व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर हिंसा करने वालों को नहीं मिलेगी सरकारी सेवा - चरित्र सत्यापन के नियम हुए सख्त

Jitendra Kumar Sinha
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सरकारी नौकरी केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है। सरकारी सेवाओं में आने वाले व्यक्तियों से ईमानदारी, अनुशासन, संवैधानिक मूल्यों और कानून के प्रति सम्मान की अपेक्षा की जाती है। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन से जुड़े नियमों को और कठोर कर दिया है। अब व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर हिंसक रास्ता अपनाने वाले संगठनों से जुड़े लोगों के लिए राज्य की सरकारी सेवाओं में प्रवेश आसान नहीं होगा।


इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत जारी संशोधित दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे संगठनों के सदस्य, जिनका उद्देश्य हिंसक तरीकों से समाज की स्थापित व्यवस्था को बदलना है, सरकारी नौकरियों के लिए अयोग्य माने जाएंगे। अपर मुख्य सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम. देवराज की ओर से जारी यह आदेश राज्य सरकार के विभिन्न विभागों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका दायरा निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय निकायों तक भी विस्तारित किया गया है।


सरकारी भर्ती की प्रक्रिया में अब केवल शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा में प्राप्त अंक और निर्धारित आयु सीमा ही निर्णायक नहीं होंगे। अभ्यर्थी का पिछला आचरण, आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता और समाज के प्रति उसका नजरिया भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। सरकार का मानना है कि सरकारी सेवाओं में ऐसे लोगों को स्थान मिलना चाहिए, जो कानून और संविधान में विश्वास रखते हों तथा अपने दायित्वों का निर्वहन निष्पक्षता और निष्ठा के साथ कर सके।


संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, हिंसा के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को बदलने की विचारधारा रखने वाले संगठनों से जुड़े व्यक्तियों को सरकारी सेवा के योग्य नहीं माना जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी संस्थानों को ऐसी गतिविधियों और विचारधाराओं से दूर रखना है, जो कानून-व्यवस्था तथा सामाजिक शांति के लिए खतरा बन सकती हैं। सरकार ने उन अपराधों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया है, जिनमें संलिप्त अभ्यर्थियों को सरकारी सेवाओं में अवसर नहीं दिया जाएगा। हत्या, दुष्कर्म, आतंकवाद और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर अपराधों के अलावा परीक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर भी सख्ती बरती जाएगी।


पेपर लीक और सॉल्वर गिरोहों से जुड़े मामलों को भी इस व्यवस्था में गंभीरता से लिया गया है। इसका सीधा संदेश है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित तरीके अपनाकर नौकरी हासिल करने की कोशिश करने वालों के लिए सरकारी सेवा में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। परीक्षा की शुचिता और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। दरअसल, पेपर लीक और सॉल्वर गिरोह जैसी गतिविधियां केवल एक अभ्यर्थी के भविष्य को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि लाखों मेहनती युवाओं के विश्वास को भी चोट पहुंचाती हैं। वर्षों तक पढ़ाई और तैयारी करने वाले प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को जब अनियमितताओं के कारण नुकसान उठाना पड़ता है, तो पूरी भर्ती व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।


अपर मुख्य सचिव एम. देवराज द्वारा जारी आदेश का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया है। राज्य सरकार के विभागों के साथ-साथ सरकारी निगमों, परिषदों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय निकायों में होने वाली सीधी भर्तियां भी इसके दायरे में आएंगी। इससे सरकारी रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन की प्रक्रिया को एक समान तथा प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। इस व्यवस्था के तहत भर्ती से पहले अभ्यर्थियों की पृष्ठभूमि की जांच को गंभीरता से लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक पदों पर नियुक्त होने वाले व्यक्ति का आचरण उसकी जिम्मेदारी के अनुरूप हो।


लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की नीतियों का विरोध करना, अपनी असहमति व्यक्त करना और व्यवस्था में बदलाव की मांग करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। लेकिन विरोध और हिंसा के बीच अंतर समझना जरूरी है। लोकतंत्र में परिवर्तन का रास्ता संवाद, संवैधानिक प्रक्रियाओं, शांतिपूर्ण आंदोलन और जनमत से होकर गुजरता है। हिंसा, आतंक और अराजकता को व्यवस्था परिवर्तन का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। सरकारी नौकरी के लिए निर्धारित कठोर मानदंडों का उद्देश्य भी इसी अंतर को रेखांकित करना है। हालांकि, ऐसे नियमों को लागू करते समय यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा कि किसी अभ्यर्थी के साथ केवल विचारों, वैध असहमति या शांतिपूर्ण आंदोलन में भागीदारी के आधार पर अन्याय न हो। किसी भी अयोग्यता का निर्धारण ठोस तथ्यों, कानूनी स्थिति और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।


उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को एक महत्वपूर्ण संदेश मिलता है। सरकारी नौकरी पाने के लिए केवल परीक्षा में सफलता हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत आचरण, सामाजिक जिम्मेदारी और कानून के प्रति सम्मान भी जरूरी है। सरकारी सेवा जनता के विश्वास पर आधारित होती है। इसलिए इसमें प्रवेश पाने वाले प्रत्येक व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने पद की गरिमा बनाए रखे। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर हिंसा करने वालों और अपराध के रास्ते सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश करने वालों के लिए सख्ती का यह संदेश स्पष्ट है कि सार्वजनिक सेवा में योग्यता के साथ चरित्र और जिम्मेदारी का भी महत्व है।


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