मतदाता सूची में गड़बड़ी पर सख्ती - 10 अप्रैल के बाद दर्ज सभी फॉर्म- 6, 7 और 8 का होगा ऑडिट

Jitendra Kumar Sinha
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उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को त्रुटिरहित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए निर्वाचन विभाग ने सख्त कदम उठाया है। मतदाता सूची में अनियमितताओं को रोकने और आवेदन दर्ज करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 10 अप्रैल के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज किए गए सभी फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 का ऑडिट कराया जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इस संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। पीलीभीत और आजमगढ़ में मतदाता सूची से संबंधित अनियमितताएं सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने यह कदम उठाया है। 24 अक्टूबर को आयोजित वर्चुअल बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऑडिट के दौरान यदि आवेदन दर्ज करने या उनके निस्तारण में अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची से जुड़े आवेदनों में किसी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (सहायक ईआरओ) और कंप्यूटर सहायक की जिम्मेदारी तय की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के विरुद्ध जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इतना ही नहीं, संबंधित जिले में जिला निर्वाचन अधिकारी की निगरानी के बावजूद यदि गंभीर कमियां सामने आती हैं, तो उनकी जवाबदेही भी निर्धारित की जा सकती है। इस निर्देश का उद्देश्य केवल अनियमितताओं का पता लगाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। निर्वाचन विभाग की इस सख्ती से उन कर्मचारियों और अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है, जिनकी जिम्मेदारी मतदाताओं के आवेदन सही तरीके से दर्ज करना, उनका सत्यापन करना और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका निस्तारण करना है।


मतदाता सूची में नाम जोड़ने और उसमें संशोधन करने के लिए अलग-अलग आवेदन निर्धारित हैं। फॉर्म-6 का उपयोग सामान्यतः नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए किया जाता है। फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति या किसी प्रविष्टि को हटाने के लिए आवेदन किया जाता है। वहीं, फॉर्म-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में विवरण सुधारने, पता बदलने और निर्धारित अन्य संशोधनों के लिए किया जाता है। इन तीनों फॉर्म का सीधा संबंध मतदाता सूची की शुद्धता से है। यदि नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, अपात्र प्रविष्टियों को हटाने या मौजूदा विवरणों में संशोधन करने की प्रक्रिया में गलती होती है, तो इसका असर पूरी मतदाता सूची पर पड़ सकता है। इसलिए इन आवेदनों का ऑडिट महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आवेदन दर्ज करने की प्रक्रिया में भी बदलाव संबंधी निर्देश दिए हैं। अब कंप्यूटर सहायक भौतिक रूप से प्राप्त आवेदनों को सीधे कंप्यूटर पर दर्ज नहीं करेंगे। ऐसे आवेदनों को बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) बीएलओ ऐप के माध्यम से डिजिटल करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य आवेदन प्राप्त करने से लेकर उन्हें डिजिटल स्वरूप में दर्ज करने तक की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है। इससे आवेदन की स्थिति का पता लगाने, रिकॉर्ड की जांच करने और संभावित गड़बड़ियों की पहचान करने में भी सहायता मिल सकती है। निर्वाचन विभाग चाहता है कि आवेदन दर्ज करने की प्रक्रिया निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुरूप संचालित हो। इससे किसी आवेदन में त्रुटि पाए जाने पर यह पता लगाना आसान होगा कि गलती किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।


आगामी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची 12 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। इससे पहले निर्वाचन विभाग ने मतदाता सूची में मौजूद दोहरी प्रविष्टियों को हटाने के निर्देश दिए हैं। एक ही मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होना सूची की शुद्धता के लिहाज से महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसी प्रविष्टियों की पहचान कर नियमानुसार सुधार करना आवश्यक है, ताकि मतदाता सूची अधिक सटीक बनाई जा सके। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर जरूरी कार्रवाई पूरी करने को कहा गया है। इसके साथ ही लंबित आवेदनों का प्रतिदिन निस्तारण करने और मतदाताओं की शिकायतों का शीघ्र समाधान करने पर भी जोर दिया गया है। निर्वाचन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित न रहें और पात्र मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर राहत मिल सके।


लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की शुद्धता का विशेष महत्व है। चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता इस बात पर भी निर्भर करती है कि सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सही तरीके से दर्ज हों और अपात्र या दोहरी प्रविष्टियों से संबंधित मामलों का नियमानुसार निस्तारण किया जाए। उत्तर प्रदेश निर्वाचन विभाग की नई पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 10 अप्रैल के बाद दर्ज सभी संबंधित आवेदनों के ऑडिट, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, बीएलओ ऐप के माध्यम से आवेदन डिजिटल करने और लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देशों से मतदाता सूची की जांच प्रक्रिया को मजबूती मिलने की उम्मीद है। अब निगाहें ऑडिट के निष्कर्षों और 12 नवंबर को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची पर रहेंगी। निर्वाचन विभाग के सामने चुनौती यह होगी कि तय समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक सुधार पूरे हों और मतदाताओं को एक ऐसी सूची मिले, जिसमें अनियमितताओं की गुंजाइश न्यूनतम हो।


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