जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए 1960 से लागू सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है। इस निर्णय के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है, और अब वह चीन की सहायता की बात कर रहा है।
पाकिस्तानी पत्रकार और पूर्व सांसद मुशाहिद हुसैन सैयद ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि यदि भारत पाकिस्तान का पानी रोकता है, तो चीन भी भारत की नदियों का पानी रोक सकता है। उन्होंने तिब्बत से निकलने वाली सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों का हवाला देते हुए कहा कि इनका स्रोत चीन के नियंत्रण में है। हुसैन ने भारत के निर्णय को आरएसएस के प्रभाव में लिया गया बताया और कहा कि इससे भारत को भी नुकसान होगा।
भारत के इस कदम से पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाने की बात कही है और चीन एवं रूस से समर्थन की अपेक्षा जताई है। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है, जिससे भारत को आर्थिक नुकसान होने की संभावना है।
सिंधु जल संधि के निलंबन से पाकिस्तान की कृषि और जल आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। भारत के इस निर्णय ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है, और भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि जल संसाधनों पर नियंत्रण और कूटनीतिक संबंधों में संतुलन बनाए रखना दोनों देशों के लिए चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
