कर्नाटक सरकार का सख्त फरमान - दीपावली पर रात 8 से 10 बजे तक होगी आतिशबाजी

Jitendra Kumar Sinha
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दीपावली रोशनी, उल्लास और खुशियों का त्योहार है, लेकिन आतिशबाजी के कारण बढ़ने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण हर साल चिंता का विषय बनता जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए कर्नाटक सरकार ने इस बार दीपावली पर पटाखे फोड़ने को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य में दीपावली के दौरान रात आठ बजे से दस बजे तक ही पटाखे फोड़ने की अनुमति होगी। निर्धारित समय के अलावा पटाखे चलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। सरकार का यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।


राज्य के पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को इन दिशा-निर्देशों की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी के लिए केवल दो घंटे का समय निर्धारित किया गया है। रात आठ बजे से दस बजे तक ही लोग पटाखे फोड़ सकेंगे। इसके बाद या निर्धारित समय से पहले पटाखे चलाना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। मंत्री ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को राज्य पुलिस आयुक्त और सभी जिलों के उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य राज्यभर में एक समान व्यवस्था लागू करना और नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना है। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस को पटाखों की बिक्री, भंडारण तथा इस्तेमाल पर लगातार निगरानी रखने को कहा गया है।


सरकार ने इस बार प्रमाणित ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। सामान्य पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखों से अपेक्षाकृत कम प्रदूषण होता है। इनके इस्तेमाल से आतिशबाजी का आनंद लेने के साथ पर्यावरण को होने वाले नुकसान को भी सीमित किया जा सकता है। ग्रीन पटाखों की पहचान उनके निर्धारित प्रमाणन और पैकेजिंग पर मौजूद विशेष चिह्नों से की जा सकेगी। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे पटाखे खरीदते समय उनकी प्रमाणिकता की जांच जरूर करें। केवल दुकानदार के दावे पर भरोसा करने के बजाय पैकेजिंग पर उपलब्ध प्रमाणन चिह्नों को देखना जरूरी होगा।


पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस संबंधी समस्याओं से परेशान लोगों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से नुकसानदेह हो सकता है। वहीं, तेज आवाज से पशु-पक्षियों को भी काफी परेशानी होती है। कई बार आतिशबाजी के दौरान होने वाली तेज आवाज से पालतू जानवर भयभीत हो जाते हैं और पक्षियों के प्राकृतिक व्यवहार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सरकार का प्रयास केवल प्रदूषण नियंत्रित करना ही नहीं, बल्कि समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों के स्वास्थ्य तथा सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना है। दीपावली की खुशियां दूसरों के लिए परेशानी का कारण न बनें, इसके लिए नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।


दीपावली से पहले नागरिकों और पशु कल्याण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के सामने पटाखों के इस्तेमाल को लेकर अपनी चिंता जताई थी। उन्होंने गैर-ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के साथ प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री, भंडारण तथा उपयोग पर प्रभावी निगरानी की मांग की थी। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अपील भी की थी। नागरिकों का कहना है कि गणेशोत्सव के दौरान दस दिनों तक पटाखों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण ध्वनि और वायु प्रदूषण की समस्या देखने को मिली थी। इसके बावजूद प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया। इस अनुभव के आधार पर लोगों ने दीपावली से पहले ही प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी है।


दीपावली का मूल संदेश अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का है। ऐसे पावन अवसर पर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की अनदेखी उचित नहीं है। पटाखों का सीमित और जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल ही त्योहार की खुशियों को सुरक्षित रख सकता है। कर्नाटक सरकार के नए दिशा-निर्देश तभी सफल होंगे, जब प्रशासन के साथ आम नागरिक भी उनका पालन करेंगे। केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बाजारों में प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री रोकने और निर्धारित समय के बाद आतिशबाजी पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी निगरानी भी जरूरी है। दीपावली का उत्सव रोशनी, मिठास और आपसी सद्भाव का प्रतीक बने, न कि प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण। दो घंटे की आतिशबाजी की समय-सीमा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अब इसकी सफलता प्रशासन की सक्रियता और नागरिकों की जागरूकता पर निर्भर करेगी।


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