अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा चीन पर 245% तक के टैरिफ लगाने के बाद, चीन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने दुर्लभ खनिजों के निर्यात में भारी कटौती की है। इससे अमेरिका की तीन प्रमुख इंडस्ट्री—सोलर पैनल निर्माण, स्मार्टफोन निर्माण और एयरोस्पेस डिफेंस—गंभीर संकट में हैं।
निर्यात में भारी गिरावट
चीन ने मार्च में अमेरिका को निर्यात होने वाले इटट्रियम की सप्लाई में 86% की कटौती की है। इसी तरह, स्कैडियम के निर्यात में दो तिहाई की गिरावट आई है। इसके अलावा, टंगस्टन रॉड शिपमेंट में लगभग 84% की गिरावट आई है, जबकि अन्य खनिज पदार्थ टंगस्टन के निर्यात में 77% की गिरावट आई है। सीमा शुल्क के आंकड़ों के अनुसार, मोलिब्डेनम पाउडर, बिसमथ उत्पादों और टंगस्टन सामग्री की अन्य तीन श्रेणियों सहित कुछ उत्पाद श्रेणियों के लिए शिपमेंट पूरी तरह से रोक दिए गए हैं।
तीन प्रमुख इंडस्ट्री संकट में
इन खनिजों के निर्यात पर बैन और सप्लाई में आई बड़ी कमी से अमेरिका का न केवल सोलर पैनल और थर्मोइलेक्ट्रिक उपकरणों का निर्माण करने वाली कंपनियां और इंडस्ट्री दबाव में हैं, बल्कि स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से लेकर अत्याधुनिक सैन्य उपकरण बनाने वाली कंपनियां भी परेशान हैं। दरअसल, इन कंपनियों और निर्माण उद्योग में इस्तेमाल होने वाली दुर्लभ खनिजों के भंडार और शोधन एवं प्रसंस्करण पर चीन का एकाधिकार है।
चीन की रणनीति
चीन की यह रणनीति अमेरिका पर दबाव बनाने की है ताकि वह अपने 245% के टैरिफ को कम करे। चीन ने पहले अमेरिकी बोइंग विमानों को खरीदने से इनकार किया था और अब उसने अमेरिका को दुर्लभ खनिजों की सप्लाई रोक दी है। चीन की कोशिश है कि इस तरह का प्रतिबंध लगाकर अमेरिका पर दबाव बढ़ाया जा सके।
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध अब केवल टैरिफ तक सीमित नहीं रह गया है। चीन ने अपने दुर्लभ खनिजों के निर्यात में भारी कटौती करके अमेरिका की तीन प्रमुख इंडस्ट्री को संकट में डाल दिया है। अब यह देखना होगा कि अमेरिका इस चुनौती का सामना कैसे करता है और क्या चीन के इस कदम से व्यापार युद्ध और बढ़ेगा या इसमें कोई कमी आएगी।

