर पर गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत रखना होगा। कंपनियों को कच्चे माल की जांच, उत्पादन प्रक्रिया, स्वच्छता और तैयार उत्पाद की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखनी होगी।


इस पूरे मामले से उपभोक्ताओं के लिए भी एक सीख निकलती है। खाद्य पदार्थ खरीदते समय आकर्षक पैकेजिंग या लोकप्रिय ब्रांड के बजाय गुणवत्ता और प्रमाणिकता को प्राथमिकता देना चाहिए। यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह हो तो उसका उपयोग करने से बचना बेहतर है। खाद्य सुरक्षा केवल सरकार या कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें उपभोक्ता की जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। किसी संदिग्ध उत्पाद की जानकारी संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों तक पहुंचाना भी नागरिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।


भारत मसालों का बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है। जीरा, हल्दी, धनिया, मिर्च और दूसरे मसाले लगभग हर भारतीय रसोई का हिस्सा हैं। इसलिए इनकी गुणवत्ता का सीधा संबंध करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन से है। एवरेस्ट जीरा पाउडर को बाजार से वापस लेने का आदेश इसी व्यापक खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की याद दिलाता है। नियामक संस्थाओं की सख्ती तभी प्रभावी होगी जब खाद्य कंपनियां गुणवत्ता मानकों का ईमानदारी से पालन करें और उपभोक्ता भी जागरूक रहें। आखिरकार, मसाले भोजन का स्वाद बढ़ाते हैं, लेकिन उनकी शुद्धता ही भोजन को सुरक्षित बनाती है। खाद्य सुरक्षा में थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ी चिंता का कारण बन सकती है। इसलिए नियमों का पालन और गुणवत्ता की नियमित जांच, दोनों अनिवार्य हैं।


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top