अमेरिका में जारी हुआ दिपावली की रंगोली का डाक टिकट

Jitendra Kumar Sinha
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दीपावली की रोशनी अब केवल भारत के घरों, आंगनों और बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक छटा सात समंदर पार भी अपनी पहचान बना रही है। भारतीय परंपराओं, कलाओं और त्योहारों की वैश्विक लोकप्रियता का एक और उदाहरण अमेरिका में देखने को मिला है। अमेरिकी डाक सेवा (यूएसपीएस) ने दीपावली के अवसर पर एक विशेष डाक टिकट जारी किया है, जिस पर रंगोली की बेहद बारीक और आकर्षक आकृति उकेरी गई है। यह डाक टिकट भारतीय संस्कृति की खूबसूरती, कलात्मक समृद्धि और दीपावली के उल्लास को अमेरिकी डाक व्यवस्था के माध्यम से दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है। इस डाक टिकट की सबसे खास बात यह है कि इस पर प्रदर्शित रंगोली की कलाकृति ह्यूस्टन में रहने वाली भारतीय मूल की कलाकार संगीता भुताडा ने तैयार की है। उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति ने भारतीय लोक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


अमेरिकी डाक सेवा की इस विशेष पहल के अवसर पर वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में एक समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा, यूएसपीएस की वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिबानी गंभीर और कलाकार संगीता भुताडा ने संयुक्त रूप से डाक टिकट का अनावरण किया। समारोह में भारतीय संस्कृति और दीपावली की परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का महत्व रेखांकित हुआ। किसी देश की डाक सेवा द्वारा किसी त्योहार या सांस्कृतिक परंपरा को डाक टिकट पर स्थान देना उस संस्कृति की व्यापक पहचान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे टिकट न केवल डाक भेजने के काम आते हैं, बल्कि वे देश की सांस्कृतिक विविधता, परंपराओं और सामाजिक जीवन के संदेश को भी दूर-दूर तक पहुंचाते हैं। दीपावली पर जारी यह टिकट भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। रंगोली की आकृति के माध्यम से भारतीय त्योहार की सौंदर्यपरक और सांस्कृतिक विशेषताओं को सामने लाने का प्रयास किया गया है।


भारत में रंगोली केवल सजावट का माध्यम नहीं है। यह शुभता, मंगलकामना, रचनात्मकता और अतिथि-सत्कार की परंपरा से जुड़ी हुई है। दीपावली के अवसर पर घरों के प्रवेश द्वार, आंगन और पूजा स्थलों पर रंग-बिरंगी रंगोलियां बनाई जाती हैं। माना जाता है कि सुंदर रंगोली घर में सकारात्मकता और खुशियों का स्वागत करती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में रंगोली बनाने की शैलियां भी अलग-अलग हैं। कहीं चावल के आटे से पारंपरिक आकृतियां बनाई जाती हैं, तो कहीं रंगीन पाउडर, फूलों की पंखुड़ियों और प्राकृतिक सामग्रियों से आकर्षक डिजाइन तैयार किए जाते हैं। महाराष्ट्र में रंगोली, दक्षिण भारत में कोलम और देश के अन्य क्षेत्रों में प्रचलित पारंपरिक अल्पनाएं इसी व्यापक लोककला परंपरा के विविध रूप हैं। रंगोली की यही विशेषता उसे भारतीय संस्कृति का विशिष्ट प्रतीक बनाती है। कुछ रंगों और रेखाओं से तैयार होने वाली आकृतियां पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं, स्थानीय मान्यताओं और कलात्मक कल्पनाशीलता को अभिव्यक्त करती हैं। अमेरिकी डाक टिकट पर रंगोली को स्थान मिलना इस लोककला की वैश्विक स्वीकार्यता का भी संकेत है।


