आहर पंचायत में खुलेगा जीविका-सुधा केंद्र

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता को आसान बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सात निश्चय योजना-3 के तहत बिहार की सभी 8053 पंचायतों में जीविका-सुधा बिक्री केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) और जीविका के संयुक्त प्रयास से संचालित इस पहल का उद्देश्य गांवों तक सुधा ब्रांड के दूध एवं अन्य दुग्ध उत्पादों की पहुंच बढ़ाना है। इसके साथ ही ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खोलने पर भी जोर दिया जा रहा है। अब तक राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 44 जीविका-सुधा बिक्री केंद्रों का उद्घाटन किया जा चुका है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


इस अभियान के तहत अरवल जिले के सोनभद्र बंशी सूर्यपुर प्रखंड की शेरपुर पंचायत में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत स्थापित जीविका-सुधा बिक्री केंद्र का उद्घाटन पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने किया। इस केंद्र की स्थापना से स्थानीय लोगों को सुधा के दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिलाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं विकसित करने का अवसर मिलेगा। शेरपुर पंचायत में केंद्र का शुभारंभ राज्य सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके माध्यम से पंचायत स्तर पर रोजगार और कारोबार की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना है। सरकार की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हों और छोटे व्यवसायों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले।


बिहार में सुधा ब्रांड लंबे समय से दूध और दुग्ध उत्पादों के लिए जाना जाता है। अब जीविका के सहयोग से इसकी पहुंच को पंचायत स्तर तक विस्तारित करने की योजना बनाई गई है। सभी 8053 पंचायतों में बिक्री केंद्र स्थापित होने से ग्रामीण उपभोक्ताओं को दूध, दही, घी, पनीर और अन्य उपलब्ध दुग्ध उत्पादों की खरीदारी में सुविधा मिल सकती है। फिलहाल कई ग्रामीण क्षेत्रों में संगठित बिक्री केंद्रों की उपलब्धता सीमित है। ऐसे में पंचायतों में जीविका-सुधा केंद्र खुलने से उपभोक्ताओं को स्थानीय बाजार में ही उत्पाद उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। हालांकि, प्रत्येक केंद्र पर उपलब्ध उत्पादों की सूची और आपूर्ति व्यवस्था स्थानीय संचालन पर निर्भर करेगी। यह पहल केवल बिक्री केंद्र खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध ग्रामीण बाजार के विस्तार, स्थानीय उद्यमिता और दुग्ध सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने से भी है।


जीविका बिहार में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित करने और उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जीविका-सुधा बिक्री केंद्रों का संचालन इस व्यवस्था को नए अवसर प्रदान कर सकता है। महिलाओं को यदि बिक्री केंद्र चलाने, उत्पादों की आपूर्ति, हिसाब-किताब और ग्राहक प्रबंधन से संबंधित उचित प्रशिक्षण मिले, तो वे अपने कौशल का उपयोग कर नियमित आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। इससे परिवार की आमदनी बढ़ाने और महिलाओं की आर्थिक निर्णय क्षमता मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत इस तरह की पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि ग्रामीण महिलाओं को अपने ही क्षेत्र में काम करने का अवसर मिल सकता है। इससे रोजगार की तलाश में दूसरे स्थानों पर जाने की जरूरत कुछ हद तक कम करने में सहायता मिल सकती है।


कॉम्फेड की दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था तथा जीविका के ग्रामीण नेटवर्क का संयुक्त उपयोग इस परियोजना की प्रमुख विशेषता है। दोनों संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से बिक्री केंद्रों तक उत्पादों की नियमित आपूर्ति और उपभोक्ताओं तक उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्रों को समय पर उत्पाद मिलें, उनकी गुणवत्ता बनी रहे, बिक्री मूल्य उपभोक्ताओं के लिए उचित हो और संचालकों को पर्याप्त व्यावसायिक सहयोग प्राप्त हो। ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादों की मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखना भी आवश्यक होगा।


सात निश्चय योजना-3 के तहत सभी पंचायतों में जीविका-सुधा बिक्री केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य ग्रामीण विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे एक ओर सुधा ब्रांड का बाजार विस्तार होगा, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावना बनेगी। अब तक 44 केंद्रों का उद्घाटन इस दिशा में शुरुआती प्रगति को दर्शाता है। आगे सभी पंचायतों तक इस व्यवस्था का विस्तार करना एक बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसके लिए बुनियादी सुविधाओं, नियमित आपूर्ति, प्रशिक्षित संचालकों और प्रभावी निगरानी की जरूरत होगी। यदि इन पहलुओं पर ध्यान दिया गया, तो जीविका-सुधा केंद्र बिहार के ग्रामीण बाजार की तस्वीर बदलने में योगदान दे सकते हैं। गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार, उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा और महिलाओं को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने वाली यह पहल राज्य में आत्मनिर्भर पंचायतों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।


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