राजनीतिक पुनर्मिलन की ओर?

Jitendra Kumar Sinha
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महाराष्ट्र की राजनीति में दिलचस्प करवट देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के संभावित पुनर्मिलन पर खुशी जाहिर की है।

राज ठाकरे ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में संकेत दिए कि यदि उद्धव चाहें तो वे एक बार फिर साथ काम करने को तैयार हैं। इसके जवाब में उद्धव ठाकरे ने भी सकारात्मक संकेत दिए और कहा कि महाराष्ट्र के हित में वे एकजुटता के लिए तैयार हैं, बशर्ते राज ठाकरे "महाराष्ट्र विरोधी ताकतों" से दूरी बनाएं।

विश्लेषकों के अनुसार, शिवसेना की टूट और विधानसभा में कमजोर प्रदर्शन के बाद उद्धव की राजनीतिक ताकत कमजोर हुई है, जबकि राज ठाकरे की पार्टी का प्रभाव सीमित है। ऐसे में दोनों दलों का एक साथ आना न केवल मराठी अस्मिता को मज़बूती देगा बल्कि बीएमसी और अन्य निकाय चुनावों में भी उन्हें बढ़त दिला सकता है।

हाल ही में एक शादी समारोह में दोनों नेताओं की मुलाकात और गर्मजोशी से बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। देवेंद्र फडणवीस ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर यह एकता महाराष्ट्र के लिए फायदेमंद हो सकती है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

हालांकि, उद्धव ठाकरे की यह शर्त कि राज को भाजपा से दूरी बनानी होगी, यह साफ करता है कि यह मिलन आसान नहीं होगा। संजय राउत ने भी बयान दिया है कि गठबंधन की कोई भी बातचीत तभी संभव होगी जब मनसे भाजपा से अलग हो जाए।

राजनीति में कब कौन किसके साथ खड़ा हो जाए, कहना मुश्किल है — लेकिन इतना तय है कि अगर यह मिलन होता है, तो महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ सकता है।

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