इस डाक टिकट के केंद्र में कलाकार संगीता भुताडा की कलाकृति है। मूल रूप से भारत की रहने वाली भुताडा लंबे समय से अमेरिका के ह्यूस्टन क्षेत्र में रह रही हैं। उनकी बनाई रंगोली की बारीक और आकर्षक आकृति भारतीय परंपरा तथा कलात्मक अभिव्यक्ति के बीच एक सुंदर सेतु प्रस्तुत करती है। प्रवासी भारतीयों ने दुनिया के विभिन्न देशों में रहते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों को जीवित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारतीय त्योहारों का आयोजन, पारंपरिक कलाओं का संरक्षण, संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां तथा स्थानीय समुदायों के साथ सांस्कृतिक संवाद इसके प्रमुख उदाहरण हैं। कलाकारों की ऐसी उपलब्धियां इस प्रक्रिया को और मजबूत करती है। संगीता भुताडा की कलाकृति को अमेरिकी डाक टिकट पर स्थान मिलना इस बात को भी रेखांकित करता है कि कला भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ सकती है। भारतीय मूल के कलाकार अपनी रचनात्मकता के माध्यम से जिस देश में रहते हैं, वहां की सांस्कृतिक विविधता में योगदान देते हुए अपनी विरासत को भी नई पहचान दिला सकते हैं।


दीपावली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। अंधकार पर प्रकाश, निराशा पर आशा और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का संदेश देने वाला यह पर्व अब विश्व के अनेक देशों में उत्साह के साथ मनाया जाता है। भारतीय समुदाय के साथ-साथ विभिन्न संस्कृतियों के लोग भी दीपावली के आयोजन में भाग लेते हैं। अमेरिका में भी भारतीय समुदाय की सांस्कृतिक गतिविधियों, सार्वजनिक आयोजनों और पारंपरिक उत्सवों के माध्यम से दीपावली की पहचान लगातार व्यापक हुई है। ऐसे अवसर विभिन्न समुदायों को एक-दूसरे की परंपराओं को समझने और उनका सम्मान करने का अवसर देते हैं। डाक टिकट जैसी सार्वजनिक स्मृति से जुड़ी वस्तु पर दीपावली की कलात्मक छवि का अंकित होना इस सांस्कृतिक संवाद को एक नया आयाम देता है। डाक टिकट पत्रों और संग्रहों के माध्यम से लोगों तक पहुंच सकता है तथा आने वाले समय में भी भारतीय कला और त्योहार की याद दिला सकता है।


अमेरिकी डाक सेवा का यह विशेष डाक टिकट भारतीय संस्कृति की उस शक्ति का प्रतीक है, जो परंपरा और आधुनिकता को साथ लेकर चलती है। एक ओर रंगोली सदियों पुरानी भारतीय लोककला का प्रतिनिधित्व करती है, तो दूसरी ओर डाक टिकट के माध्यम से वही कला आधुनिक संचार व्यवस्था का हिस्सा बन जाती है। यह पहल भारत और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक संबंधों की व्यापकता को भी रेखांकित करती है। दोनों देशों के लोगों के बीच संवाद केवल व्यापार, तकनीक और शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कला, त्योहारों और साझा मानवीय मूल्यों के माध्यम से भी मजबूत होता है। दीपावली का संदेश है कि प्रकाश की एक छोटी-सी किरण भी अंधकार को दूर करने की क्षमता रखती है। अमेरिकी डाक टिकट पर सजी रंगोली इसी संदेश को कलात्मक रूप में सामने लाती है। भारत की मिट्टी से जुड़ी एक परंपरा जब दूसरे देश की डाक व्यवस्था में स्थान पाती है, तो वह केवल एक कलाकार की उपलब्धि नहीं रहती, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक सम्मान का उदाहरण बन जाती है। इस तरह रंगोली की रंगीन आकृति अमेरिका से दुनिया तक भारतीय त्योहार की सुंदरता, रचनात्मकता और उजाले का संदेश पहुंचाती है।


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