तमिलनाडू के चिदम्बरम मंदिर - नटराज स्वरूप में है भगवान शिव

Jitendra Kumar Sinha
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देवों के देव महादेव सबसे जल्द प्रसन्न होने वाले देव हैं। भगवान शिब के जितने नाम हैं, उतने ही उनके स्वरूपों की पूजा की जाती है। दुनिया के सबसे बड़े मंदिरों में अंगकोर बाट, दूसरे नंबर पर तमिलनाडु में स्थित सबसे बड़ा मंदिर श्रीरंगनाथ मंदिर और तीसरा सबसे बड़ा मंदिर दिल्ली का अक्षरधाम है। 


तमिलनाडु के चिदम्बरम में स्थित थिल्लई नटराज का मंदिर है। यहां पर भगवान शिव के नटराज रूप हैं। इस मंदिर को चिदम्बरम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। तमिलनाडु के चिदम्बरम में स्थित इस नटराज मंदिर के संबंध में मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी जगह पर अपने आनंद नृत्य की थी।


मंदिर 106,000 वर्ग मीटर एरिया में फैला है और मंदिर में लगे हर पत्थर पर भगवान भोलेनाथ के अनोखे भरतनाट्यम नृत्य की मुद्राएं हर जगह उकेरा गया है। मंदिर में 9 द्वार और 5 बड़े सभागार हैं। इसी भवन में पंदरीगावाल्ली और गोविंदराज का मंदिर भी है। देश के उन मंदिरों में शामिल है, जहां भगवान शिव और वैष्णव एक ही स्थान पर विराजमान हैं।


मान्यता है कि यह स्थान, पहले भगवान गोविंद राजास्वामी का था। एक बार भगवान शिव गोविंद राजास्वामी से मिलने आए थे कि वह भगवान शिव और पार्वती के बीच नृत्य प्रतिस्पर्धा के निर्णायक बने। इस बात को स्वीकारने के बाद भगवान शिव और देवी पार्वती में नृत्य प्रतिस्पर्धा हुई। काफी देर तक चली इस प्रतिस्पर्धा में जब कोई एक दूसरे को नहीं हरा पाया तो भगवान शिव ने गोविंद राजास्वामी से विजय होने की युक्ति पूछी। तब गोविंद राजास्वामी ने एक पैर से उठाई मुद्रा में  नृत्य किए जाने का संकेत दिया। वहीं यह मुद्रा महिलाओं के लिए वर्जित थी। ऐसे में जैसे ही भगवान भोलेनाथ नृत्य की इस मुद्रा में आए तो देवी पार्वती ने हार मान ली। जिसके बाद ही भगवान भोलेनाथ को यहां पर नटराज स्वरूप में स्थापित किया गया था। 


किदवंती यह भी है कि पश्चिमी वैज्ञानिकों ने 8 वर्षों के शोध के बाद पता लगाया कि भगवान नटराज का बड़ा पैर जिस स्थान पर स्थापित है, वह दुनिया के चुंबकीय भूमध्य रेखा का केंद्र बिंदु है। यह 11 डिग्री अक्षांश पर स्थित है। स्वयं को पृथ्वी के चुंबकीय प्रभावों से मुक्त करने के लिए एक आदर्श स्थान है। 


चिदंबरम मंदिर में स्थित नटराज स्वरूप भगवान शिव मंदिर पंच तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाले 5 मंदिरों में से एक है। चिदंबरम मंदिर को चिदंबरम आकाश (आकाश), कालाहस्ती मंदिर को श्रीकालहस्ती पवन (वायु) और कांची एकम्बरेचर पृथ्वी को दर्शाता है। यह सभी 3 मंदिर 79 डिग्री 41 मिनट देशांतर पर एक सीधी रेखा में स्थित हैं।

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